सरगुजा

अम्बिकापुर से सीतापुर के बीच 55 किमी एनएच पर कई ब्लैक स्पॉट, पुल-पुलियों में अनियमित उछाल से लगातार हो रहे हादसे
31-Jul-2024 11:47 AM
अम्बिकापुर से सीतापुर के बीच 55 किमी एनएच पर कई ब्लैक स्पॉट, पुल-पुलियों में अनियमित उछाल से लगातार हो रहे हादसे

7 माह में तीन दर्जन से ज्यादा दुर्घटना में ढाई दर्जन की मौत, दो दर्जन से ज्यादा घायल

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बतौली, 30 जुलाई। अम्बिकापुर से सीतापुर के बीच 55 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग 43 के बीच में पिछले सात माह में कई दुर्घटनाएं घटित हुई हैं, जिनमें तीन दर्जन से दुर्घटना हुई हैं, ढाई दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, वहीं दो दर्जन से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जिनमें कई विकलांग भी हुए हैं।

राष्ट्रीय राजमार्ग-43 जिसे पूर्व में राष्ट्रीय राजमार्र्ग 78 के नाम से जाना जाता था, का निर्माण 7 अक्टूबर 2016 से निर्माणाधीन है। दो वर्ष के समयसीमा में तैयार होने वाले इस सडक़ के धीमी निर्माण गति के कारण आठ वर्ष बाद भी बन कर तैयार नहीं हुआ है।

इस संबंध में राष्ट्रीय राजमार्ग के ईई  नितेश तिवारी ने कहा कि जिन स्थलों के ब्लैक स्पॉट के लिए भेजे गए थे उसका ड्राफ्ट आ गया है। जिसका अवलोकन करने के बाद उसमें और स्थल जोडऩे हैं। कुछ समय और लग सकता है।

बताया जाता है कि राष्ट्रीय राजमार्र्ग के निर्माण के लिए दक्षिण भारत की जीवीआर कंपनी को अम्बिकापुर से पत्थलगांव के बीच 90 किलोमीटर सडक़ के लिए 2016 में 423 करोड़ रुपये में  ठेका मिला था। आर्थिक तंगी के कारण जीवीआर ने इस काम को दिल्ली की कंस्ट्रक्शन कम्पनी पार्थ को पेटी कांट्रेक्ट में दे दिया।

पार्थ कंपनी ने भी कुछ माह काम करने के बाद इससे अपना पल्ला झाड़ लिया और इस काम को सरगुजा के चार-पांच ठेकेदारों ने मिलकर करना चाहा, परन्तु कोई तार्किक विचार नहीं होने के कारण उन्होंने भी कुछ माह बाद काम से अपना हाथ खींच लिया। इन सबमें समयसीमा समाप्त हो चुकी थी और सीतापुर से लमगांव के बीच सडक़ खुदाई करने और मिट्टी डालने से सडक़ बदहाल हो गई, जिससे कई माह तक सडक़ चलने लायक भी नहीं रही। जीर्ण-शीर्ण और बदहाल सडक़ हो जाने के बाद ठेका कम्पनी जीवीआर और कंसल्टेंसी कम्पनी एवं राष्ट्रीय राजमार्र्ग प्रबंधन पर भारी दबाव आ गया। फिर मध्यप्रदेश की टीबीसीएल कम्पनी को पेटी कांट्रेक्ट में काम दिया गया।

टीबीसीएल ने रखी शर्त,

 मानने मजबूर एनएच और कंसल्टेंसी कम्पनी

कई कम्पनियों के काम छोड़ देने के बाद टीबीसीएल ने निर्माण काम प्रारम्भ किया, परन्तु टीबीसीएल ने एक शर्त रखी थी कि वह जैसे-तैसे कर के काम पूर्ण कर देगा। उस पर किसी प्रकार का काम पर कोई दबाव न बनाये। मजबूरी में ठेका कम्पनी जीवीआर, कंसल्टेंसी कम्पनी और राष्ट्रीय राज्यमार्ग प्रबंधन ने शर्त मान ली और काम प्रारम्भ हो गया।

दो थाना क्षेत्र में सर्वाधिक दुर्घटना, मौतें

सडक़ के टेक्निकल खामियों के साथ निर्माण के कारण बतौली और सीतापुर थाना क्षेत्र में सर्वाधिक दुर्घटना हुई। पिछले सात माह में देखा जाए तो बतौली से सीतापुर के बीच बेलकोटा और काराबेल के बीच तीन दर्जन से ज्यादा दुर्घटना हुई हैं। इन दुर्घटना में लगभग 30 मौतें और पच्चीस से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। दो पहिया वाहन,छोटी चार पहिया जिनमे कार, पिकअप,छोटा हाथी जैसे वाहन ज्यादा शिकार हुए हैं, जिनमें 20 से 25 वर्ष के युवकों की मौतें ज्यादा संख्या में हुई है।


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