सरगुजा

सतबहिनी पहाड़ पर पत्थरों के ऊपर बनी कलाकृति अधूरे निर्माण को प्रदर्शित करती है
29-Dec-2021 4:37 PM
सतबहिनी पहाड़ पर पत्थरों के ऊपर बनी कलाकृति अधूरे निर्माण को प्रदर्शित करती है

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रामानुजगंज, 29 दिसंबर।
नगर सीमा से 25 किलोमीटर दूरी पर स्थित चुमरा के सतबहिनी पहाड़ पर पत्थरों के ऊपर बनी कलाकृति किसी अधूरे निर्माण को प्रदर्शित करती है, जो विगत कई दशकों से रहस्य बनी हुई है कि इतने घनघोर जंगल में पहाड़ी के ऊपर क्या निर्माण हो रहा था, इसके लिए कई प्रकार की कहानियां भी है।

सतबहिनी पहाड़ के ऊपर जाने के लिए दुर्गम पहाड़ी रास्ते से करीब 500 फीट से ऊपर जाना पड़ता है, जहां पत्थरों की कलाकृति है, जो इस बात को इंगित करती है कि यहां पर कोई निर्माण कार्य शुरू हुआ, लेकिन पूरा नहीं हो सका, पत्थर भी निर्माण के हिसाब से ही लगाए गए हैं। यहां पत्थरों को लेकर कई प्रकार की कहानियां प्रचलित हंै। सिर्फ ऊपर पहाड़ पर ही नहीं नीचे एवं अन्य स्थानों पर भी इसी प्रकार की पत्थरों पर कलाकृति है, जो यहां पर वर्षों पुरानी कहानी को बताती है।

ग्रामवासी बताते हैं कि जहां पर यह कलाकृति है, वहां पहले और भीषण जंगल हुआ करता था, वहां पर जाना बहुत ही कठिन था, उस समय खतरनाक जंगली जानवर भी जंगल में मिलते थे, ऐसे में पहाड़ी के ऊपर पथरों की कलाकृति लोगों को आश्चर्यचकित करती है।

जिस प्रकार से अत्यंत भीषण जंगल में वह भी पहाड़ी के ऊपर पत्थरों की अद्भुत कलाकृति देखने को मिली है, इससे यह भी अनुमान लगाया जाता है कि दशकों पहले यहां मंदिर बनाने के लिए कार्य प्रारंभ हुआ होगा, जो किसी कारण से नहीं बन पाया। ग्रामवासी पहाड़ी के ऊपर आकर पूजा अर्चना करते हैं।

पहाड़ी के नीचे नदी में कभी नहीं सूखता पानी
सतबहिनी पहाड़ के नीचे नदी बहती है जिसका पानी कभी नहीं सूखता एक और जहां भीषण गर्मी में क्षेत्र की सभी प्रमुख नदियां सूख जाती है, परंतु यहां की नदी कभी नहीं सूखती। पहाड़ी के नीचे यहां प्रकृति की अद्भुत सुंदरता नजर आती है। यहां वर्ष भर बहने वाली नदी है, वहीं यहां चट्टानों की एवं हरियाली की नैसर्गिक खूबसूरती देखते बनती है। यहां यदि प्रशासन पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना चाहे तो अपार संभावनाएं हैं। सतबहिनी पहाड़ के नीचे सतबहिनी दह है। ग्रामवासी बताते हैं कि इस दह में इतना पानी रहता था कि 7 खटिया का बाधी इसमें चला जाता था। इसी प्रकार की कई मान्यताएं इस क्षेत्र से जुड़ी है।

27 दिन रूके थे राजा
यहां के बारे में ग्रामवासी अपने पूर्वजों के द्वारा बताए अनुसार कहते हैं कि यहां सालों पहले राजा इस घनघोर जंगल में 27 दिन रूके थे, जिस कारण यहां कई प्रकार की संरचनाएं जो दिखती हैं, उसी कारण है। सतबहिनी पहाड़ के अलावा नीचे एवं अगल-बगल भी पत्थरों पर बनी कलाकृतियां हैं।
 


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