सरगुजा

अपने हक को पाने समाज को शिक्षित और जागरूक होना होगा- उइके
16-Nov-2021 3:08 PM
अपने हक को पाने समाज को शिक्षित और जागरूक होना होगा- उइके

   खुम्हरी टोपी और तीर-धनुष देकर राज्यपाल को किया सम्मानित  

राज्यपाल बिरसा मुंडा जयंती कार्यक्रम में हुर्इं शामिल

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अम्बिकापुर, 16 नवंबर।
राज्यपाल अनुसुईया उइके ने कहा कि अपने संवैधानिक अधिकारों को पाने तथा शासन की योजनाओं का लाभ लेने के लिए आदिवासी समाज को शिक्षित और जागरूक होना होगा। युवाओं को आगे आकर अपना भविष्य गढऩा होगा,  ताकि आने वाली पीढ़ी का भी भविष्य उज्ज्वल और सशक्त हो सके।

उन्होंने कहा कि युवा जब भी सामाजिक बैठकों में शामिल हो वे इस बात की विश्लेषण जरुर करें कि शासन की कौन सी योजना में समाज के कितनों को लाभ मिला है। जो लाभ से वंचित हैं, उन्हें कैसे लाभ दिलाया जा सके। राज्यपाल  सुश्री उइके यहां अम्बिकापुर के अजिरमा स्थित गोंड समाज भवन प्रांगण में आयोजित गोंड समाज विकास समिति एवं सर्व आदिवासी समाज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित बिरसा मुंडा जयंती एवं देवउठनी कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं।

राज्यपाल सुश्री उइके का प्रथम अम्बिकपुर आगमन पर कार्यक्रम स्थल पर सामज के लोगों द्वारा करमा नृत्य एवं ढोल- मांदर  के साथ भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद गोंड समाज के सामुदायिक भवन का भूमिपूजन किया गया तथा बिरसा मुंडा एवं अन्य महापुरुषों के छाया चित्र पर माल्यार्पण किया गया। इस अवसर पर आदिवासी समाज के द्वारा राज्यपाल को खुम्हरी  टोपी  पहनाकर तथा तीर -धनुष देकर सम्मानित किया गया।

राज्यपाल ने कहा कि बिरसा मुंडा, शाहिद वीर नारायण सिंह, गेंद सिंह, रानी दुर्गावती जैसे अनेक वीर और वीरांगनाओं ने  स्वतंत्रता आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने  समाज को जागरूक करने का काम किया। स्वतंत्रता के बाद आदिवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए  संविधान में कई संविधानिक प्रावधान किये गए है। इसमें 5 वी अनुसूची, पेशा कानून, पदोन्नति में आरक्षण आदि है।

उन्होंने कहा कि 1996 में पेशा कानून लागू हुआ जो आदिवासी क्षेत्र में विकास संबधी निर्णय लेने की शक्ति देता है। इस कानून के अनुसार ग्राम सभा मे सर्व सम्मति से जो निर्णय लिया जाता है उसे कोई नही बदल सकता। इस कानून से खनिज तथा वन संपदा पर अधिकार होने के साथ ही विकास कार्यों को अपने आवश्यकतानुसार करने की आजादी मिली है ताकि उनकी परम्परा और संस्कृति संरक्षित रहे।

उन्होंने कहा कि सरकार को इस ओर भी ध्यान देने की जरूरत है कि अनुसूचित क्षेत्रों में उद्योग आदि के लिए भूमि अधिग्रण के बाद प्रभावित परिवारों  को  मुआवजा व लाभांश मिलने के साथ ही वे आजीवन शेयर धारक भी हो। उन्होंने कहा कि पेशा कानून की तरह ही नगरीय क्षेत्रों में आदिवासियों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए पेशा कानून शीघ्र पारित कराने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2001 में राज्य सभा में यह कानून लाया  गया था, लेकिन पारित नहीं हो सका। अब इसे पुन: पारित करने के प्रयास हेतु पहल किया जाएगा।

राज्यपाल ने कहा कि आदिवासियों के समस्याओं के निराकरण के लिए  जनजाति आयोग का भी गठन किया गया है जिसके माध्यम से जनजातियों के अधिकारों की सुनवाई होती है। आयोग को एक सुरक्षा कवच की भांति काम करना  चाहिए ताकि जनजातियों के  अधिकार सुरक्षित हो सके।

उन्होंने कहा कि आदिवासी  बहुत ही सरल सहज और स्वाभिमानी होते है। अपने स्वाभिमान की खातिर वे  किसी के आगे झुकना नहीं जानते। अब समय आ गया है कि आदिवासी एक जुट होकर अपने अधिकार के लिए आवाज उठाएं। आदिवासी किसी के बहकावे में न आये। सबसे पहले वे हिंदुस्तानी मूल निवासी हैं, आदिवासी हैं इस बात को गांठ बांध लें।

राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि कोरोना जैसी खतरनाक बीमारी से बचकर रहना होगा। अभी भले ही संक्रमण कम हुआ है लेकिन पूरी तरह समाप्त नही हुआ है। इस बीमारी से बचने के लिए  टीका लगाया जा रहा है। सभी पात्र लोग जरूर टीका, लगवाएं मास्क पहने और बाजार में भीड़ से बचें।

सिविल सर्विस में चयनित हुए सम्मानित
इस अवसर पर संघ लोक सेवा आयोग में आईएएस सेवा हेतु चयनित वत्सल टोप्पो, अनिकेत सेंगर को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही कोरोनाकाल में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी व कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर जिला पंचायत की अध्यक्ष मधु सिंह, अपर कलेक्टर एएल ध्रुव, गोंड समाज के संभागीय अध्यक्ष यू एस पोर्ते, प्रांतीय अध्यक्ष सुभाष, अमृत लाल, तरुण भगत सहित संभाग के सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे।


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