सुकमा

जहां कभी गूंजती थी गोलियों की आवाज, अब विकास की दस्तक
20-Mar-2026 10:42 PM
जहां कभी गूंजती थी गोलियों की आवाज, अब विकास की दस्तक

जंगल-पगडंडियों को पार कर कलेक्टर-एसपी पहुंचे गांव

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

सुकमा, 20 मार्च। वर्षों तक भय और उपेक्षा का प्रतीक रहे ताड़मेटला गांव में आज एक नई उम्मीद की किरण दिखाई दी। आजादी के बाद पहली बार किसी कलेक्टर का इस सुदूर गांव तक पहुंचना न केवल प्रशासनिक पहल है, बल्कि विश्वास, संवेदना और बदलाव का सशक्त संदेश भी है।

कलेक्टर अमित कुमार और एसपी  किरण चव्हाण ने घने जंगलों और कठिन पगडंडियों को पार कर ताड़मेटला पहुंचकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। उनके साथ डीआईजी सीआरपीएफ  आनंद सिंह पुरोहित और जिला पंचायत सीईओ  मुकुंद ठाकुर भी उपस्थित रहे। प्रशासनिक टीम की यह पहल ग्रामीणों के लिए भावनात्मक और ऐतिहासिक पल बन गई।

गांव में चौपाल लगाकर अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और मौके पर ही समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए। प्राथमिक शाला, आंगनबाड़ी भवन और पंचायत भवन के निर्माण के लिए 45 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। साथ ही 15 लाख रुपये की अग्रिम राशि भी पंचायत के खाते में हस्तांतरित कर दी गई, जिससे विकास कार्यों की शुरुआत तुरंत हो सके। ग्रामीणों के जीवन को आसान बनाने के लिए पेयजल व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। प्रशासन ने आश्वस्त किया कि सप्ताह भर के भीतर हर घर तक पानी पहुंचाने का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा, क्योंकि पाइपलाइन बिछाने का काम लगभग पूरा हो चुका है।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना, वृद्धा पेंशन, महतारी वंदन योजना, तेंदूपत्ता खरीदी, बिजली और सडक़ जैसी मूलभूत सुविधाओं पर भी सकारात्मक और विस्तृत चर्चा हुई। ग्रामीणों ने पहली बार महसूस किया कि प्रशासन उनकी दहलीज तक पहुंचकर उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुन रहा है।

उल्लेखनीय है कि ताड़मेटला वही गांव है, जो वर्ष 2010 की उस दर्दनाक घटना का साक्षी रहा, जब नक्सलियों ने 76 जवानों को शहीद कर दिया था। आज उसी धरती पर प्रशासन का यह कदम नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक मजबूत संदेश और विश्वास बहाली की बड़ी पहल माना जा रहा है।

विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा सुशासन और विकास की जो परिकल्पना की गई है, ताड़मेटला में उसकी ठोस शुरुआत स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। कलेक्टर  अमित कुमार ने भावुक शब्दों में ग्रामीणों से कहा, अब आपके गांव का विकास आपके अपने हाथों में है। इन प्रशासनिक भवनों को गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध तरीके से पूरा कीजिए।

प्रशासन हर कदम पर आपके साथ खड़ा है।


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