सरगुजा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रामानुजगंज,16 दिसम्बर। रोजगार दिलाने के लालच पर नाबालिग किशोर को बंधुआ मजदूर बनाते हुए एक गिरोह ने कैद कर लिया गया था, जिसे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा आजादी दिलाते हुए उन्हें छुड़ा लिया गया।
जानकारी के मुताबिक ग्राम पंचायत तातापानी के अंतर्गत ग्राम दामोदरपुर के द्वारा आवेदन दिया गया था कि 16 वर्षीय पुत्र जिसे झारखंड के भंडरिया थाना अंतर्गत ग्राम परसवारा का रहने वाला सिकेश किस्पोट्टा के द्वारा बहला-फुसलाकर कार्य दिलाने के बहाने 9 अगस्त 2021 को बेंगलुरु ले गया था। नाबालिग बच्चे को बेंगलुरु में स्थित मछली उद्योग में जबरन कार्य करा रहा था।
नाबालिक ने बताया कि कार्य कराने के बाद न तो उसे पैसा दी जाती थी और न ही भरपेट खाना दी जाती थी। 16 वर्षीय पुत्र जब 11 अक्टूबर 2021 को किसी तरह भागकर दक्षिणी कर्नाटक चला गया तो नाबालिग के द्वारा किसी दूसरे व्यक्ति से फोन लगाकर अपने पिता को इस संबंध में बताया। इसके पश्चात चाइल्ड हेल्प लाइन नंबर में संपर्क कर इसकी जानकारी दी गई, जिसके पश्चात चाइल्ड हेल्पलाइन के माध्यम से आवेदक के पुत्र को बाल कल्याण समिति जिला मंगलुरू के बाल संरक्षण गृह में सुरक्षित रखा गया था।
नाबालिक के पिता ने यह भी बताया था कि उसकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब होने के कारण उसे लेने नहीं जा सकता एवं आवेदक के द्वारा निवेदन किया गया कि आवेदक के पुत्र को उक्त स्थान से आवेदक के गृह निवास में पहुंचाने में उसकी सहायता किया जाए। जिसके तहत प्राप्त पत्र के प्राथमिकता के आधार पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सिराजुद्दीन कुरैशी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बंगलुरु के बाल संरक्षण में संपर्क किया तत्पश्चात प्राधिकरण की सचिव रेशमा बैरागी उक्त बालक को घर वापस लाने की तत्काल कार्रवाई करते हुए कार्यक्रम अधिकारी एवं महिला एवं बाल विकास विभाग से संपर्क में रही और प्रयास करते हुए किसी तरह उस नाबालिग बच्चे को घर वापसी ले आए।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश सिराजुद्दीन कुरैशी सहित न्यायालय के सभी जस्टिस की उपस्थिति में 16 वर्षीय बालक को उसके पिता के समक्ष सौंपा गया एवं पुरस्कार वितरण भी की गई। इस अवसर पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सिराजुद्दीन कुरेश ने कहा कि यदि किसी भी व्यक्ति को किसी भी प्रकार की समस्या हो तो प्राधिकरण के फोन नंबर 0777 9 2003 पर सबर कर सकते हैं एवं नालसा टोल फ्री नंबर 15100 पर भी संपर्क हो सकता है।


