सरगुजा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
लखनपुर, 9 सितंबर। सडक़ पर घूमते हर गौ माता के गले में एक रेट्रो रिफ्लेक्टिव पट्टा बांधा जाए, जिससे अंधेरे एवं दुर्घटना से उनकी रक्षा किया जा सके। रायपुर में आईआईटी दिल्ली से ग्रेजुएट और सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार के रायपुर कार्यालय में बतौर सीनियर अधिशासी अभियंता नीरव पंजाबी द्वारा ये मुहिम चालू की गई, जिसे अंबिकापुर विधायक द्वारा भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
जिले में विधायक राजेश अग्रवाल के निर्देशानुसार सडक़ दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एक कारगर ओर अनोखा तरीका ढूंढा है, जो नीरव पंजाबी द्वारा पूरे प्रदेश में शुरू किया गया है और इस मुहिम को नाम दिया गया है गौ रक्षा और सडक़ सुरक्षा अभियान।
इस तरीके से जनप्रतिनिधि एवं आमजनों द्वारा जहां आवारा पशुओं की वजह से होने वाले हादसों पर रोक लगा पाने में कामयाब हासिल करने के लिए उन्होंने एक पहल शुरू कर दी है। जिसमें आवारा पशु खासतौर से गायों को भी इन हादसों से बचाया जा सकेगा।
ज्ञात हो कि हाईवे पर विचरण करने वाली गायों के वजह से आए दिन कोई न कोई हादसा होता ही रहता है। इस बात से परेशान विधायक एवं नीरव पंजाबी ने नई तरकीब निकालते हुए गायों की गर्दन पर रेट्रो रिफ्लेक्टिव स्ट्रिप से बना पट्टा लगा दीया जाए। इससे यह होगा कि जब कोई वाहन सडक़ से गुजरेगा तो गायों के गर्दन पर लगा रेट्रो रिफ्लेक्टिव टेप दूर से चमकने लगेगा, जिससे वाहन चालक अपने वाहन को समय रहते नियंत्रित कर लेगा और दुर्घटना से बच जाएगा।
विधायक अंबिकापुर व गौ-सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में सडक़ों पर घूम रहे आवारा मवेशियों के गर्दन से रेट्रो रिफ्लेक्टिव पट्टे लगाए गए। जिससे कुछ हद तक सडक़ हादसों पर अंकुश लग सके। विधायक अंबिकापुर राजेश अग्रवाल ने कहा कि मवेशियों के गर्दन में रेट्रो रिफ्लेक्टिव टेप से बने पट्टे लगाने से सडक़ पर निकलने वाले वाहन चालकों को दूर से मवेशी दिख जाएंगे। जिससे स्पीड़ कंट्रोल कर आसानी के साथ वाहन क्रास कर सकेंगे। सौरभ अग्रवाल द्वारा हाईवे किनारे विचरण करने वाले आवारा पशुओं व गायों को पकडक़र उनके गर्दन पर रेट्रो रिफ्लेक्टिव से बने पट्टे गायों को लगाई गई।
सौरभ अग्रवाल का कहना था कि हाईवे किनारे विचरण करने वाले मवेशी रात के समय बैठने के लिए सूखा स्थान तलाशते हैं जिसके चलते बारिश के मौसम में हमेशा मवेशी सडक़ पर ही बैठते हैं। जिससे मोड़ या तेज गति से आने वाले वाहन चालकों को ये दिखाई नहीं देते हैं, जिससे ये दुर्घटना की चपेट में आने से मौत के शिकार हो जाते हैं।


