सूरजपुर

24 साल की उम्र में शुरू किया रक्तदान, 55 की उम्र में भी फिट और ऊर्जावान हैं
15-Jun-2026 9:49 PM
24 साल की उम्र में शुरू किया रक्तदान, 55 की उम्र में भी फिट और ऊर्जावान हैं

महेश कुमार दोहरे, 29 बार कर चुके हैं रक्तदान

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

सूरजपुर,15 जून। रक्तदान को महादान कहा जाता है। नगर पंचायत शिवनंदनपुर निवासी महेश कुमार दोहरे ने इसे अपने जीवन में चरितार्थ कर दिखाया है। वर्तमान में हाई स्कूल कोट के प्राचार्य के रूप में पदस्थ महेश कुमार दोहरे ने वर्ष 1996 में 24 वर्ष की उम्र में पहली बार एक गर्भवती की जान बचाने के लिए रक्तदान किया था। उस दिन की घटना ने उनके जीवन को नई दिशा दी और तब से रक्तदान उनके लिए मानव सेवा का माध्यम बन गया।

आज 55 वर्ष की उम्र में भी महेश कुमार दोहरे पूरी तरह स्वस्थ, सक्रिय और ऊर्जावान हैं। वे नियमित रूप से मैराथन दौड़ में हिस्सा लेते हैं और प्रतिदिन 4 से 5 किलोमीटर दौडऩे की क्षमता रखते हैं। अब तक वे 29 बार रक्तदान कर चुके हैं और अनेक जरूरतमंद लोगों के जीवन में नई उम्मीद जगाने का कार्य किया है।

महेश कुमार दोहरे बताते हैं कि पहली बार रक्तदान कर एक गर्भवती महिला की जान बचाने के बाद उन्हें जो आत्मसंतोष और खुशी मिली, वही भावना उन्हें लगातार रक्तदान के लिए प्रेरित करती रही। उनके अनुसार, रक्तदान केवल रक्त देना नहीं, बल्कि किसी परिवार को उसके अपने से मिलने वाली खुशी लौटाना है। वे कहते हैं रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है। आपके द्वारा दिया गया रक्त किसी दुर्घटना पीडि़त, गर्भवती महिला, सिकल सेल या थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज के लिए जीवनदायिनी बन सकता है। रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं है, इसलिए प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को समय-समय पर रक्तदान अवश्य करना चाहिए।

महेश कुमार दोहरे का जीवन इस बात का जीवंत उदाहरण है कि नियमित रक्तदान से स्वास्थ्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। 29 बार रक्तदान करने के बावजूद वे पूरी तरह स्वस्थ और ऊर्जावान हैं। उनका समर्पण समाज के लिए प्रेरणा है और यह संदेश देता है कि यदि प्रत्येक सक्षम व्यक्ति रक्तदान का संकल्प ले, तो किसी भी जरूरतमंद को रक्त के अभाव में अपनी जान नहीं गंवानी पड़ेगी।

प्राचार्य होने के नाते वे विद्यालय में विद्यार्थियों को भी सामाजिक सरोकारों के प्रति जागरूक करते हैं। वे बच्चों को बताते हैं कि 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने के बाद प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर किसी जरूरतमंद की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

महेश कुमार दोहरे की प्रेरणादायक यात्रा मानवता, सेवा और परोपकार की भावना को मजबूत करती है और समाज को यह संदेश देती है कि रक्तदान के माध्यम से अनगिनत जीवन बचाए जा सकते हैं, यही सच्ची मानव सेवा है।


अन्य पोस्ट