सरगुजा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर, 17 नवंबर। स्थानीय दिगंबर जैन मंदिर में प्रमाणिक पाठशाला के बच्चों के लिए एक विशेष और प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें जैन समाज की एकता और जागरूकता को नए स्तर पर पहुंचाया। 15 नवंबर से आरंभ दो दिवसीय कार्यक्रम में बच्चों ने अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता के माध्यम से समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया।
नुक्कड़ नाटक: फास्ट फूड के नुकसान और घर के खाने के फायदे कार्यक्रम के पहले चरण 15 नवंबर को घड़ी चौक और जैन मंदिर चौक पर नुक्कड़ नाटक के रूप में आयोजित किया गया। इस नाटक का मुख्य उद्देश्य फास्ट फूड और नूडल्स जैसे अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाना था। इसके साथ ही, नाटक के माध्यम से घर के बने शुद्ध और पोषणयुक्त खाने के महत्व को भी दर्शाया गया। इस नाटक में बच्चों ने बड़ी ही निपुणता और उत्साह के साथ अपनी भूमिका निभाई। उन्होंने न केवल अपनी अभिनय क्षमता का प्रदर्शन किया, बल्कि दर्शकों को यह समझाने में सफल रहे कि स्वस्थ जीवन के लिए उचित आहार कितना महत्वपूर्ण है। इस प्रयास से न केवल बच्चों की प्रतिभा का विकास हुआ, बल्कि उन्होंने समाज को एक सकारात्मक संदेश भी दिया।
16 नवंबर: कार्निवल फूड फेस्ट का आयोजन
नुक्कड़ नाटक के अगले दिन 16 नवंबर को कार्निवल फूड फेस्ट का आयोजन किया गया। यह कार्निवल फूड फेस्ट बच्चों और समाज के सभी सदस्यों के लिए उत्साह और उमंग से भरपूर एक अनोखा अनुभव था। कार्निवल फूड फेस्ट में जैन समाज के बच्चों ने अपनी रचनात्मकता का परिचय देते हुए घर के बने सामान्य खाने को स्वादिष्ट और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया। इस कार्निवल फूड फेस्ट में विभिन्न प्रकार के व्यंजन प्रदर्शित किए गए, जिनमें बच्चों ने अपने हाथों से बने व्यंजनों को सजाकर और प्रस्तुत करके लोगों का दिल जीत लिया। बच्चों ने दिखाया कि साधारण घरेलू भोजन को भी किस प्रकार रचनात्मक तरीके से पेश किया जा सकता है, जिससे यह न केवल स्वास्थ्यवर्धक बल्कि स्वादिष्ट भी लगे।
कार्निवल फूड फेस्ट के मुख्य अतिथि प्रजापति ब्रह्माकुमारी अंबिकापुर शाखा की विद्या दीदी थीं। उन्होंने मेले में उपस्थित होकर न केवल बच्चों का उत्साहवर्धन किया, बल्कि उनके प्रयासों की सराहना भी की। उनके प्रेरणादायक शब्दों ने बच्चों और अभिभावकों को आगे भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्रेरित किया।
मेले में बच्चों द्वारा बनाए गए व्यंजनों का मूल्यांकन करने के लिए जज के रूप में केआर टेक्निकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रितेश वर्मा, पंचामृत होटल की प्रबंधक बोनी डे और आर्ट टीचर अर्जिता सिन्हा उपस्थित थीं। इन सभी ने बच्चों के कौशल की सराहना की और उन्हें प्रोत्साहित किया। निर्णायक मंडल ने बच्चों के व्यंजनों को उनके स्वाद, प्रस्तुति और रचनात्मकता के आधार पर परखा और उन्हें आवश्यक सुझाव भी दिए।
इस आयोजन को सफल बनाने में अम्बिकापुर जैन पाठशाला की शिक्षिकाओं रीनू जैन, रूबी जैन,रुचि जैन, काकुल जैन, अंकिता जैन, राखी जैन,श्रुति जैन, किरण जैन ,अंजलि जैन का विशेष योगदान रहा। उन्होंने बच्चों को न केवल कार्यक्रम के लिए तैयार किया, बल्कि उन्हें अपनी रचनात्मकता और कौशल को निखारने का अवसर भी प्रदान किया। इसके अलावा जैन समाज के अध्यक्ष अशोक जैन और कार्य समिति के सदस्यों महावीर जैन, विक्रांत जैन, अजीत जैन, अतुल्य जैन, अखिलेश जैन और विवेक जैन ने कार्यक्रम की योजना बनाने और उसे सफलतापूर्वक संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व और समर्पण के कारण यह आयोजन समाज के लिए एक यादगार अनुभव बना।
कार्यक्रम में समाज के अभिभावकों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और बच्चों को आशीर्वाद दिया। इनमें डॉ. अंजू गोयल, रेखा जैन, डॉ. एमके जैन, मोदी जी और महेश जैन , राजेन्द्र कुमार जैन जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। इन सभी ने बच्चों को प्रेरित किया और उन्हें भविष्य में भी ऐसे प्रयास करने के लिए उत्साहित किया।
यह आयोजन इतना सफल रहा कि समाज के सभी सदस्यों ने इसे भविष्य में और भी बड़े और व्यापक स्तर पर आयोजित करने की इच्छा व्यक्त की। बच्चों और समाज के सामूहिक प्रयास ने इस आयोजन को न केवल प्रेरणादायक बनाया, बल्कि इसे समाज में जागरूकता और एकता का प्रतीक भी बना दिया।कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने न केवल अपने कौशल और रचनात्मकता का प्रदर्शन किया, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि स्वस्थ जीवन के लिए सही आहार और सकारात्मक सोच कितनी महत्वपूर्ण है। इस प्रकार, यह आयोजन बच्चों के व्यक्तिगत विकास और समाज के सामूहिक उत्थान का माध्यम बना।
अंत में यह कार्यक्रम न केवल जैन समाज के लिए बल्कि पूरे अंबिकापुर के लिए एक प्रेरणा स्रोत बना। बच्चों और समाज के सदस्यों के सामूहिक प्रयासों ने यह साबित कर दिया कि जब एकजुटता और समर्पण के साथ काम किया जाए, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। भविष्य में ऐसे आयोजनों से समाज में जागरूकता और एकता को और भी प्रबल किया जा सकता है।


