सरगुजा

भारतीय किसान संघ ने जीएम फसल से होने वाले नुकसान को लेकर सांसद को सौंपा ज्ञापन
18-Nov-2024 10:53 PM
भारतीय किसान संघ ने जीएम फसल से होने वाले नुकसान को लेकर सांसद को सौंपा ज्ञापन

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

अंबिकापुर, 18 नवंबर। भारतीय किसान संघ प्रारंभ से जीएम सरसों के विरोध में मुखर रहा है। किसान संघ ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत जिम्मेदार सरकार के मंत्री एवं सांसदों को उनके संसदीय क्षेत्रों में ज्ञापन देने का निर्णय लिया है। यदि सरकार ने इस पर समय रहते कोई निर्णय नहीं लिया तो भारतीय किसान संघ बड़ा जनआंदोलन कर सरकार का विरोध करेगा।

भारतीय किसान संघ किसानों से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर अपनी बारीकी से नजर बनाए हुए हैं तथा निरंतर जीएम फसल से होने वाले नुकसान के बारे में किसानों को जागरूक कर सरकार के समक्ष विरोध जता रहा है। इस विषय को लेकर सोमवार को भारतीय किसान संघ जिला ने लोकसभा के सांसद को ज्ञापन सौंपा है।

ज्ञापन में बताया गया कि जेनेटिकली मॉडिफाइड सरसों की गुणवत्ता पर एक बड़ा प्रश्न चिन्ह लगा हुआ है,यहां तक सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने निर्णय में इसके उपर संदेह जताया है।

देश में जीएम फसल के रूप में बीटी कपास को सन 2002 में किसानों के बीच पिछले दरवाजे से लाया गया। कपास में बेक्टिरिया बेसिलस थुरंगेसिस (बीटी) से दो अलग जीन को डालकर बारी-बारी से अधिक जहरीला कपास बनाया गया और बताया गया था कि कपास में लगने वाली कीट पिंक बोलवार्म (गुलाबी सुंडी) को रोकेगा। लेकिन यह झूठा साबित हुआ। वर्ष 2005 में बी.जी.1 और 2009 में बी. जी.2 नाकाम हो गया। वैसे ही कई फसलों में जीव जंतुओं के जीन को डालकर नया जीव तैयारी का खेल चल रहा है। अभी तक यह तय नहीं है कि ऐसी फसलों को फसल कहें या जीव ?

खाद्यान फसलों में यदि जीव जंतुओं का जीन डाला जाता है तो उसको शाकाहारी बोलेंगें या मांसाहारी यह भी तय नहीं है। फिर भी बिना किसी चर्चा के, बिना किसी सलाह के, बिना किसी वैज्ञानिक परीक्षण-निरीक्षण से केवल झूठे प्रचार के आधार पर बीटी बेंगन से लेकर जीएम सरसो तक फसलों को भारत में लाने की कोशिशें हो रही है।

लगभग 20 वर्षों के अध्ययन के पश्चात् हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई करते हुए माना कि जीएम पर जितने परीक्षण के प्रमाण हैं, वे सभी विदेशों के ही हैं, न्यायालय ने सरकार से चार माह के भीतर जीएम फसलों पर समिति बनाने को कहा है जिस पर जीएम बीज के पक्षधर और सरकार अब तक खामोश बैठी हुई है।

हाल ही में कई अनुसंधान केन्द्रों के द्वारा भी इसकी पुष्टि की गई है कि जीएम फसल हर प्रकार से भारत की भौगोलिक संरचना, पर्यावरण,जलवायु एवं कृषि संस्कृति के लिए सर्वथा अनुचित और हानिकारक है। अत: इस पर तत्काल प्रभाव से देश में प्रयोग करने से रोक लगाई जाए।


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