सरगुजा
अम्बिकापुर, 28 अगस्त। नारायणी परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन वृंदावन से पधारे अनिरुद्धाचार्य जी महाराज से कथा सुनने सैकड़ों भक्त पहुंचे।
उन्होंने बताया-कैसे हम अपने कर्मों से महान बनते हैं, कैसे हमारे कर्म ही हमें पूजनीय वंदनीय बनाते हैं, और कैसे हमारे कर्मों के बिगड़ जाने पर हम इस समाज से तिरस्कृत किये जाते हैं। वह कर्म ही है जो हमें महान बनाते हैं, कर्म ही हमें योग्य बनाते हैं। इस कारण आप यह देखें कि आप जो भी कर्म कर रहे हैं, क्या वह आपकी और भगवान की दृष्टि में सही हो सकते हैं। महाराज जी ने बताया कि तुलसीदास जी कहते हैं कि यह विश्व, यह जगत कर्म प्रधान है। जो जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल प्राप्त होता है। भक्तों ने संगीत के साथ मधुर भजनों का आनंद लिया। जिससे वहां बैठे लोग मस्ती और आनंद में होकर झूमने लगे। दिव्य आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ में कथा का विश्राम हुआ। बंसल परिवार पावड़ा साहू वाले समस्त भक्त जनों के साथ उपस्थित रहे ।


