सरगुजा
8 को शहर में निकलेगी विशाल रैली
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अम्बिकापुर, 6 जून। राष्ट्रीय अनूसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष व पूर्व सरगुजा सांसद नंदकुमार साय ने कहा कि जो लोग अपनी संस्कृति, परम्परा से दूर हो गए हैं, वे जनजाति समाज का हिस्सा नहीं रह गए हैं। ऐसे लोग एक तरफ तो आदिवासी बनकर जनजातियों के लिए दी गई सुविधाओं का लाभ लेते हैं, वहीं दूसरी ओर अल्पसंख्यक बनकर अल्पसंख्यकों को मिलने वाली सुविधाओं का भी लाभ ग्रहण करते हैं, इसलिए धर्मान्तरित हो चुके लोगों को जनजाति समाज से बाहर करने की मांग शुरू की गई है जो कि समाज की नहीं वरन समय की मांग है।
नंदकुमार साय ने आज सर्किट हाउस में पत्रकारों से चर्चा के दौरान बताया कि मतान्तरित हो चुके लोगों को जनजाति समाज से बाहर करने के लिए उनकी डिलिस्टिंग की मांग को लेकर 8 जून को संभाग मुख्यालय अम्बिकापुर में जनजाति सुरक्षा मंच के द्वारा विशाल रैली निकाली जाएगी।
श्री साय ने कहा कि जनजाति समाज को जो सुविधाएं उपलब्ध हैं, उसका सबसे ज्यादा उपभोग यही लोग कर रहे हैं। इन लोगों ने जनजातियों की रूढिय़ों, प्रथाओं को छोड़ दिया है, ऐेसे में इन लोगों को जनजाति समाज से बाहर किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी जनजाति वर्ग तभी तक जनजाति का हिस्सा होगा, जब तक कि वह जनजातियों की रूढिय़ों को माने। आज वर्तमान में कोरवा, पंडो, कमार, बिहोर जैसे आदिवासी समुदाय वहीं के वहीं हैं और मतान्तरित लोग जनजाति समाज के लाभ को उठा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि धमतरी में 58 गांव के साहू समाज के लोगों ने ईसाई धर्म अपना लिया है, पंजाब में भी यही चल रहा है। कुछ स्थानों पर तो पंडितों ने भी इसाई धर्म को अपना लिया है। इन सब चीजों को देखकर यह समझ नहीं आ रहा है कि देश के लोगों को क्या हो गया है, देश आज किस ओर जा रहा है जिस देश की पहचान ही गाय, गंगा व गीता है उस देश में धर्मान्तरण का यह कैसा खेल चल रहा है।
ऐसे में धर्मान्तरित हो रहे लोगों की डिलिस्टिंग केवल जनजाति सुरक्षा मंच की नहीं बल्कि देश व समय की मांग है ताकि देश की संस्कृति व जनजाति समाज सुरक्षित रहे। उन्होंने यह भी कहा कि लोभ व लालच में आकर धर्मान्तरित हो रहे लोगों की नागरिकता पर भी विचार किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर राज्यसभा सांसद रामविचार नेताम ने कहा कि जनजातियों की सुरक्षा के लिए वर्तमान में देश के सभी हिस्सों में काम चल रहा है जनजाति वर्ग को अपने लिए ही बनाए गए कानूनों का लाभ नहीं मिल रहा है। लोभ-लालच देकर लोगों को अपनी ओर खींचा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि हमारा देश पितृप्रधान देश है यहां बच्चों को पिता का नाम दिया जाता है, परन्तु वर्तमान में आदिवासी समाज की किसी लडक़ी का विवाह दूसरे समाज में होने के बाद भी उसकी संतान को आदिवासी ही बताया जा रहा है, यह कौन सा नया विधान आ गया है। उन्होंने भी डिलिस्टिंग प्रक्रिया के लिए आवाज उठाने को आवश्यक बताया है।
इस अवसर पर जनजाति सुरक्षा मंच के जशपुर जिले के संरक्षक बंशीधर उरांव, अरूणा सिंह, बिहारी लाल तिर्की, मंजुषा भगत, इंदर भगत सहित सुरक्षा मंत्र के अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित थे।


