सरगुजा

महामंडलेश्वर शारदानंद सरस्वती को दी श्रद्धांजलि
16-Nov-2022 7:13 PM
महामंडलेश्वर शारदानंद सरस्वती को दी श्रद्धांजलि

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

अंबिकापुर, 16 नवंबर। ब्रह्मलीन परमपूज्य सदगुरुदेव परमहंस स्वामी शारदानंद जी के श्री चरणों में दैवी सम्पद मंडल इकाई अंबिकापुर ने श्रीनारायण अग्रवाल के निवास स्थान पर स्थित गुरु आवास पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित कर भावपूर्ण श्रद्धा सुमन अर्पित किया। 

स्वामी जी ने रविवार 6 नवम्बरको दिल्ली के मेदांता हॉस्पिटल अंतिम साँस ली, उनके ब्रम्हलीन होने की खबर सुनकर उनके शिष्य परिवारों में शोक की लहर दौड़ गई । सोमवार को उनका पार्थिव शरीर उत्तरप्रदेश के मैनपुरी लाया गया। यहां अंतिम यात्रा निकाली गई। इसके बाद एकरसानंद आश्रम में उन्हें समाधिस्थ किया गया है। 

आज अंबिकापुर में भी उनके शिष्यों द्वारा श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया था। जिसमें दैवी संपद मंडल इकाई अंबिकापुर सूरजपुर बतौली के बहुत से शिष्यों ने सपरिवार उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी व उनके द्वारा बताए गए मार्ग पर चलने की प्रतिज्ञा ली।

ज्ञात हो कि ब्रह्मलीन परमश्रद्धेय परमहंस स्वामी श्री शारदानंद सरस्वती जी ने 27 वर्ष पहले बिलासपुर में प्रथम यज्ञ की शुरुवात की थी, उसके उपरांत प्रत्येक वर्ष उन्हें देश के कई जगहों में यज्ञ पूर्ण किया। हाल ही में अंबिकापुर में सहस्त्र चंडी यज्ञ का अनुष्ठान उन्होंने किया था। जिससे इस क्षेत्र में शिष्यों के अतिरिक्त यदि अन्य लोगों का बहुत ज्यादा महाराज जी से लगाव हो गया था। उन्होंने शुरू से ही सेवा, परोपकार, अध्यात्म एवं शिक्षा पर जोर दिया। उनके इन्हीं सेवा प्रकल्पों से प्रभावित होकर हजारों लोगों ने उनसे गुरु दीक्षा ली और उन्हें अपना गुरु बनाया। अपने ओजस्वी प्रवचन व सेवा की निष्काम पूजा से स्वामी जी ने अपने शिष्यों के हृदय में एक ऐसा स्थान बनाया ज़ो कभी ख़त्म नहीं हो पायेगा। 

उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण कार्य वनवासियों का सामूहिक विवाह रहा, जिससे प्रेरणा लेकर कई राज्यों की सरकार ने भी सामूहिक विवाह करवाया। अमरकंटक में हुए अतिरुद्र महायज्ञ पूरे नर्मदा क्षेत्र का सबसे बड़ा यज्ञ माना जाता है। महाराज जी साक्षात शिव थे वे बड़े त्यागी ज्ञानी महापुरुष थे विगत 50 वर्षों से अनवरत दैनिक रुद्राभिषेक किया करते थे उनकी करुणा उनकी उदारता का कोई जवाब नहीं थे वे ऐसे ब्रह्मनिष्ठ वितरागी महापुरुष थे। बाहर से कठोर और भीतर से कोमल स्वभाव के थे अमीर गरीब सबके साथ एक समान व्यवहार किया करते थे पूरे भारतवर्ष में ऐसे महापुरुष थे जो ब्राह्मणों का बहुत सम्मान किया करते थे।


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