सरगुजा

राजनेता चतुर होते हैं वह फूट डालकर राज करते हैं- निश्चलानंद सरस्वती महराज
29-Sep-2024 10:01 PM
राजनेता चतुर होते हैं वह फूट डालकर राज करते हैं- निश्चलानंद सरस्वती महराज

धर्म सभा में भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का आह्वान

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

अंबिकापुर, 29 सितंबर। तीन दिवसीय प्रवास पर  अंबिकापुर पहुंचे पुरी पीठाधीश्वर श्रीमज्जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने अम्बिकापुर नगर के नारायणी परिसर में विशाल हिंदू राष्ट्र धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में जो प्रधानमंत्री के पद पर प्रतिष्ठित हो जाता है वही गौ हत्या के समर्थक बन जाते हैं। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि पहले जब वह मुख्यमंत्री थे और फिर केंद्र में आए तो प्रधानमंत्री हुए तब मैंने कहा गौ हत्या बंद होना चाहिए पर वह दो जाति धर्म विशेष के दबाव में आ गए।

शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महराज ने आगे कहा कि भारत में चुनाव प्रक्रिया ठीक नहीं है, भारत को भारत के रूप में स्थापित करना है तो अमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता है। उन्होंने धर्म सभा में हिंदू राष्ट्र बनाने का लोगों से आह्वान किया और कहा कि हर हिंदू परिवार हर दिन एक रुपए अपने जेब से निकालिए और मठ मंदिरों को केंद्र बनाकर अपने क्षेत्र के विकास में लगाइए।

उन्होंने कहा कि सिर्फ नेताओं पर निर्भर मत रहिए, राजनेता चतुर होते हैं वह फूट डालकर राज करते हैं। कभी स्वर्ण तो कभी आदिवासी के नाम पर फूट डालकर राज करना ही उन्हें आता है। उन्होंने कहा कि आप जब अपने जेब से हर दिन एक रुपए निकलेंगे तो आपके क्षेत्र का 80 प्रतिशत कार्य हो जाएगा,16 प्रतिशत कार्य राज्य और केंद्र की सरकारे कर देगी।

सीतापुर क्षेत्र के 30 लोगों की कराई घर वापसी

नारायणी परिसर में हिंदू राष्ट्र धर्म सभा के दौरान शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महराज ने सरगुजा जिला के सीतापुर क्षेत्र के लगभग 30 लोगों की घर वापसी कराई। यह लोग कुछ लोगों के द्वारा प्रलोभन में आकर एक धर्म विशेष के साथ जुडक़र अपना धर्म परिवर्तन कर लिए थे,वह पुन: हिंदू धर्म के रीति रिवाज से प्रभावित होकर निश्चलानंद सरस्वती महराज के समक्ष हिंदू धर्म में शामिल होने उपस्थिति दर्ज कराई। इसके बाद में महाराज ने उक्त सभी की घर वापसी कराई।

महाराज ने कहा कि हिंदू धर्म ही आदि अनादि हैं और सर्वश्रेष्ठ है,जो लोग प्रलोभन और अंधविश्वास के कारण अपने सनातनी धर्म को छोडक़र दूसरे धर्म में गए हैं वह भी धीरे-धीरे अपने घर लौट आएंगे।


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