राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : भव्य मंदिर पाट देगा रामगढ़ की दरारें?
14-Jun-2026 6:40 PM
राजपथ-जनपथ : भव्य मंदिर पाट देगा रामगढ़ की दरारें?

भव्य मंदिर पाट देगा रामगढ़ की दरारें?

अंबिकापुर से करीब 60 किलोमीटर दूर रामगढ़ या रामगिरी पर्वत का पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व है।  मान्यता है कि 14 वर्ष के वनवास के दौरान भगवान राम यहां आए थे और इसी पर्वत पर विश्राम किया था। इसके अलावा भरतमुनि ने यहीं नाट्यशास्त्र की रचना की थी। इस पर्वत के एक हिस्से को प्राचीन नाट्यशाला या खुला रंगमंच के रूप में पहचान मिली हुई है। इस पर्वत पर अलग-अलग तरह की कई गुफाएं हैं। धार्मिक-पौराणिक कथाओं में कहा गया है कि यहां सीता, राम, लक्ष्मण इनमें विश्राम करते थे। सीताबेंगरा, जोगीमारा जैसी आयताकार गुफाओं की संचरना प्रकृति ने कुछ इस तरह से की है कि एक गुफा से दूसरी गुफा में संवाद भी स्थापित हो सके। आप यहां जोर-जोर से आवाज करें, कोई गीत गाएं या कुछ भी बोलें तो प्रतिध्वनि किसी अत्याधुनिक साउंड सिस्टम की तरह सुनाई देती है। जनश्रुति है कि महाकवि कालिदास ने मेघदूतम की रचना यहीं पर बैठकर की।

रामगढ़ की यह ऐतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहर इस समय अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। केते एक्सटेंशन की मंजूरी देने से यह नौबत आई है। खदानों की ब्लास्टिंग के चलते ऐतिहासिक चट्टानों में दरारें आ रही हैं। इसे लेकर स्थानीय आदिवासी, पर्यावरण प्रेमी, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक प्रतिमानों के संरक्षण के लिए चिंतित सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी इस ब्लास्टिंग पर तुरंत रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। आरोप यह भी है कि खदान के ब्लास्टिंग एरिया और रामगढ़ के चट्टानों के बीच की दूरी को गलत तरीके से अधिक बताया गया है, जिससे खनन में कोई बाधा नहीं आए, लेकिन दरारों की तस्वीर ज्यादा सही तरीके से वास्तविक संकट को उजागर करती है। 

पूर्व की कांग्रेस सरकार ने इसे राम वनगमन परियोजना में शामिल किया था।  यहां भगवान राम की 15 मीटर ऊंची प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव था। मगर, उस समय खनन से उत्पन्न संकट खड़ा नहीं हुआ था। मंजूरी उस समय ही मिल चुकी थी, पर खनन शुरू नहीं हुआ था। संयोगवश प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद ही यह मुद्दा तेजी से उभरा है। संयोग यह भी है कि संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल भी सरगुजा के ही हैं, जिन पर प्रदेश की सांस्कृतिक, पौराणिक और ऐतिहासिक पहचान को संरक्षित करने की जिम्मेदारी है। वे सरकार के सामूहिक फैसलों में हिस्सेदार हैं। खनन रोकने और इससे होने वाली क्षति से रामगढ़ को बचाने का उनके पास कोई उपाय नहीं है। मगर, रामगढ़ के महत्व को कम भी तो नहीं होने देना है। सो, पिछले साल यहां एक मंदिर का शिलान्यास किया गया। उस राम मंदिर को अयोध्या के राम मंदिर के तर्ज पर करीब 100 फीट लंबे और 70 फीट चौड़े और 65 फीट ऊंचे आकार में बनाने का निर्णय लिया गया। जनसहयोग से करीब एक करोड़ की लागत से इसका निर्माण किया जा रहा है।

उक्त निर्माणाधीन मंदिर की चर्चा कल सरगुजा में फिर उठी। उन लोगों ने उठाई जो कोयला खनन के कारण रामगढ़ को पहुंच रहे नुकसान के खिलाफ आंदोलनरत हैं। मौका था रामगढ़ संरक्षण एवं संवर्धन समिति की ओर से रखी गई परिचर्चा। इसमें पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने मंदिर निर्माण की मंशा पर सवाल उठाया। उनके शब्द कुछ इस तरह हैं- सियाराम जी के साथ आस्था क्या केवल अयोध्या से जुड़ी हुई है? हमारे सरगुजा के सियाराम जी के मंदिर को वहीं न रखते हुए मूर्ति को नीचे लाने का कृत्य क्यों हो रहा है? यदि ऐतिहासिक मंदिर के स्थान पर नया भव्य मंदिर बनवाया जा रहा है तो समझ लीजिये यह सरकार की कुटिल चाल है। ऊपर से मूर्ति लाकर स्थापित की जाएगी। सरकार भी यह मानती है कि रामगढ़ में दरारें आ रही हैं, तभी सरकार भव्य मंदिर बनाने के लिए भूमिपूजन कर रही है। सिंहदेव के मुताबिक, पत्थरों पर खुद सरकार ने लिखवा रखा है, बच कर रहिये, चट्टानों में दरारें हैं। तय हुआ था कि नई खदानों को अब इलाके में मंजूरी नहीं दी जाएगी आज लगभग 23 खदानें चिन्हांकित हैं।

प्रशिक्षण से सशक्तिकरण?

कांग्रेस के नवनियुक्त जिलाध्यक्षों के प्रशिक्षण के लिए 21 से 30 जून तक शिविर लग रहे हैं। शनिवार को राष्ट्रीय महामंत्री केसी वेणुगोपाल के पत्र के बाद शिविर की तैयारी तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एक दिन शिविर में रहकर जिलाध्यक्षों को मार्गदर्शन देंगे। वे जिलाध्यक्षों के परिजनों से भी मिलेंगे और उनके साथ फोटो खिंचवाएंगे। अभी यह तय नहीं है कि राहुल कब आएंगे, लेकिन संभवत: 27 जून को यहां आ सकते हैं।

प्रशिक्षण शिविर के लिए अभनपुर से पाटन मार्ग पर स्थित मंगल भवन को किराये पर लिया गया है। यहां 35 कमरे हैं, जहां जिलाध्यक्ष पूरे 10 दिन रहेंगे। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सभी महासचिव प्रशिक्षण शिविर में एक-एक दिन के लिए आएंगे तथा उनका उद्बोधन होगा। बाहर से आने वाले प्रमुख नेताओं के लिए होटल में ठहरने की व्यवस्था की जा रही है।

प्रशिक्षण शिविर सभी राज्यों में हो रहे हैं। कुछ समय पहले गुजरात में हुआ था और कुछ दिन पहले ही पंजाब में भी प्रशिक्षण शिविर हुए। शिविर में राहुल गांधी के उद्बोधन को लेकर काफी उत्सुकता है। राहुल जिलाध्यक्षों को सशक्त बनाने की बात कह चुके हैं। प्रत्याशी चयन में भी जिलाध्यक्षों की भागीदारी होगी। उन्हें हटाना भी आसान नहीं होगा। इन सभी बातों पर चर्चा होगी। प्रदेश के तमाम नेता मौजूद रहेंगे। प्रशिक्षण शिविर के बाद कांग्रेस का सरकार के खिलाफ अभियान तेज होगा, देखना है क्या कुछ होता है।

AI से लैस योद्धा!

मीडिया में एआई का इस्तेमाल अब खूब होने लगा है। हालांकि कई जानकारियां सही नहीं होतीं। ऐसे में पूरी तरह एआई की जानकारियों को सही नहीं माना जाता। विधानसभा के शीतकालीन सत्र में साइबर क्राइम से जुड़े सवाल के दौरान गृहमंत्री विजय शर्मा और भाजपा सदस्य सुनील सोनी के बीच काफी बहस हुई थी।

सोनी जिन आंकड़ों के आधार पर सवाल कर रहे थे, वे चैटजीपीटी के थे, जबकि गृह विभाग के आंकड़े एकदम अलग थे। स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि एआई की जानकारी पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता। एआई के आंकड़ों में त्रुटि हो सकती है। खुद एआई भी यह बात कहता है।

कुछ इसी तरह शनिवार को मीडिया कॉन्क्लेव में देश की अर्थव्यवस्था को लेकर सवाल पूछा गया, तो केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने मीडियाकर्मी को टोक दिया कि वे चैट देखकर सवाल न करें। उन्होंने कहा, मैं भी चैट देखता हूं। मेरे द्वारा दी गई जानकारी सही है।


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