सरगुजा

जो देश पूर्वजों के बलिदान, इतिहास व संस्कृति को याद रखता है वही शक्तिशाली व समृद्ध- अनुराग
14-Nov-2021 8:19 PM
जो देश पूर्वजों के बलिदान, इतिहास व संस्कृति को याद रखता है वही शक्तिशाली व समृद्ध- अनुराग

 

बाल दिवस को शहीदों के नाम कर एक महान परम्परा का सूत्रपात

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अम्बिकापुर,14 नवम्बर।
सरगुजा राष्ट्रवादी मंच के तत्वावधान में आज केदारपुर चौक पर महेन्द्र सिंह टुटेजा, अजय तिवारी, डीके सिंह, पापिन्दर सिंह पबियाल व अनुराग सिंह देव के आतिथ्य में बाल दिवस को नवस्वरूप प्रदान करते हुए भारत के गौरवशाली इतिहास के महान बलिदानी चार साहिबज़ादों अजीत सिंह, जुझार सिंह, ज़ोरावर सिंह, फतह सिंह व खुदीराम बोस, जिन्होंने सनातन संस्कृति और धर्म की रक्षा हेतु बाल्य अवस्था में ही यातनाओं को सहते हुए सर्वस्व बलिदान का इतिहास रचा, ऐसे बलिदान को बालकों के लिए प्रेरणा मानते हुए उनके वीरगाथा के इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने के संकल्प के साथ बाल दिवस का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए महेन्द्र सिंह टुटेजा ने चार साहिबज़ादों व गुरु तेग बहादुर के बलिदान के घटनाक्रम का विस्तृत व मार्मिक वर्णन किया।
अजय तिवारी ने कहा कि चारों साहिबज़ादों द्वारा बाल्य अवस्था में दिए गए बलिदान को सम्मानित करने के लिए बाल दिवस ही एक उचित अवसर है। आज सरगुजा राष्ट्रवादी मंच ने बाल दिवस को इन शहीदों के नाम कर एक महान परम्परा का सूत्रपात किया है।

इस अवसर पर अनुराग सिंह देव ने कहा कि जो देश अपने पूर्वजों के बलिदान, इतिहास व संस्कृति को याद रखता, वही देश शक्तिशाली, समृद्ध व अखण्ड राष्ट्र बन सकता है। भारत में आजादी के बाद एवं आजादी से पूर्व बलिदानियों के इतिहास को जानबूझकर भावी पीढ़ी तक नहीं पँहुचने देने का कुत्सित षड्यंत्र रचा था, जिससे भावी पीढ़ी को किससे प्रेरणा लेनी है, यही निर्धारित नहीं हो पा रहा है। इसलिए जिस तरह नवीन परिस्थितियों में केन्द्र सरकार द्वारा अनुपयोगी कानूनों को समाप्त करने, अर्थव्यवस्था को डिजिटल करने के प्रयास हो रहे हैं, उसी प्रकार से इतिहास एवं पाठ्यक्रम की भी समीक्षा एवं पुनर्लेखन की आवश्यकता है।

प्रणव चक्रवर्ती ने शहीद खुदीराम बोस के लिए अपने श्रद्धांजलि गीत से सभी को भावुक कर दिया। देवराज बाबरा ने भी अपनी रचना द्वारा सभी बाल शहीदों को भावुक श्रद्धांजलि प्रदान की। इसके अतिरिक्त कार्यक्रम के संयोजक राकेश तिवारी, नीलेश सिंह, विवेक दुबे ने भी संबोधित किया।

कार्यक्रम का संचालन कवि विनोद हर्ष ने व आभार प्रदर्शन करते हुए सह सहसंयोजक वेदान्त तिवारी ने सबसे पहले शहर के लोकप्रिय युवा संजीत सिंह के असमय चले जाने पर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

इस अवसर पर कैलाश मिश्रा, पीयूष कुमार त्रिपाठी, नरेंद्र सिंह टुटेजा, निश्छल सिंह, शैलेश सिंह, संतोष बिहाड़े, अनिल जायसवाल, नीरज वर्मा, सुमीत मिश्रा, अंकित जायसवाल, सतपाल सिंह अरोरा, रिंकू त्रिपाठी, रामप्रवेश पांडेय, राजेश सिंह, स्वरूप कांत थॉमस, हरपीत छाबड़ा, मनीष सिंह, शानू कश्यप, विनायक पांडेय, वीर सोनी, अमित पांडेय, अनुराग शुक्ला, किशोर बघेल, अमोघ कश्यप, आशिता, रुद्रांग सहित गणमान्य प्रबुद्धजन उपस्थित थे।


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