सरगुजा

वर्षों पुराने घने जंगल को काटने का निर्णय लेना पर्यावरण को नष्ट करने का निर्णय-त्रिभुवन सिंह
02-Jun-2022 8:27 PM
वर्षों पुराने घने जंगल को काटने का निर्णय लेना पर्यावरण को नष्ट करने का निर्णय-त्रिभुवन सिंह

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अम्बिकापुर,2 जून।
जन अधिकार परिषद के संरक्षक व अध्यक्ष त्रिभुवन सिंह ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि छत्तीसगढ़ में राम वन गमन पथ पर वृक्षारोपण किया जाना, दूसरी तरफ कृष्ण कुंज नगरीय क्षेत्रों में विशुद्ध वातावरण के निर्माण की परिकल्पना कर वृक्ष लगाना स्वागत योग्य एवं प्रशंशनीय है ,लेकिन ठीक इसके विपरीत राम के ही रामगढ़ क्षेत्र जो हसदो अरण्य क्षेत्र का घनघोर जंगल है जहाँ 70 प्रतिशत विशेष पिछड़ी जनजातीय निवास करते हैं,80 प्रतिशत घना जंगल है,मध्य भारत का महत्वपूर्ण जैव विविधता का सघन क्षेत्र है।

लगता है कि अब वर्दी धारियों के संरक्षण में मूल आदिवासियों की संस्कृति ,परंपरा और आजीविका को दरकिनार करते हुए वन्यजीवों और जनजातियों के रहवासी अनुसूचित क्षेत्र को बर्बाद करने का संकल्प जनप्रतिनिधियों ने लेकर अब कोयला उत्खनन का बीड़ा उठा लिया है जिसका लाभ राजस्थान थर्मल पावर लिमिटेड के नाम पर अदानी को दिया जा रहा है।

विकास के नाम पर विनाश के लिए साल वृक्ष के अतिरिक्त वर्षों पुराने घने जंगल को काटने का निर्णय लेना पर्यावरण को नष्ट करने का निर्णय है जहां लगभग 450000 वृक्षों को और उसके साथ कई प्रकार के औषधीय इमारती तथा जैव विविधता संबंधी 16000 वनस्पतियों के प्रजातियों और 22500 जीव जन्तुओं को साथ ही 500 से अधिक जलीय प्राणियो को कालान्तर में नष्ट और विलुप्त होना पड़ेगा।

भारत के पूरे गोंडवाना लैंड में कोयले का भंडार है भारत में ऐसे बहुत से कोल ब्लॉक हैं जहां जंगल नहीं है यदि आवश्यकता है तो वहां से कोयले का उत्पादन लिया जा सकता है तो फिर अनुसूचित क्षेत्र के आदिवासी बाहुल्य घने जंगलों एवं जैव विविधता से संपन्न हसदो अरण्य का ही क्षेत्र क्यों लिया गया।

आईसी एफआरई की ही रिपोर्ट के मुताबिक तारा कोल ब्लॉक का दो तिहाई हिस्सा अत्यंत घना जंगल है यह नो-गो स्टडी में दूसरा सबसे अधिक घने जंगलों वाला कोल ब्लॉक है ,केते एक्सटेंशन ब्लॉक में 98 प्रतिशत घना जंगल है ,यह चरनोई नदी का जलग्रहण क्षेत्र है जिसे संरक्षित करने की सिफारिश भी की गई है। उसके बाद भी केते एक्सटेंशन को खनन योग्य कैसे माना गया है, इसका कोई कारण नहीं बताया गया। गेज और झिंक नदी का जलग्रहण क्षेत्र सम्मिलित रूप से हसदेव नदी का जलग्रहण क्षेत्र है। गेज, झिंक और अटेम नदियां हसदेव से मिलती हैं। ऐसे में इनको अलग वॉटरशेड मानकर अनुमति देने का सवाल ही पैदा नहीं होता।

हसदेव नदी का कैचमेंट प्रभावित होने से जलस्रोतों और बाँगो डैम का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा जिस कारण लगभग चार लाख हेक्टेयर भूमि प्रभावित होगी जिससे कृषि एवं कृषि से संबंधित गतिविधियों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा,कृषि उत्पादन कम होने से भुखमरी बेरोजगारी बढ़ेगी साथ ही कृषि और वन उत्पादों पर आधारित जनजातीय लोक जन जीवन संकटग्रस्त होगा।

प्रभावित हसदो अरण्य क्षेत्र के सांसद सरगुजा  रेणुका सिंह,सांसद कोरबा  ज्योत्सना महंत एवं सांसद रायगढ़ गोमती साय प्रभावित क्षेत्र के निर्वाचित विधायक प्रेम नगर खेल साय सिंह,विधायक अंबिकापुर टी एस सिंह देव,विधायक कोरबा जयसिंह अग्रवाल विधायक कटघोरा पुरषोत्तम कंवर, विधायक पत्थलगांव रामपुकार सिंह, विधायक लेलूंगा चक्रधर सिदार, विधायक धरमजयगढ़ लालजीत राठिया ,विधायक जांजगीर चांपा नारायण चन्देल , द्वारा जल जंगल जमीन और पर्यावरण को बचाने, अनुसूचित क्षेत्रों के जंगलों की अंधाधुंध कटाई रोकने और जनजातीय समुदाय के जीवन की सुरक्षा और बेहतरी के लिए अभी तक किसी भी जन प्रतिनिधियों ने इनके सुरक्षा और संवर्धन के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने अपने कर्तव्य और दायित्व का पालन जनहित में नहीं करते हुए बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने का दृष्टिकोण अपनाया है।

जनप्रतिनिधियों के द्वारा आर्थिक सामाजिक रूप से पिछड़े लोगों और प्राकृतिक संसाधनों की अनदेखी कर,जंगल कटाई को मौन सहमति देकर सहयोग किया जा रहा है, अभी भी समय है प्रभावित क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से अनुरोध है कि खुलकर अनुसूचित क्षेत्रों के संरक्षण की पहल करें छत्तीसगढ़ की आम जनता और पर्यावरण को प्राथमिकता दें या अपने पदों से त्यागपत्र देकर अपने संवैधानिक कर्तव्य और दायित्वों से मुक्त हो जाए।


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