सरगुजा
कहा- सर्वे में पता चला यहां न स्वास्थ्य, न पानी, न ही सडक़ का मिल रहा लाभ
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर,29 दिसंबर। नंगे पांव सत्याग्रह ने कहा कि कोल ब्लॉक क्षेत्र के आसपास के ग्रामीणों को न स्वास्थ्य, न पानी , न ही सडक़ का लाभ मिल रहा है। कुछ जगहों पर सीएसआर का कार्य है किया जाता रहा है वह भी सिर्फ दिखावे का रह गया है। अक्सर सीएसआर मद से किए गए कार्य को वहां के कर्मचारी बाहरी लोगों को दिखाने लाते हैं, परंतु बाद में वही ढाक के तीन पात की स्थिति वहां हमेशा रहती है।
दिखाने के लिए तो सीएसआर मद से हसदेव क्षेत्र में करोड़ों का कार्य किया जा रहा है, फिर भी स्थानीय ग्रामीण इन कार्यों से वंचित हंै, सीएसआर के माध्यम से स्वास्थ्य एजुकेशन आदि चीजों के लिए लोकल ग्रामीणों को लाभ मिलना चाहिए , लेकिन परसा ,घाटबर्रा इन जगहों पर न तो ग्रामीणों को उनका काम मिल रहा है न ही आदिवासियों को उनका मूलभूत सुविधा मिल रही है।
नंगे पांव सत्याग्रह के राजेश सिंह सिसोदिया ने कहा कि कई महिला समूह के जरिए क्षेत्र में कुछ लघु उद्योग जरूर शुरू कराए गए हैं, जिसे समय-समय पर बाहरी लोगों को बुलाकर दिखाया भी जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत तो कुछ और ही बयां कर रही है। यहां लोगों को कुछ ख़ास दिनों में बाहर से बुलाकर लाया जा रहा है और फोटो खींच कर खाना खिलाकर उस दिन चलता कर दिया जाता है। इसका जिम्मा भी कुछ लोगों को दिया गया है। सीएसआर मद से जितने भी कार्य और जिस तरीके के कार्य क्षेत्र में कराए जाने थे वह नाकाफी है।
नंगे पांव सत्याग्रह ने कहा कि हमारे द्वारा क्षेत्र का सर्वे किया गया। हसदेव क्षेत्र के गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति बेहद चिंताजनक है। घाट बर्रा में स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र चिकित्सक वहीं है। नर्सों व स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा संचालित इस केंद्र में चिकित्सा सुविधाओं की स्थिति नगण्य है। अदानी स्कूल कक्षा दसवीं तक संचालित है। जिसे 12वीं कक्षा तक संचालित किए जाने की मांग की जा रही है। दूसरी तरफ आवागमन को लेकर भी क्षेत्र में काफी समस्या बनी हुई है। क्षेत्र की सडक़ों की तरफ उदासीन रवैए के कारण एक गांव से दूसरे गांव में आवागमन बाधित होता है।
साल्ही, हरिहरपुर, घाट बर्रा, परसा इत्यादि मार्गो में सडक़ सुविधाएं बेहद निराशाजनक है। एक गांव से दूसरे गांव को जोडऩे सडक़ों का जाल वहां बेहद जरूरी है, परंतु सीएसआर मद का सिर्फ क्षेत्र में दिखावा किए जाने से इन सारी मूलभूत सुविधाओं से ग्रामीण दूर है।
सारे दावे खोखले-
यह दावा किया जाता है कि परसा ईस्ट और केते बासेन कोयला खदान परियोजना के आने से सरगुजा जिले में चहुँ ओर विकास दिखने लगा। जिला मुख्यालय सहित आसपास के ग्रामों के व्यापारियों को उनके व्यापार में वृद्धि तो दिखी ही साथ में अधोसंरचना विकास में भी त्वरित बदलाव आया। नंगे पांव सत्याग्रह ने कहा कि यह दावा भी खोखला है। उक्त क्षेत्र में बाहरी जनसंख्या का दबाव बढ़ा है। क्षेत्र में मुआवजा प्राप्त सैकड़ों ग्रामीणों को ठगने का काम दलालों के द्वारा किया गया है। जिस क्षेत्र में सडक़ चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं है वहां चहुमुखी विकास कैसे होगा। व्यापार तो दूर वहां लोगों के पास काम ही नहीं है।


