सरगुजा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अम्बिकापुर, 14 फरवरी। सामाजिक व्यवहार परिवर्तन को लेकर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन शहर के राजमोहिनी देवी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में किया गया। यह कार्यक्रम यूनिसेफ से टैक्निकल सहायता प्राप्त इकाई एलायंस फ़ॉर बिहेवियर चेंज छत्तीसगढ़ के द्वारा आयोजित की गई।
छत्तीसगढ़ अलायंस फ़ॉर बिहिवियर चेंज के सरगुजा संभाग प्रभारी मंगल पांडेय ने कार्यक्रम में छात्राओं से बात करते हुए स्वयं सेवक की भूमिका, समाज में उनकी जरूरत को लेकर चर्चा की और बताया कि सोशल वर्कर किसे कहा जाता है, उसमें क्या-क्या स्किल होने चाहिए, कैसे कार्य करना चाहिये, समाज की समस्या को कैसे चिन्हांकित कर उस पर कार्य योजना बता कर कार्य किया जाये, यह सोशल वर्क से जुड़े सभी छात्राओं को सीखना एवं पढऩा, समझना होगा।
सरगुजा साइंस ग्रुप के अंचल ओझा ने शौच के बाद एवं खाने से पहले साबुन, हैंड वाश अथवा राख से हाथ धोने के फायदे बताये तथा ऐसा नहीं करने से कैसे हम बीमारी को अपने घर ले आते हैं तथा कई बार गंभीर संक्रमण से ग्रसित हो जाते हैं, उस पर विस्तार से चर्चा की।
स्टेट प्रभारी, मनीष कश्यप ने कहा कि समाज में व्यवहार परिवर्तन पर काफी कार्य किये जाने की जरूरत है। अभी छत्तीसगढ़ में संस्थागत प्रसव का आंकड़ा 85 प्रतिशत है जबकि प्रसव पश्चात माता द्वारा पहले एक घण्टे में स्तनपान का आंकड़ा केवल 35 प्रतिशत ही है। अब समझना यह है कि इसमें सरकार क्या कर सकती है। सरकार तो अपने स्तर पर विज्ञापन, प्रचार-प्रसार एवं कई माध्यमों से जागरूकता कर रही है, लेकिन इसके बावजूद काफी कुछ हो नहीं रहा, ऐसे में समाज में पहले माता को फिर उसके परिवार, उसके रिश्तेदार सहित समाज एवं गाँव को हमें बैठ कर समझाना होगा, इस प्रक्रिया को लगातार जारी रखना होगा, तभी बदलाव लाया जा सकता है। एक समाजसेवी के लिए, एक स्वयंसेवक के लिए यह बेहद जरूरी है कि हम लक्ष्य बना कर पूरे पेसेन्स के साथ कार्य को करें। केवल प्रसव नहीं बल्कि समाज में ऐसे कई पहलू, कई समस्याएं हैं जिनके लिए सरकार लगातार कार्य कर रही है, लेकिन फिर बदलाव का स्तर काफी कम है, ऐसे में व्यवहार परिवर्तन के लिए हम सब को स्वयं जागरूक होकर, दूसरों को न सिर्फ जागरूक करना है, बल्कि इसके लिए लगातार कार्य करते रहना है, व्यवहार परिवर्तन की प्रक्रिया को निरंतर जारी रखने से ही परिवर्तन आ सकता है।

स्टेट नोडल प्रभारी मनीष कश्यप ने इस दौरान महाविद्यालय के शैक्षणिक स्टॉफ सहित छात्राओं को बिहेवियर क्लब के गठन सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में अतिथि की भूमिका में उपस्थित युवा पत्रकार प्रणय सिंह राणा ने भी समाज में व्यवहार परिवर्तन को लेकर बात करते हुए कहा कि माहवारी स्वच्छता प्रबन्धन के प्रति मेरी समझ अपने छात्र जीवन से ही खुली हुई है, मैं इसे लेकर लगातार अपने महिला साथियों से करता रहा हूँ, यह भी एक व्यवहार परिवर्तन का विषय है। आप सब को इसके प्रति भी पहले स्वयं में, फिर परिवार में और समाज में जागरूकता बढ़ानी है ताकि इस पर खुल कर चर्चा हो। कोरोना ने हमें व्यवहार परिवर्तन को लेकर काफी कुछ सिखाया है, हम सीख भी गये हैं, किन्तु इसे लगातार व्यवहार में रखना बढ़ी चुनौती है, ऐसे में आप लोगों की यह पहल कारगर होगी यह मेरी शुभकामनाएं हैं।
इस दौरान प्राचार्य ज्योति सिन्हा, प्राध्यापक ई. टोप्पो, समाजसेवी वंदना दत्ता, स्नेहालय फाउंडेशन से ममोल कोचेटा, एमएसएसवीपी से मनोज भारती, सेवा भास्कर से उमाशंकर पांडेय, छत्तीसगढ़ प्रचार एवं विकास संस्थान से अनिल मिश्रा, मुस्लिम लोक सेवा समिति से सुल्ताना सिद्दीकी सहित काफी संख्या में एनएसएस, रेडक्रॉस एवं समाज सेवा के पढ़ाई से जुड़े छात्राओं की उपस्थिति रही।
ज्ञात हो कि यूनिसेफ छत्तीसगढ़ की गैर पंजीकृत संस्था एलायंस फ़ॉर बिहेवियर चेंज छत्तीसगढ़ द्वारा सामाजिक व्यवहार परिवर्तन को लेकर प्रदेश भर में कार्य किया जा रहा है, इसके तहत बस्तर विश्वविद्यालय, केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर, रविशंकर विश्वविद्यालय सहित कई विश्वविद्यालयों में बिहेवियर क्लब के गठन कर समाज कार्य सहित एनएसएस, एनसीसी, रेडक्रॉस सहित अन्य छात्र-छात्राओं को समाज में व्यवहार परिवर्तन को लेकर प्रशिक्षित कर उनके माध्यम से समाज मे विभिन्न स्तरों पर कार्य किया जा रहा है।


