सरगुजा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर, 9 सितंबर। ‘आत्महत्या’.. इस शब्द को सुनना किसी को पसंद नहीं है। जब कोई व्यक्ति अपने जीवन को खत्म करने यानी आत्महत्या का निर्णय लेता है, तो इसके पीछे कई कारण होते हैं। सरगुजा संभाग की बात करें तो मेडिकल कॉलेज अस्पताल व शहर के नवापारा स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ मनोचिकित्सक के पास हर रोज 30 से ज्यादा डिप्रेशन के मरीज पहुंचते हैं, जिनमें ज्यादातर लोग ऐसे होते हैं जो अपने जीवन से तंग आकर या तो पहले आत्महत्या का प्रयास कर चुके रहते हैं या फिर उनके दिमाग में वह बात रहती है। यह खुलासा नवापारा शहरी स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ मनोचिकित्सक डॉ. रितेश सिंह ने किया।
उन्होंने यह भी खुलासा किया कि पूरे देश ही नहीं छत्तीसगढ़ व सरगुजा में आत्महत्या का आंकड़ा बढ़ा है। डॉक्टर सिंह के साथ-साथ चिकित्सा मनोवैज्ञानिक डॉ. सुमन कुमार ने कहा कि आत्महत्या के कारण होने वाली हर एक मौत हमारे लिए सार्वजनित स्वास्थ्य चिंता का विषय है। इसका हमारे समाज और खासतौर पर आसपास रहने वाले लोगों और बच्चों पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है।
जागरूकता बढ़ाकर आत्महत्या से जुड़े कलंक को कम करके और बेहतर तरीके से सूचनाओं के आदान-प्रदान और लोगों को सपोर्ट देकर हम आत्महत्या की घटनाओं में कमी ला सकते हैं। हमें ऐसे लोगों से बात करनी चाहिए, जिनके मन में आत्महत्या के विचार आते हैं। कहा भी जाता है जब हम बात करते हैं तो अच्छी चीजें होती है।
90 फीसदी आत्महत्या डिप्रेशन की वजह से
किसी भी व्यक्ति में डिप्रेशन की कई वजह हो सकती है। यह एक मनोरोग है। डॉ. रितेश सिंह का कहना है कि 90 प्रतिशत आत्महत्या डिप्रेशन की वजह से होती है। किसी व्यक्ति की एक्टिविटी अलग हो जाए तो घर के अन्य लोगों को अलर्ट हो जाना चाहिए। पहचान हो जाने पर सही समय पर चिकित्सकीय सेवा दी जा सकती है।


