सरगुजा
कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने कहा सरकार धान नहीं खरीदने का कर रही षडय़ंत्र
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अम्बिकापुर, 30 नवंबर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा अंबिकापुर के राजीव भवन में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया, जिसमें जिला पंचायत उपाध्यक्ष आदित्येश्वर शरण सिंह देव ने कहा कि धान खरीदी केंद्रो में किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, 21 क्विंटल टोकन की बजाय उन्हें 16 क्विंटल का ही टोकन दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जब वह सहकारिता विभाग के अधिकारी से बातचीत किए तो खरीदी को लेकर वह कोई लिखित आदेश नहीं होना बताया और साथ ही कहा कि अगर धान खरीदी कम हो रही है तो इस पर वह दिखाएंगे।श्री सिंहदेव ने कहा कि अधिकारियों के इस तरह गोल-गोल बातें सरकार के धान खरीदी को कम करने की मंशा को दर्शाता है।साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार 160 लाख मैट्रिक टन धान खरीदी 47 दिनों में नहीं खरीद सकती,सरकार को 31 मार्च तक धान खरीदी की अवधि बढ़ाना चाहिए।आदित्यायेश्वर ने कहा कि सरगुजा के सभी सोसाइटी में ऑनलाइन टोकन प्रक्रिया होने के बाद भी उन्हें परेशान होना पड़ रहा है 6 से 15 दिन बाद का टोकन मिल रहा है। धान को बारिश से बचाने की भी कोई उचित व्यवस्था नहीं की गई है।
जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राकेश गुप्ता ने कहा कि विष्णु देव की सरकार धान खरीदी को लेकर षड्यंत्र कर रही है।सरकार की नई नीति से स्पष्ट है कि वह किसानों से धान खरीदी कम करना चाहती है।इस बार 160 लाख मिट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य है. इसके लिए 14 नवंबर से 31 जनवरी तक का समय निर्धारित है। शनिवार, रविवार और सरकारी छुट्टियों को घटाकर कुल 47 दिन मिल रहे हैं।इसका मतलब यह है कि प्रति दिन सरकार को लगभग साढे तीन लाख मिट्रिक टन की खरीदी प्रति दिन करनी होगी, तब जाकर लक्ष्य पूरा होगा।
वर्तमान में जिस रफ्तार से धान खरीदी हो रही है उसमें लक्ष्य प्राप्त करना असंभव लग रहा।सोसाइटियो को निर्देश है कि एक दिन में अधिकतम 752 क्विंटल यानी 1880 कट्टा धान ही खरीदा जाना है। ऐसे में एक किसान का शेष धान के लिये उसको आगामी दिनों की तारीख दी जा रही है।
श्री गुप्ता ने बताया कि सरकार ने यह घोषणा किया है कि 72 घंटे में किसानों के खाते में पैसा आयेगा, लेकिन जो लोग 14 नवंबर को धान बेचे थे, उनके खाते के रकम नहीं आया है, जो रकम आ रहा है वह एक मुत 3100 नहीं है। सिर्फ 2300 रु. प्रति क्विंटल ही आ रहा है। (जो समर्थन मूल्य है उतना) अनावरी रिपोर्ट गलत बनाया जा रहा जिसके आधार पर मात्र 9 से 12-14 क्विंटल धान खरीदा जा रहा। किसानो से पूरा 21 क्विंटल धान नहीं खरीदा जा रहा है।बीज उत्पादक किसानों से सोसायटी में धान नहीं खरीदा जा रहा। सोसायटी में सूचना चस्पा किया गया है कि बीज उत्पादक किसानों का धान नहीं लिया जायेगा। सोसायटी में बारदाना की कमी है किसान परेशान है।
धान खरीदी केन्द्रो में टोकन नहीं जारी किया जा रहा है किसान घंटो खड़े रहते हैं।
आनलाईन टोकन सिस्टम के कारण किसानों को 15 दिन बाद का भी टोकन नही मिल रहा है।
धान की कीमत का भुगतान 3217 रू. में करे क्योंकि 3100 रू. भाजपा ने अपने चुनावी वायदे में कहा था। केन्द्र सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 117 रू. बढ़ा दिया है। इस कारण इस वर्ष धान की खरीदी 3100 रू. से बढ़ाकर 3217 रू. किया जाये। कांग्रेस के समय भी कांग्रेस ने धान का समर्थच मूल्य 2500 देने का वादा किया था लेकिन समर्थन मूल्य बढऩे पर कांग्रेस ने 2040 रु. में धान खरीदी किया था।
धान उपार्जन की कांग्रेस सरकार की नीति को भाजपा सरकार ने बदल दिया है।नई नीति के अनुसार 72 घंटे में बफर स्टॉक के उताव की नीति को बदल दिया है।
पहले इस प्रावधान के होने से समितियों के पास ये अधिकार होता था कि वे समय सीमा में उठाव न होने पर चुनोती दे सकें।अब जो बदलाव हुआ है उसके बाद बफर स्टॉक के उठाव की कोई सीमा ही नहीं है। धान खरीदी केन्द्रों में जगह की कमी आ रही है।पहले मार्कफेड द्वारा समस्त धान का निपटान 28 फरवरी तक कर देने की बाध्यता रखी गई थी अब इसे बढ़ाकर 31 मार्च कर दिया गया है।यानी समितियों / संग्रहण केंद्रों में धान अब दो महीने तक रखा रह रहेगा।
धान मिलिंग के लिए कांग्रेस सरकार ने प्रति क्विटल 120 रुपए देने का निर्णय लिया था. जिसका
परिणाम यह हुआ था कि प्रदेश भर में 700 नई राइस मिलें खुली थीं।अब सरकार ने मिलर के लिए 120 रुपए को घटाकर 60 रुपए कर दिया है। इस कारण राईस मिलर हड़ताल पर है धान सोसायटी में जाम है।मिलरों को 120 की जगह 60 रुपए देने के फैसले के बाद विभिन्न जिलों में राइस मिलर एसोसिएशन धान की मीलिंग करने में असमर्थता व्यक्त करने लगे हैं।
प्रेस वार्ता के दौरान वरिष्ठ कांग्रेसी नेता बालकृष्ण पाठक,श्रम कल्याण मंडल के पूर्व अध्यक्ष सफी अहमद, जेपी श्रीवास्तव,अमित सिंह देव,आशीष सिन्हा,विकल झा,शिवेश सिंह सहित अन्य मौजूद थे।


