सरगुजा

विधि वह अनुशासन है जो हमारे जीवन को सुखी बनाता है-गौतमचंद
02-May-2022 9:57 PM
विधि वह अनुशासन है जो हमारे जीवन को सुखी बनाता है-गौतमचंद

हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने दिगंबर जैन मंदिर में शांति धारा एवं पूजन किया

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

अम्बिकापुर, 2 मई। अंबिकापुर नगर के एमजी रोड स्थित माखन बिहार होटल में विधिक सेवा प्राधिकरण सरगुजा के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायाधीश गौतम चंद चौरडिय़ा ने विधिक सेवा को लेकर कहा कि विधि वह अनुशासन है जो हमारे जीवन को सुखी बनाता है। जितने भी कानून बनाए जाते हैं आम लोगों के सुख शांति के लिए। सभ्य समाज का इतना ही मतलब है कि ज्यादा जेल व अदालतें न हो, हम स्वयं संयम रखें, यही जीवन का सार है। उन्होंने कहा कि हम लोग अनुशासन का पालन नहीं कर अपना जीवन संकट में डाल देते हैं, अनुशासन ही जीवन है।

श्री चौरडिय़ा ने कहा कि हमारा भारतीय संविधान आध्यात्मिक दस्तावेज है, कभी कानून के मुख्य बिंदु को पढ़ेंगे तो भगवान महावीर, बुध व सनातन धर्म के सिद्धांतों पर आधारित मिलेगा। संविधान की परिकल्पना का पहला शुद्ध स्वरूप समता अर्थात समतावादी समाज बनाने का है। सबको बराबर का हक मिले, सब को सम्मान हक मिले व सबका श्रम मूल्य हो।

न्यायाधीश श्री चौरडिय़ा ने कहा कि सब का डीएनए, ब्लड ग्रुप व रेटीना थ्री अप्रेंट एक नहीं कर सकते लेकिन जीवन में समता ला सकते हैं। अध्यात्मिक व सनातनी पुरुषों ने कहा है कि जीवन में समता लाया जा सकता है। पीछे जाकर देखेंगे तो संप्रदाय बहुत ज्यादा नहीं थे एक विचारधारा थी श्रमण संस्कृति व ब्राह्मण संस्कृति दोनों में बहुत समन्वय था, उनके विद्वान आपस में बैठकर सत्य पर शोध करते थे। संस्कृति के छोटे-छोटे श्लोक में भी इसके विषय मे गंभीर बातें लिखी हैं।

संस्कृत के वाक्यों के अनुसार सभी प्राणियों में क्षमा का गुण हो, जिसके दिल में करुणा होगा वही क्षमा कर पाएगा।

न्यायाधीश गौतम चंद चौरडिय़ा ने कहा कि आज समाज को देख मन चिंतित हो जाता है हमारा समाज हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सबका इज्जत करने वाला है। भारत की संस्कृति सबको साथ लेकर चलने व अच्छा जीवन जीने की प्रेरणा देने वाला है। मैत्री व समता का शुद्ध सूत्र भी इसी से लिया गया है। हमारा मौलिक कर्तव्य है कि हम वृक्ष को ना काटे, एक एक जीव की रक्षा करें, नदियों की रक्षा करें उसमें प्रदूषण न होने दें, सभी धर्मों की रक्षा हो व भारत के गौरवशाली संस्कृति को आगे बढ़ेंगे।

गौरतलब है कि हाईकोर्ट के न्यायाधीश गौतम चंद चौरडिय़ा ने 1 मई को सकल जैन समाज दिगंबर एवं श्वेतांबर समाज के साथ श्री दिगंबर जैन मंदिर में शांति धारा एवं पूजन किया। इसके पश्चात न्यायाधीश ने जैन समाज के अगुवाई में अंबिकापुर नगर के होटल माखन बिहार में विधिक सेवा प्राधिकरण की बैठक में विभिन्न संबंधित विषयों पर चर्चा की।

इस दौरान जिला मजिस्ट्रेट राकेश बिहारी भोरे, एन के ध्रुव अतिरिक्त न्यायाधीश, श्री नेताम, श्री शर्मा, श्री जिंदल सहित अशोक कुमार जैन,अध्यक्ष जैन मैत्री संघ अंबिकापुर, महामंत्री अजीत जैन, सचिव राकेश जैन, मीडिया प्रभारी विक्रांत जैन, डॉ. एमके जैन, डॉ. अभिजीत जैन, श्वेतांबर समाज के अध्यक्ष शुभकरण जैन,पवन जैन, श्रीमती ममोल सहित अन्य उपस्थित थे।


अन्य पोस्ट