सरगुजा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अम्बिकापुर, 6 जनवरी। तीन जनवरी को सक्रिय हुआ पश्चिमीविक्षोभ इस समय पश्चिमी राजस्थान तथा उसके आसपास के आसमान के निचले क्षोभमंडल पर केंद्रित है। इसके प्रभाव से बनी द्रोणिका की छोर अरब सागर तक पहुंच रही है। यह द्रोणिका अरब सागर से ताजा नमी ग्रहण कर के उसे मध्य भारत में विदर्भ, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की ओर धकेल देगी। आज 6 जनवरी को देर शाम या रात में एक दूसरा ताकतवर पश्चिमी विक्षोभ अफगानिस्तान-पाकिस्तान के मुहाने भारत में प्रवेश कर जाएगा। यह दक्षिण- पश्चिम राजस्थान से प्रवेश करते हुए उत्तर भारत की ओर चक्रवाती परिसंचरण के रूप में आगे बढ़ेगा।
अरब सागर से ताजा नमी के आने से पूर्व में सक्रिय विक्षोभ ताकतवर होगा और उत्तर भारत की ओर बढऩे वाला चक्रवाती घेरा आगे बढक़र मध्य भारत पर व्यापक प्रभाव डालेगा। सम्पूर्ण उत्तर, पश्चिमोत्तर और मध्य भारत के ऊपर पछुआ की हवाएं व्यवधान डालती हुई पूर्व, पूर्वोत्तर की ओर बढ़ जाएंगी।
कल 5 जनवरी से उत्तर छत्तीसगढ़ के आसमानपर बादलों की आवाजाही शुरू हो चुकी है। आगामी एक-दो दिनों में बादलों का घनत्व बढऩे के साथ 8 जनवरी या उसके आगे मेघ गर्जन, वर्षा सहित ओलावृष्टि जैसी मौसमी घटनाओं का अंदेशा रहेगा। हवाओं की दिशा उत्तरी, पश्चिमोत्तरी से बदल कर क्रमश: दक्षिणी, दक्षिण पश्चिमी होती जाएगी।
इस दौरान सरगुजा संभाग में अधिकतम तापमान के स्थिर रहने तथा न्यूनतम में वृध्दि देखी जाएगी जबकि व्यधान के दिनों में अधिकतम में कमी दर्ज की जा सकती है। व्यवधान के गुजर जाने के बाद सम्भवत: 11- 12 जनवरी के दरमियान फिर से हवा अपनी दिशा बदल कर इस सीजन के हवाओं की मूल दिशा उत्तरी हो कर ठंड को बढ़ाएगी और एक बार फिर ठंड का दौर सरगुजा संभाग में देखा जा सकेगा।


