सरगुजा
समर्थन में सडक़ पर उतरे लोग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
उदयपुर,16 अप्रैल। परसा कोयला खनन परियोजना में आगजनी, तोडफ़ोड़ व मारपीट के बाद कोल माइंस में सुरक्षा अधिकारी की रिपोर्ट पर उदयपुर थाना में 10 आदिवासियों के विरुद्ध जो कि कोयला खदान के विरोध में लगातार आंदोलन के नेतृत्वकर्ता रहे हैं, नामजद एफआईआर दर्ज कराई गई है। वहीं शनिवार को सैकड़ों लोग परसा कोल खदान खोलने व रोजगार देने के समर्थन में सडक़ पर उतरे और हाथ में तख्तियां लेकर खदान खोलने का समर्थन किया।
15 अप्रैल को सुरक्षा अधिकारी अनुपम दत्ता द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में लेख किया गया है कि दोपहर 3 बजे करीब 200 से 250 की संख्या में लोग साल्ही परियोजना कार्यस्थल हथियार से लैस होकर आए और जबरन कंपनी परिसर में घुसकर परिसंपत्तियों में तोडफ़ोड़ व आगजनी करने लगे। आवेदन में एक व्यक्ति के साथ गाली गलौज कर मारपीट करने व जान से मारने की धमकी देने की वजह से भगदड़ मचने का उल्लेख किया गया है।
एफआईआर में जिन लोगों को आरोपी बनाया गया है, उनमें रामलाल करियाम, बालसाय कोर्राम, मुनेश्वर पोर्ते, जगरनाथ बड़ा, अंतराम, आनंद कुसरो धरम मरपच्ची, पवन कुसरो नंदा कुसरो कृष्णा कुसरो का नाम शामिल है। इन लोगों के विरुद्ध उदयपुर पुलिस ने बलवा, मारपीट, आगजनी व आम्र्स एक्ट के तहत कार्रवाई की है।
बताया जा रहा है कि कुछ दिन पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा परसा खदान हेतु स्वीकृति प्रदान किये जाने के बाद कोल प्रभावित ग्राम के ग्रामीणों में काफी आक्रोश है, वहीं शनिवार 16 अप्रैल को सैकड़ों लोग परसा कोल खदान खोलने व रोजगार देने के समर्थन में सडक़ पर उतरे और हाथ में तख्तियां लेकर खदान खोलने का समर्थन किया।
ग्रामीण असमंजस व दहशत में
एक तरफ जहां परसा खदान को मंजूरी के बाद आसपास के ग्रामीणों में खुशी की लहर है, तो वहीं एक एनजीओ के द्वारा खदान का काम रोकने की कोशिश व आगजनी की घटना से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीण इस असमंजस में है कि क्या उनकी अधिग्रहित जमीन का मुआवजा व नौकरी सही समय पर मिल पाएगा तो वहीं विरोध करने वाले के तेवर से लोगों में तरह-तरह की चर्चा हो रही है। आगजनी व तोडफ़ोड़ की की घटना से ग्रामीण अब दहशत में नजर आ रहे हैं।
ज्ञातव्य है कि शुक्रवार को योजनाबद्ध तरीके से कुछ लोग हथियारों के साथ परसा खदान क्षेत्र में घुस कर जमकर उत्पात मचाए थे। इस घटना में कंपनी का 10 लाख से अधिक का नुकसान हुआ था। इस आगजनी की घटना के बाद जिले के प्रशासनिक अधिकारीयों द्वारा क्षेत्र का दौरा कर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की गयी। पुलिस प्रशासन घटना की जांच में लगी है, वहीं स्थानीय लोग क्षेत्र में शांति बने रहने की मांग की है। प्रशासन ने तथाकथित एनजीओ के द्वारा फर्जी ग्रामसभा के आरोप को भी सिरे से नकार दिया गया है।
जांच कर रिपोर्ट जमा कर दी गई है-डिप्टी कलेक्टर
इस घटना के बारे में डिप्टी कलेक्टर सरगुजा अनिकेत साहू ने कहा कि आज परसा कोल ब्लॉक के विरोध में हरिहरपुर के ग्रामीणों ने अपना प्रदर्शन किया था। सभी प्रदर्शनकारी हथियारों से लैस थे और ग्राम साल्ही में आगजनी की घटना को अंजाम दिया है। इसके लिए जिम्मेदारों पर एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की गई है। जहां तक फर्जी ग्राम सभा की शिकायत की बात है तो इसकी जांच कर रिपोर्ट जमा कर दिया गया है।
जांच करा उचित कार्रवाई की जाएगी- एएसपी
सरगुजा के एएसपी विवेक शुक्ला ने कहा कि साल्ही में मानिकपुर और बाहर से आये 300 से ज्यादा लोगों ने खदान के लिए बनाये गए शेड और जनरेटर में आग लगा कर कानून व्यवस्था को अपने हाथों में लेने का अपराध किया गया है। इसी ग्राम के 10 लोगों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। इसकी जाँच करा आगे और उचित कार्रवाई की जाएगी।
नौकरी नहीं मिल रही है-ग्रामीण
परसा खदान सलका ग्राम के जीतू दास का कहना है कि 2020 में हम लोगों का जमीन ले लिया गया और उसका मुआवजा भी मिल गया, लेकिन उसके जरिये से हमें नौकरी नहीं मिल रही है, इसमें हमारा पूरा परिवार जुड़ा हुआ है। हम जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री से अनुरोध करते हंै कि परसा खदान का काम जल्द ही शुरू करवाएं।
साल्ही के प्रधान राम ने कहा कि हमने 29 मार्च को खदान खोलने के लिए कलेक्टर को ज्ञापन दिए थे, इसके आधार पर मुख्यमंत्री ने खदान खोलने की अनुमति दी, इसका बहुत-बहुत धन्यवाद है, वहीं इसके विरोध में जो बाहरी एनजीओ आ रहे हैं, उनका हम विरोध करते हैं। हम प्रशासन से अनुरोध करते हैं कि वे उन पर प्रतिबंध लगाए और खदान जल्दी चालू कराये जिससे हमें रोजगार मिल सके।
चर्चा है कि पिछले महीने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मिलकर अपने राज्य में चल रही कोयले और बिजली की किल्लत का हल ढूंढने मुलाकात की थी, और कोयला की मांग की थी। श्री बघेल ने उनको मीडिया के सामने भरोसा दिलाया था कि वह राजस्थान को नियम से होने वाली हर मदद करेंगे। कोल खदान के स्वीकृति के बाद समर्थन व विरोध में राजनीति तेज हो गई है, ग्रामीण विरोध व समर्थन कर रहे हैं, ऐसे में लोगों में काफी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।


