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महाविद्यालय की छात्रा से लैंगिक उत्पीडऩ के मामले में पूर्व प्राचार्य दोषसिद्ध, सश्रम कारावास व अर्थदंड की सजा
03-Feb-2026 10:15 PM
 महाविद्यालय की छात्रा से लैंगिक उत्पीडऩ के मामले में पूर्व प्राचार्य दोषसिद्ध, सश्रम कारावास व अर्थदंड की सजा

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रामानुजगंज,3 फरवरी। शासकीय लरंग साय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रामानुजगंज की छात्रा से लैंगिक उत्पीडऩ के प्रकरण में न्यायालय ने पूर्व प्राचार्य को दोषी ठहराते हुए सश्रम कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह निर्णय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय, रामानुजगंज द्वारा आपराधिक प्रकरण क्रमांक 1146/2024 में 3 फरवरी को पारित किया गया।

प्रकरण के अनुसार आरोपी रामभजन सोनवानी, जो घटना के समय महाविद्यालय में प्राचार्य के पद पर पदस्थ था, पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 75(3) एवं 79 के अंतर्गत आरोप तय किए गए थे।

अभियोजन के अनुसार 12 अगस्त 2024 को दोपहर लगभग 3.30 बजे पीडि़ता अपनी सहेली के साथ आवेदन पर हस्ताक्षर कराने प्राचार्य कक्ष गई थी। इस दौरान आरोपी ने पीडि़ता के प्रति अशोभनीय टिप्पणियां कीं, गंदे इशारे किए, उसकी लज्जा का अनादर किया तथा हस्ताक्षर के बहाने उसे घर बुलाने का प्रयास किया।

पीडि़ता द्वारा थाना रामानुजगंज में 16 अगस्त 2024 को लिखित शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज कर जांच प्रारंभ की गई। विवेचना के दौरान पुलिस ने घटनास्थल का नक्शा तैयार किया, साक्षियों के बयान दर्ज किए तथा सीसीटीवी फुटेज एवं अन्य साक्ष्य जब्त किए। अनुसंधान पूर्ण होने पर 26 सितंबर 2024 को अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

न्यायालय में विचारण के दौरान पीडि़ता, उसके पिता एवं अन्य साक्षियों के कथनों को विश्वसनीय मानते हुए न्यायालय ने पाया कि आरोपी ने अपने पद का दुरुपयोग कर छात्रा की गरिमा का उल्लंघन किया। न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि इस प्रकार का आचरण न केवल कानूनन अपराध है बल्कि शैक्षणिक संस्थानों की मर्यादा के भी प्रतिकूल है।

न्यायालय ने आरोपी को धारा 75(3) के अंतर्गत 6 माह के सश्रम कारावास एवं 25 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 79 के अंतर्गत 1 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 25 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।

दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अर्थदंड की राशि पीडि़ता को क्षतिपूर्ति के रूप में प्रदान करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

यह फैसला शैक्षणिक संस्थानों में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के प्रति एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। मामले की ताकत लोक अभियोजक अशोक गुप्ता के द्वारा किया गया वहीं प्रकरण की विवेचना जांच अधिकारी अतुल दुबे ने की थी।


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