सरगुजा
जिपं उपाध्यक्ष ने सीईओ से की मुलाकात
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अम्बिकापुर, 2 सितंबर। जिला पंचायत उपाध्यक्ष आदित्येश्वर शरण सिंह देव ने आज जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से मुलाकात कर जिले से संबंधित विभिन्न विकास कार्यों, ग्रामीण स्तर की समस्या एवं अन्य विषय जो ग्रामीण क्षेत्रों से निकल कर आ रहे हैं, उस पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान जिला पंचायत की अध्यक्ष मधु सिंह एवं जिला पंचायत सदस्य व कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता भी साथ थे।
जिला पंचायत के उपाध्यक्ष आदित्येश्वर शरण सिंह देव ने अपनी बात अपने ग्राम केशवपुर को लेकर शुरू की तथा कहा कि आये दिन केशवपुर के आत्मानंद स्कूल एवं कॉलेज में हुए कार्यों की शिकायत आ रही है। वहीं उन्होंने कहा कि करजी स्टेडियम के मामले में भी अब तक जांच नहीं हुई है। ये दोनों ही गांव एक जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं दूसरा जिला कांग्रेस अध्यक्ष का है और इसमें लगातार मीडिया में खबरें आ रही हैं जो कहीं ने कहीं हमें भी प्रभावित करती हैं, मीडिया से जुड़े लोग आये दिन हम से भी संपर्क करते हैं। दोनों ही ग्राम पंचायतों के पुरे मामले में एक उच्चस्तरीय जांच जरूरी है। जिस पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी नूतन कंवर ने कहा कि केशवपुर के मामले पर सरगुजा कलेक्टर ने स्वयं एक जांच कमेटी संयुक्त कलेक्टर की अध्यक्षता में बनायी है, जबकि एक कमेटी जिला पंचायत की ओर से मैंने भी गठित किया है, दोनों ही कमेटियां जांच कर रही हैं।
जिला पंचायत उपाध्यक्ष आदित्येश्वर शरण सिंह देव ने कहा कि आत्मानंद महाविद्यालय में समतलीकरण का मामला बहुत की गंभीर है। पांचवी अनुसूची वाले क्षेत्र में ग्राम पंचायत को किनारे कर सब इंजीनियर के खाते में राशि गई और बिना कार्य किये निकाल ली गई। आरटीआई में एमबी बुक की पुरी कॉपी उपलब्ध करा दी गई और दूसरी ओर थाने में एफआईआर भी दर्ज करा दिया गया कि एमबी बुक गुम हो गई है। यह पुरी तरह से शासकीय राशि का दुरूपयोग के साथ-साथ शासकीय दस्तावेजों से छेड़छाड़ एवं अपराधिक मामला है। इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्यवाही करें। वहीं अम्बिकापुर जनपद पंचायत अंतर्गत जनपद सदस्य विकास निधि में बगैर जनपद सदस्यों की अनुशंसा एवं जानकारी के राशियों का बंदरबाट किया गया। इसकी भी जांच करायी जाये।
डीएमएफ से हुए कार्यों की भी हो जांच
जिला पंचायत उपाध्यक्ष आदित्येश्वर शरण सिंह देव ने 2018-19 में डीएमएफ से हुए कार्यों की भी जांच कराने की मांग की है उन्होंने कहा कि डीएमएफ की राशि बड़ी मुश्किल से मिल पाती है। जिन क्षेत्रों में खनन कार्य चल रहे हैं वहां के लोग कई तरह से प्रभावित हैं और जिले में डीएमएफ की राशि का बंदरबाट किया जा रहा है।
उन्होंने मैनपाट के मांझी युवााओं के सांस्कृतिक गतिविधियों पर खर्च 26.04 लाख रूपये एवं मांझी समाज को जागरूक करने पर खर्च 20.00 लाख रूपये व विशेष पिछड़ी जनजातियों को टार्च और रेडियो वितरण के नाम पर खर्च किये गये 28 लाख रूपये के हितग्राहियों की जानकारी सहित जांच कराते हुए सत्यापन कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि न तो मैनपाट के जिला पंचायत सदस्य को ऐसे किसी कार्य की जानकारी है और न ही वहां के लोगों को राशि कहां खर्च हुई इसकी पुरी जांच हो।
जिला पंचायत उपाध्यक्ष आदित्येश्वर शरण सिंह देव ने जनपद पंचायत लुण्ड्रा में जनवरी 2021 से दिसम्बर 2023 तक हुए केन्द्र एवं राज्य सरकार के सभी योजनाओं के बचत राशियों से हुए कार्य की जांच कराने की मांग भी की है। उन्होंने कहा कि एक कमेटी बनाकर जांच करायी जाये। वहां के समस्त जनपद सदस्यों ने पहले ही कार्यवाही की मांग की है। आईएपी योजना, बीआरजीएफ योजना सहित विभिन्न योजना जिसमें कलेक्टर की अनुशंसा से राशि जारी होनी चाहिये। वहीं लुण्ड्रा में जनपद के सामान्य सभा में कोई विषय लाये बिना कैसे एक जनपद सीईओ ने इन योजनाओं की राशि अपने हस्ताक्षर से खर्च कर दी इसकी कमेटी बना कर जांच करायी जाये।
जिला पंचायत सदस्य एवं जिला कांग्रेस के अध्यक्ष राकेश गुप्ता ने कहा कि कई जगह से यह खबर आ रही है कि बिना कार्य किये ही आंतरिक विद्युतिकरण योजना की राशि निकाली जा रही है। जबकि इसके लिये जिला पंचायत के सामान्य सभा से विद्युत विभाग को एजेंसी बनाया गया है। विद्युतीकरण के कार्य वहां करने हैं जहां पर बिजली नहीं पहुंच पायी अथवा कई स्थानों पर कृषकों द्वारा सप्लाई हेतु भी विद्युत पोल की मांग है वहां तक बिजली पहुंचाना है लेकिन बिना कार्य किये ही काफी राशि निकाल ली गई है। कार्य शिघ्र करवाया जाये।
वहीं जिला पंचायत अध्यक्ष मधु सिंह ने कहा कि समस्त योजनाओं की जिनमें कहीं न कहीं से शिकायत आ रही है जो कि बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार की शिकायत आ रही है ऐसे समस्त मामलों पर जांच करायी जाये ताकि भ्रष्टाचार करने वाले लोगों पर लगाम लग सके।
कार्यवाही नहीं होने के कारण ही इस तरह की स्थिति बन रही है कि भ्रष्टाचार करने से अधिकारी व कर्मचारी बाज नहीं आ रहे हैं।


