सरगुजा

आजादी का अमृत महोत्सव, राष्ट्रीय आलेख स्पर्धा में अजय प्रथम
16-Nov-2021 8:06 PM
आजादी का अमृत महोत्सव, राष्ट्रीय आलेख स्पर्धा में अजय प्रथम

शोध में 27 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम ढूंढा

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अम्बिकापुर,16 नवम्बर।
दक्षिण कोसल टुडे द्वारा आयोजित आजादी का अमृत महोत्सव व्याख्यानमाला और आलेख प्रतियोगिता के अंतर्गत राष्ट्रीय आलेख प्रतियोगिता में अजय चतुर्वेदी को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।
 
दक्षिण कोसल टुडे द्वारा आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता के विषय स्वतंत्रता संग्राम के भूले बिसरे नायक में शासकीय उत्तर माध्यमिक विद्यालय सरहरी के राज्यपाल पुरस्कृत व्याख्याता अजय कुमार चतुर्वेदी ने प्रथम स्थान प्राप्त कर अंचल को गौरवान्वित किया है।

आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर शोध कार्य कर रहे जिला पुरातत्व संघ सूरजपुर के सदस्य अजय कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि ‘ज्ञात, अल्प ज्ञात तथा अज्ञात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी’ को ढूंढना और उनके परिजनों से मिलकर उनकी संपूर्ण जीवन गाथा लिखकर इतिहास के पन्नों में लाने का प्रयास कर रहा हूं। मुझे आशा है कि इस पुनीत कार्य में सभी वर्ग के लोग सहयोग करेंगे और ऐसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जो देश की खातिर शहीद हुए, उनकी जानकारी साझां करेंगे, ताकि सरगुजा अंचल का इतिहास एक स्वर्णिम इतिहास बन सके।

उन्होंने बताया कि आजादी की लड़ाई में सरगुजा अंचल के वीर सपूतों ने भी अविस्मरणीय योगदान दिया है। सरगुजा अंचल में अनेक वीरों ने देश की खातिर कुर्बानियां दी हैं, परंतु वे आज भी गुमनाम है। सरगुजा की धरती कुछ वीर सपूतों की जन्मभूमि तो कुछ वीर सपूतों की कर्मभूमि रही है। यहां के मूल निवासी अनुसूचित जनजाति समुदाय के वीर सपूतों ने भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रूप में आजादी की लड़ाई में आहुतियां दी हैं।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर शोध कार्य कर रहे अजय चतुर्वेदी ने बताया कि अभी तक मैं सरगुजा अंचल के 27 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम ढूंढ चुका हूँ। जिनमें से कुछ नाम 1989 के सरगुजा गजेटियर में उल्लेखित हैं।

लेकिन कुछ बिल्कुल ही गुमनाम हैं। मेरा प्रयास है कि मैं ऐसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को ढूंढू, जो देश की खातिर अपना अविस्मरणीय योगदान दिए हैं। स्वतंत्रता संग्राम में सहयोग देकर देश को आजाद कराने में सरगुजा अंचल के सूरजपुर जिले के एक ऐसे ही गुमनाम वीर शहीद बाबू परमानंद जी हैं, जिन्होंने 18 वर्ष की आयु में देश की खातिर शहीद होकर छत्तीसगढ़ की धरती को धन्य कर दिया।

राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में अजय चतुर्वेदी ने ज्ञात, अल्प ज्ञात तथा अज्ञात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सरगुजा अंचल के विशेष संदर्भ में शोध पत्र का वाचन कर चुके हैं।


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