सरगुजा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर, 15 अप्रैल। छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश महासचिव परवेज आलम गांधी ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने सदैव महिला सशक्तिकरण और महिला आरक्षण का समर्थन किया है।
उन्होंने जारी बयान में कहा कि कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में यूपीए सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक को राज्यसभा से पारित कर ऐतिहासिक पहल की थी। वहीं वर्तमान में एनडीए सरकार द्वारा महिला आरक्षण की आड़ में 131वां संविधान संशोधन विधेयक को जिस प्रकार जल्दबाज़ी में लाने की तैयारी की जा रही है, वह कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
परवेज आलम गांधी ने कहा कि चुनावी माहौल के बीच इस प्रकार की जल्दबाज़ी संदेह उत्पन्न करती है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी कौन सी आपात परिस्थिति है, जिसके कारण इतनी त्वरित कार्रवाई की जा रही है। साथ ही उन्होंने इसे आचार संहिता के उल्लंघन की आशंका से भी जोड़ते हुए कहा कि इस विषय पर स्पष्टता आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जब देश में नई जनगणना की प्रक्रिया जारी है, तब वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने का विचार अव्यावहारिक है और इससे नए मतदाताओं के साथ अन्याय हो सकता है।
उनके अनुसार इससे देश के विभिन्न क्षेत्रों, विशेषकर उत्तर और दक्षिण भारत के बीच असंतुलन की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर सर्वदलीय बैठक आयोजित करने के बजाय विपक्षी दलों से अलग-अलग चर्चा करना तथा राज्यों को विश्वास में लिए बिना निर्णय लेना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों, राज्यों और संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा कर आम सहमति के आधार पर आगे बढ़ा जाए।


