सरगुजा
पारण के बाद व्रत संपन्न, छठ घाटों पर उमड़ी भीड़
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अम्बिकापुर,11 नवम्बर। उगते सूर्य को अर्घ्य देकर गुरुवार को छठ पूजा संपन्न हुई। छठ व्रतियों ने 36 घंटे का निर्जला व्रत रखकर कड़ी साधना करके सूर्य भगवान से अपनी संतानों, पति व परिवार की खुशियां मांगीं। इसके बाद उन्होंने निर्जला व्रत का पारण किया। इस दौरान अम्बिकापुर नगर के छठ घाटों पर व्रतियों के अलावा परिवार के सदस्यों की भीड़ उमड़ी रही।
अम्बिकापुर में छठ पर्व पर बुधवार की शाम की अपेक्षा गुरुवार की सुबह ज्यादा भीड़ देखी गई। छठ घाट शंकर घाट, बांक नदी, घुनघुट्टा डैम, बौरीपारा, केनाबांध, मेरीन ड्राइव, सतीपारा तलाब, शिवधारी तालाब सहित अन्य जगहों पर उगते हुए सूर्य देव को अघ्र्य दिया गया। नगर के अन्य तालाब व जलाशयों में भी सूर्य देव को अघ्र्य दिया गया।
8 नवम्बर से नहाय-खाय के साथ प्रारंभ हुए सूर्य उपासना का महापर्व छठ के दूसरे दिन व्रती महिलाओं ने दिन भर निर्जला उपवास रहने के बाद 9 नवंबर को खरना पूजा किए, जिसमें खीर का प्रसाद बनता है। खीर प्रसाद ग्रहण करने उपरांत महिलाएं पुन: निर्जला व्रत रखते हुए 10 नवंबर की शाम को अस्तांचल सूर्य को पहला अघ्र्य दिया।
11 नवंबर को प्रात: काल उगते हुए सूर्यदेव को अघ्र्य देकर व्रतियों ने व्रत का पारण किया। चार दिवसीय छठ महापर्व आरोग्यता प्रदान करने का व्रत है। छठ का व्रत व्रतियों के लिए किसी तपस्या से कम नहीं है। चार दिनों तक होने वाले विशेष अनुष्ठान में पवित्रता का खास ख्याल रखा जाता है।





