सरगुजा

राष्ट्रीय जनजातीय साहित्य महोत्सव में शामिल हुए अजय चतुर्वेदी
22-Apr-2022 6:57 PM
राष्ट्रीय जनजातीय साहित्य महोत्सव में शामिल हुए अजय चतुर्वेदी

सरगुजा अंचल के 3 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर शोध पत्र प्रस्तुत किया

अम्बिकापुर,22 अप्रैल। आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत भारत सरकार जनजातीय कार्य मंत्रालय नई दिल्ली के सहयोग से आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान नवा रायपुर द्वारा 19 से 20 अप्रैल तक आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय जनजातीय साहित्य महोत्सव में जिला पुरातत्व संघ सूरजपुर के सदस्य अजय कुमार चतुर्वेदी, राज्यपाल पुरस्कृत व्याख्याता ने सरगुजा अंचल के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की जीवन गाथा पर आधारित शोध पत्र की प्रस्तुति देकर सरगुजा अंचल को गौरान्वित किया।

सरगुजा अंचल के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर शोध कार्य कर रहे अजय चतुर्वेदी ने बताया कि आजादी की लड़ाई में सरगुजा अंचल का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मैं अभी तक सरगुजा संभाग से 37 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की खोज कर चुका हूं, जिसमें जनजातीय समुदाय के 3 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी है। इनमें कुछ सेनानियों की कर्मभूमि और सेनानियों की जन्मभूमि सरगुजा अवश्य है। मंै सरगुजा अंचल से 37 सेनानियों को ढ़ूढ़ चुका हूं, जिसमें सरगुजा जिले से 12, कोरिया जिले से 11, जशपुर जिले से 8, बलरामपुर जिले से 3 और सूरजपुर जिले से 2 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम शामिल हैं। मैं इनके परिजनों से मिलकर इनकी जीवन गाथा का लेखन कर रहा हूं। जिनकी जीवनी पर आधारित रूपक का प्रसारण आकाशवाणी अंबिकापुर से किया रहा है।

अजय चतुर्वेदी को शोध के दौरान जनजातीय समुदाय के 3 स्वतंत्रता सेनानियों के नाम मिले, जिसमें बलरामपुर जिले से स्वर्गीय महली भगत और स्वर्गीय राजनाथ भगत हैं। सरगुजा जिले से माझी राम गोंड़ हैं। माझी राम गोंड़़ की जन्म भूमि पटेल पारा अंबिकापुर सरगुजा की धरती रही। इन्होंने स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में सक्रिय भागीदारी निभाई और अंबिकापुर जेल में सजा काटी। इनकी सजा अवधि के संबंध में पूर्व विधायक स्वर्गीय रेवती रमण मिश्र ने अपने पत्र में लिखा है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी माझी राम गोंड़ स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के कारण सन 1940 में 3 दिन एवं 1942 में 21 दिन अंबिकापुर जेल में रहे।

जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महली भगत, महात्मा गांधी जी के कार्यों से अत्याधिक प्रभावित थे। उन्होंने 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया और 1 वर्ष का सश्रम सजा पा कर, 25 अक्टूबर 1942 को पटना कैंप जेल स्थानांतरित कर दिए गए।

जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी राजनााथ भगत, महात्मा गांधी जी के कार्यों से अत्यधिक प्रभावित थे। आपने भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई। सरगुजा अंचल से देश के लिए लडऩे वाले स्वतंत्रता 26 संग्राम सेनानियों के नाम 1989 के सरगुजा गजेटियर में स्वर्ण अक्षरों में अंकित हैं। सरगुजा अंचल अनेक स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने देष की खातिर लड़ा किन्तु वे आज भी गुमनाम हैं। ऐसे वीर सपूतों को प्रकाष में लाना ही आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम की सार्थकता है। तीन दिवसीय राष्ट्रीय जनजातीय साहित्य महोत्सव में देश भर के विद्वान, साहित्कारों ने शोध पत्र प्रस्तुत किया।


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