सारंगढ़-बिलाईगढ़
आपत्ति दावा बुलाए गए
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
सारंगढ़-बिलाईगढ़, 6 अप्रैल। जिले में प्रस्तावित चूना पत्थर खदान परियोजना को लेकर अब भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी सामने आई है। इस संबंध में संबंधित गांवों में ईश्तहार प्रकाशित किए गए हैं और प्रकरण अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) न्यायालय में विचाराधीन है।
जानकारी के अनुसार, 17 नवंबर 2025 को पांच गांवों की लगभग 500 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित खदान परियोजना के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु जनसुनवाई आयोजित की गई थी। ग्रामीणों द्वारा बहिष्कार और विरोध के बाद अनुविभागीय अधिकारी ने जनसुनवाई निरस्त करने का आदेश जारी किया था।
इसके बाद, 25 मार्च 2026 को मेसर्स ग्रीन सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा भूमि अधिग्रहण के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया। इसके तहत ग्राम जोगनीपाली में लगभग 16.909 हेक्टेयर (करीब 42 एकड़) और ग्राम कपिस्दा ब में लगभग 3.675 हेक्टेयर (करीब 9 एकड़) निजी भूमि के अधिग्रहण के लिए इश्तहार जारी कर दावा-आपत्ति आमंत्रित किए गए हैं। जोगनीपाली के लिए 13 अप्रैल 2026 तथा कपिस्दा ब के लिए 17 अप्रैल 2026 तक दावा-आपत्ति प्रस्तुत करने की तिथि निर्धारित की गई है।
इस परियोजना के तहत धौराभाठा, लालाधुरवा, जोगनीपाली, कपिस्दा और सरसरा सहित कई गांवों की भूमि प्रभावित होने की जानकारी दी गई है। परियोजना के लिए पूर्व में भी जनसुनवाई आयोजित करने का प्रयास किया गया था, जिसे विरोध के चलते स्थगित या निरस्त किया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पूर्व में भी परियोजना का विरोध किया था और उनकी आपत्तियों पर विचार किए बिना आगे की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। उनका यह भी कहना है कि क्षेत्र कृषि प्रधान है और खनन गतिविधियों से आजीविका और पर्यावरण प्रभावित हो सकते हैं।
परियोजना से संबंधित कंपनी द्वारा लगभग 200 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण का प्रस्ताव बताया गया है, जिसमें कृषि भूमि, शासकीय भूमि और वन भूमि शामिल है। उत्पादन क्षमता और अन्य तकनीकी पहलुओं से संबंधित जानकारी भी पूर्व में प्रस्तुत की गई थी।
प्रशासन की ओर से जारी इश्तहार के अनुसार, भूमि अधिग्रहण से संबंधित प्रकरण वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है और निर्धारित तिथियों तक प्राप्त दावा-आपत्तियों पर नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा।


