सरगुजा

किसी भी कार्य को अथक मेहनत और लगन से करें तो मंजिल तक अवश्य पहुँच जाएंगे-कुलपति
05-Sep-2022 8:04 PM
किसी भी कार्य को अथक मेहनत और लगन से करें तो मंजिल तक अवश्य पहुँच जाएंगे-कुलपति

   बच्चों और सम्पूर्ण राष्ट्र के भविष्य का निर्माता शिक्षक-ब्रह्माकुमारी विद्या दीदी  
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अम्बिकापुर,5 सितम्बर।
जीवन में सफल होना चाहते है तो दृढ़ निश्चय, अनुशासन, निर्धारित समय एवं समर्पण भाव बहुत जरूरी है, और जिस कार्य को करने के लिए तय कर लिया, उसे अथक मेहनत और लगन से करें तो मंजिल तक अवश्य पहुँच जाएंगे। उक्त विचार मुख्य अतिथि कुलपति संत गहिरा गुरू विश्वविद्यालय सरगुजा अशोक सिंह ने ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में की।

उन्होंने शिक्षकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि टीचिंग एक ऐसा प्रोसेसर है, आप जो पढ़ाते है उसका प्रभाव जीवन में लाइफलांग के लिये पड़ता है। इसलिये जो बाते सही ढंग से नहीं आता है उसे कभी मत बोलो। जो पूरी तरह आता है उसे ही क्लास में बोलो।

सरगुजा संभाग की सेवाकेन्द्र संचालिका ब्रह्माकुमारी विद्या दीदी ने कहा कि बच्चों और सम्पूर्ण राष्ट्र के भविष्य का निर्माता शिक्षक ही है और जिस राष्ट्र के शिक्षक आदर्श होंगे वो राष्ट्र जरूर एक आदर्श बनेगा। यदि हम श्रेष्ठ समाज की स्थापना करना चाहते है तो हमारे शिक्षकों का जीवन मूल्यनिष्ठ होना चाहिये क्योंकि ये मानवीय प्रवृत्ति हैं, जैसा हम करते करते हैं, वैसा ही दूसरे हमसे सीखते हंै। यदि हम बोलने के बजाये बच्चों को अपने आचरण एवं कर्मों द्वारा शिक्षा दें तो वे ज्यादा ग्रहण करते हैं। हमारे इतिहास के महान व्यक्तित्व चाहे वो महात्मा गाँधी जी हो या सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन सबने अपने जीवन की महान धारणाओं से समाज का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता के बिना जीवन को मूल्यनिष्ठ नहीं बनाया जा सकता है और बिना मूल्यों के शिक्षा के हम कितनी भी डीग्री हासिल कर ले या दूसरों को दिला दे लेकिन उस स्वर्णिम और श्रेष्ठ समाज का निर्माण नहीं कर सकते, जिसका स्वप्न हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने देखा था और जिस सभ्य समाज की कल्पना हम करते है।

उन्होंने आध्यात्मिकता का रहस्य स्पष्ट करते हुए कहा कि आध्यात्मिकता अर्थात् स्वयं का ज्ञान, परमात्मा का ज्ञान और सृष्टि चक्र का सम्पूर्ण ज्ञान है जो परमपिता परमात्मा वर्तमान समय हम मनुष्य आत्माओं को दे रहे है। जब हम स्वयं को आत्मा समझ इसमें निहित शक्तियों का चिंतन करते है और गुणों के स्त्रोत परमात्मा से सम्बन्ध जोड़ते है तो हमारा जीवन दिव्य गुणों से सुसज्जित होने लगता हैं इसे राजयोग मेडिटेशन भी कहते हैं।
 उन्होंने उपस्थित समस्त शिक्षकों को राजयोग की गहन अनुभूति भी कराई।

राजमोहिनी देवी कृषि महाविद्यालय अम्बिकापुर पूर्व अधिष्ठाता भ्राता वी.के. सिंह ने कहा कि शिक्षा का सम्बन्ध वैदिक काल से जुड़ा है। इसलिए एक शिक्षक को बहुत गुणवान बनना चाहिये। शिक्षक को समय के पाबन्द को समझकर कर्म करना चाहिये, जिसका प्रभाव बच्चों पर पड़ता है। फेक न्यूज पर ध्यान न देकर अपने कर्त्तव्य पर ध्यान दे तो निश्चित रूप से एक श्रेष्ठ समाज की स्थापना हो जाएगी।

अतिथियों को ब्रम्हाकुमारी विद्या दीदी ने निराकार शिव स्मृति चिन्ह देकर ईश्वरी साहित्य तथा सम्मान पत्र भेंट कर सम्मानित किया। शिक्षकों के अन्दर निहित ज्ञान, गुण और समर्पण इन विशेषताओं को प्रदर्शित करती तीन रंगों की सम्मान पट्टिका पहनाकर एवं श्रीफल, दिव्यगुण लिखित पौधा, ईश्वरीय साहित्य, ईश्वरीय वरदान तथा सम्मान पत्र भेंट कर अम्बिकापुर के महाविद्यालयों एवं विद्यालयों से उपस्थित 200 शिक्षाविदों का सम्मान किया गया।

कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमारी प्रतिमा बहन ने किया। ब्रह्माकुमारी विद्या दीदी ने बताया कि शिक्षकों के लिये 7 दिवसीय तनाव मुक्ति राजयोग शिविर का आयोजन किया गया है। जिसका समय प्रात: 8 से 9 बजे तथा संध्या 6.30 से 7.30 बजे एवं किसी भी समय आकर इस शिविर में भाग ले सकते हंै।


अन्य पोस्ट