सरगुजा

भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह के वर्णन से हजारों श्रद्धालु को भाव विभोर कर दिया
01-Sep-2022 8:58 PM
भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह के वर्णन से हजारों श्रद्धालु को भाव विभोर कर दिया

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर,1 सितंबर।
नारायणी परिसर श्री धाम वृंदावन से पधारे श्रीमद्भागवत कथा के विश्व विख्यात प्रवक्ता श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराज की अमृतमय वाणी से सम्पूर्ण अंबिकापुर जैसे वृंदावन बन चुका है जहाँ देखो वहीं पावन कथा की चर्चा है।

आज ठाकुर जी की दिव्य लीलाओं का वर्णन किया गया साथ ही भगवान श्रीकृष्ण- रुक्मिणी विवाह का आयोजन हुआ,जिसे धूमधाम से मनाया गया। भागवत कथा के आज छठे दिन महाराज जी ने रास पंचाध्याय का वर्णन किया।

उन्होंने कहा कि महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाये जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण हैं जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है वह भव पार हो जाता है. उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती है।

कथा में भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस का वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, कालियावन का वध, उद्धव गोपी संवाद, उद्धव द्वारा गोपियों को अपना गुरु बनाना, द्वारका की स्थापना एवं रुक्मणी विवाह के अलौकिक दिव्य प्रसंग का संगीतमय भावपूर्ण श्रवणपान कराया साथ ही कथा के दौरान महाराज जी ने कहा कि महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया और महारास लीला के द्वारा ही जीवात्मा परमात्मा का ही मिलन हुआ।अर्थात जीव और ब्रह्म के मिलने को ही महारास कहते है।

महारास का तात्पर्य परमानंद की प्राप्ति है जिसमें दु:ख, शोक आदि से सदैव के लिए निवृत्ति मिलती है. भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों को रास के माध्यम से सदैव के लिए परमानंद की अनुभूति करवायी।

महाराज श्री ने कृष्ण-रुक्मणि विवाह प्रसंग सुनाते हुए महाराज जी ने भगवान श्री कृष्ण के सभी विवाहों की अद्भुत चर्चा की साथ ही मधुर भजनों के साथ पंडाल में उपस्थित हजारों श्रद्धालु भक्तों को भाव विभोर कर दिया।भगवान श्रीकृष्ण रूक्मणी के विवाह की झांकी ने भी सभी को खूब आनंदित किया।श्रीकृष्ण-रूक्मिणी की वरमाला पर जमकर फूलों की बरसात हुई।

संस्कार युक्त जीवन जीने से मिलती है मुक्ति
पूज्य महाराज जी ने कहा कि जो व्यक्ति संस्कार युक्त जीवन जीता है वह जीवन में कभी कष्ट नहीं पा सकता। व्यक्ति के दैनिक दिनचर्या के संबंध में उन्होंने कहा कि ब्रह्म मुहूर्त में उठना, दैनिक कार्यों से निर्वत होकर यज्ञ करना, तर्पण करना, प्रतिदिन गाय को रोटी देने के बाद स्वयं भोजन करने वाले व्यक्ति पर ईश्वर सदैव प्रसन्न रहते हैं। साथ दिव्य आरती के साथ आज की कथा का विश्राम हुआ।कल विशेष: भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के दिव्य मिलन और व्यास पूजन के साथ कथा का कल विश्राम होगा।


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