राजपथ - जनपथ
स्कूल और विधायक
वैशाली नगर के भाजपा विधायक रिकेश सेन सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं और अपने कामकाज की जानकारी नियमित रूप से साझा करते हैं। हाल ही में उन्होंने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव के साथ हुई बातचीत का ऑडियो फेसबुक पर पोस्ट किया, जिसकी राजनीतिक हलकों में चर्चा है।
मामला स्कूलों के खुलने की तारीख से जुड़ा है। गर्मी को देखते हुए कुछ अभिभावक स्कूलों को 16 जून के बजाय 1 जुलाई से खोलने की मांग कर रहे हैं। ऐसे ही कुछ पालकों ने विधायक रिकेश सेन से मुलाकात कर हस्तक्षेप का आग्रह किया।
विधायक रिकेश सेन ने तत्काल स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव को फोन लगाया और मोबाइल स्पीकर पर रखकर पालकों को पूरी बातचीत सुनाई। विधायक ने मंत्री को बताया कि प्रदेश में स्कूल 16 जून से खुल रहे हैं, लेकिन गर्मी को लेकर कई अभिभावक चिंतित हैं और तारीख आगे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
इस पर मंत्री ने कहा कि 10-12 दिन पहले मौसम की स्थिति अलग थी, लेकिन अब कई क्षेत्रों में बारिश हो चुकी है और मौसम में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आगे परिस्थितियां बदलती हैं तो सरकार इस पर विचार करेगी।
विधायक द्वारा बातचीत का ऑडियो सार्वजनिक किए जाने और पालकों को सीधे मंत्री से बात सुनाने के तरीके की अब काफी चर्चा हो रही है।
मीनाक्षी का मुद्दा गर्म
मध्यप्रदेश में कांग्रेस नेत्री मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन निरस्त होने का मामला अब राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। मीनाक्षी से छत्तीसगढ़ के कई कांग्रेस नेता जुड़े रहे हैं और वे भी नामांकन निरस्त होने के कारणों की पड़ताल में जुटे हैं। चर्चा है कि पहली नजर में तकनीकी चूक तो हुई है, लेकिन इसके लिए पार्टी के अंदरखाने में मीनाक्षी के सलाहकारों और कानूनी टीम को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
रिटर्निंग अधिकारी द्वारा जांच के दौरान नामांकन निरस्त किए जाने के बाद कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर चोट बताते हुए सीट चोरी तक करार दिया। पार्टी ने पहले निर्वाचन आयोग और फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन दोनों जगह राहत नहीं मिली।
कांग्रेस नेताओं के बीच चर्चा है कि नामांकन दाखिल करते समय मीनाक्षी तेलंगाना की एक अदालत से जुड़े नोटिस का उल्लेख करने के पक्ष में थीं। मगर उनके कानूनी सलाहकारों ने यह कहते हुए ऐसा करने से मना कर दिया कि इसकी आवश्यकता नहीं है। माना जा रहा है कि यही चूक बाद में भारी पड़ गई। नामांकन जांच के दौरान इस मुद्दे पर आपत्ति दर्ज हुई और नामांकन निरस्त कर दिया गया। पार्टी के कुछ लोग पूरे घटनाक्रम को सुनियोजित मान रहे हैं और वकीलों की भूमिका पर भी सवाल उठा रहे हैं।
रिटर्निंग अधिकारी को भी कटघरे में खड़ा किया जा रहा है। तर्क दिया जा रहा है कि यदि त्रुटि तकनीकी और सुधार योग्य थी तो प्रत्याशी को उसे दुरुस्त करने का अवसर दिया जा सकता था। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। दूसरी तरफ, दो सीटों के लिए भाजपा की ओर से तीन नामांकन दाखिल किए जाने के बाद से ही क्रॉस वोटिंग की आशंका जताई जा रही थी। मगर पार्टी के भीतर चल रही खींचतान के नामांकन पत्र की तकनीकी बारीकियों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, जो अंतत: कांग्रेस के लिए भारी पड़ गया।
अबूझमाड़ में जंगल क्यों साफ हो रहे?
नक्सल समस्या के उन्मूलन के बाद होने वाले कुछ बदलावों का अनुमान लोगों ने पहले से लगा लिया था। उनमें एक यह था कि यहां के सघन वनों पर कुल्हाड़ी चलाना आसान हो जाएगा। जिस अबूझमाड़ में नक्सलियों के भय के कारण कदम रखना मुश्किल था, वहां आज बड़े पैमाने पर पेड़ों की अवैध कटाई शुरू हो गई है। इस बारे में सोशल मीडिया पर कई वीडियो और फोटोग्रॉफ्स पोस्ट किए जा हैं। इसमें यह बताया जा रहा है कि किसी बड़े व्यापारिक या औद्योगिक घरानों को ये जंगल सौंपे जाने की खबर फिलहाल नहीं आई है, पर निश्चित रूप से भू माफिया सक्रिय हो गए हैं। दरअसल, नक्सल खतरे के चलते अबूझमाड़ में आज तक न तो राजस्व भूमि का सीमांकन हो पाया और न ही वन भूमि का। अब यह काम शुरू होने वाला है। उसके पहले कुछ ताकतवर लोग बड़े-बड़े टुकड़ों में जंगल से पेड़ों को काट रहे हैं और उस पर कब्जा कर रहे हैं। ताकि जब सर्वेक्षण हो तो उस जमीन पर पट्टा या मालिकाना हक हासिल कर सकें।


