सरगुजा

विद्यार्थी जीवन में लक्ष्य जरूरी है ताकि भविष्य में मंजिल पा सकें-आकांक्षा
18-Sep-2021 9:15 PM
 विद्यार्थी जीवन में लक्ष्य जरूरी है ताकि भविष्य में मंजिल पा सकें-आकांक्षा

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

राजपुर, 18 सितंबर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर आज तालुका विधिक सेवा समिति राजपुर के अध्यक्ष व व्यवहार न्यायाधीश आकांक्षा बेक ने विधिक साक्षरता शिविर में बोलते हुए कहा कि अगर लक्ष्य जीवन में निर्धारित नहीं है तो उम्मीद या आशा के अनुरूप सफलता नहीं मिल पाती है, इसलिए विद्यार्थी जीवन में उम्र के इस पड़ाव पर लक्ष्य जरूरी है ताकि भविष्य में मंजिल पा सकें।

 उन्होंने कस्तूरबा विद्यालय के छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि बालकों की सहमति कानून में स्वीकार्य नहीं है, या मान्य नहीं है। उन्होंने स्पष्ट करते हुए आगे कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र के किसी भी बालक चाहे वह लडक़ा हो या लडक़ी यदि वह किसी भी बात के लिए कोई सहमति देते हैं तो ऐसी सहमति कानून में किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं है और बालकों की सहमति के आधार पर यदि कोई उनके साथ गलत कार्य को अंजाम देता है तो उसके विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही होना तय है, 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी बालिका की सहमति के आधार पर उनसे अगर कोई विवाह कर ले या किसी भी तरह से संबंध बनाए तो पूरी तरह से कानूनन अपराध है, ऐसी सहमति वैध नहीं कही जा सकती।

आगे उन्होंने कहा कि कानूनन विवाह के लिए लडक़े की उम्र 21 वर्ष और लडक़ी की उम्र 18 वर्ष तय की गई है, इसके पूर्व कोई भी विवाह कानून की नजरों में वैध नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार अक्सर देखा जाता है कि पढऩे-लिखने की उम्र में कुछ व्यस्क लोग कम उम्र की या अवयस्क लड़कियों को बहला-फुसलाकर उनके साथ गलत करते हैं और बाद में लोग यह कहते हैं कि लडक़ी की सहमति थी, यह पूरी तरह से गलत है और यदि ऐसा कहीं कोई करता है तो वह अपराध करता है। ऐसे लोगों से बचकर रहना है और किसी के बरगलाने या बहकावे में नहीं आना है। अपने अच्छे बुरे के बारे में अपने विवेक से निर्णय लेना है क्योंकि इसमें आपकी बेहतरी और भलाई निश्चित है।

अधिवक्ता संघ के सचिव सुनील सिंह ने कहा कि बालकों के लैंगिक उत्पीडऩ से संरक्षण अधिनियम काफी कठोर प्रावधान किए गए हैं और इससे अधिनियम के तहत गंभीर मामलों में फांसी तक की सजा का प्रावधान है बालकों या बालिकाओं के साथ किसी भी तरह काम अश्लील हरकत दंडनीय अपराध है, बालकों से काम कराना भी दंडनीय अपराध है और इसमें भी कठोर सजा का प्रावधान है। जुर्माने की राशि भी कम से कम 50 हजार रखी गई है। लड़कियों या महिलाओं को घूरना उनके ऊपर किसी भी तरह की छींटाकशी करना उनका पीछा करना उनके सामने अश्लील हरकतें करना ऐसी भाव- भंगिमाए बनाना जिससे असहज महसूस किया जाए सब अपराध की श्रेणी में है और सभी के लिए दंड का प्रावधान है।

परंतु ऐसे मामलों में मौन रहने से अपराध करने वालों का मनोबल बढ़ता है इसलिए जब कभी भी ऐसी घटना सामने आए, उस बारे में अपने परिजनों को बताएं और तत्काल नजदीक के पुलिस थाने में इस बात की रिपोर्ट दर्ज कराएं।

परीक्षा अधिनियम की जानकारी देते हुए आगे श्री सिंह ने कहा कि परीक्षा में अनुचित साधनों का प्रयोग प्रतिबंधित है और इसके परिणाम स्वरूप छात्र को उस कक्षा की परीक्षा इसके अलावा आने वाली परीक्षाओं से भी बाहर होना पड़ सकता है और आगामी वर्षों की परीक्षाओं के लिए भी रोका जा सकता है, इसलिए अनुचित साधनों का प्रयोग परीक्षा के दौरान कभी न करें।

 उपभोक्ता अधिनियम के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि कोई भी सामान खरीदने पर उसकी पक्की रसीद लें ताकि भविष्य में सामान में कोई खराबी आने पर उसके लिए मुआवजा जिला उपभोक्ता फोरम के सामने प्रस्तुत कर प्राप्त कर सके फेरी वालों से सामान लेने की दशा में सामान की रसीद नहीं मिलती और बाद में फेरी वाले भी दिखाई नहीं देते हैं इसलिए सदैव दुकानों से सामान खरीदें और उसकी भुगतान बाद रसीद भी प्राप्त करें जिला स्तर पर उपभोक्ता न्यायालय स्थापित किए गए हैं जहां किसी भी प्रकार के सेवा में कमी या सामान के गुणवत्ता में कमी की दशा में मामला प्रस्तुत कर क्षतिपूर्ति प्राप्त किया जा सकता है।

अधिवक्ता जितेंद्र गुप्ता ने कहा कि सफलता के लिए कोई शॉर्टकट नहीं होता, कड़ी मेहनत के बाद ही सफलता मिलती है। आप सभी किसी भी काम के लिए शॉर्टकट न अपनाएं, 18 वर्ष से कम उम्र के बालकों के लिए वाहन चलाना पूर्णता मनाही है। बगैर लाइसेंस के वाहन चलाना अपराध की श्रेणी में है और यदि कोई नाबालिग जिसकी उम्र 18 वर्ष से कम है। वह वाहन चलाकर अपराध कार्य करता है तो उसके पिता के विरुद्ध या पिता न हो तो संरक्षक के विरुद्ध मामला सक्षम न्यायालय में पेश किया जाएगा।

अधिवक्ता रामनारायण जायसवाल ने कहा कि कानून का स्थापित सिद्धांत है कि हर किसी को कानून की जानकारी है और हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह कानून का पालन करें, अगर कोई कानून का पालन नहीं करता है तो उसके द्वारा किसी भी ऐसे कृत्य को जो गैरकानूनी है उसे अपराध माना जाता है और ऐसे मामलों में जहां कोई व्यक्ति अपराध करता है, मामला दर्ज होने के बाद न्यायालय के माध्यम से समुचित निर्णय पारित होते हैं।

शिविर का संचालन अधिवक्ता जितेंद्र गुप्ता ने किया। इस अवसर पर विद्यालय की प्राचार्य उर्मिला मिंज, आरक्षक अविनाश एक्का,शीला मिंज,अनूपमा कपूर, पैरा लीगल वालंटियर रुपेश टोप्पो व अन्य उपस्थित थे।


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