राजपथ - जनपथ
आँखों से ओझल की अब सुगबुगाहट!
चर्चा है कि पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू को अहम जिम्मेदारी मिल सकती है।ताम्रध्वज की पिछले दिनों दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात हुई थी और दोनों के बीच छत्तीसगढ़ में पार्टी संगठन के विषयों पर चर्चा हुई थी। अब जब प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज को बदलने की चर्चा चल रही है, ऐसे में ताम्रध्वज की सक्रियता की पार्टी के अंदरखाने में चर्चा है।
खरगे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष थे, तब ताम्रध्वज प्रदेश से कांग्रेस के इकलौते सांसद थे। तब से खरगे से उनकी अच्छी छनती है। सर्वविदित है कि खरगे ने ही वर्ष 2018 में कांग्रेस को बहुमत मिलने पर मुख्यमंत्री पद के लिए ताम्रध्वज साहू का नाम आगे किया था। वे यहां पर्यवेक्षक बनकर आए थे। यह अलग बात है कि ताम्रध्वज मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गए। उनकी तरफ से समर्थकों को संकेत दिया गया है कि आने वाले दिनों में सब कुछ अच्छा होगा।
तीन दिन पहले डोंगरगढ़ मंदिर दर्शन के लिए गए थे, तो पार्टी के कई लोग उनसे मिलने पहुंचे थे। ताम्रध्वज की तरफ से संकेत मिला कि आने वाले दिनों में सब कुछ अच्छा होगा।
कुछ लोग अंदाजा लगा रहे हैं कि वर्ष 2018 जैसी स्थिति फिर बन सकती है। उस समय मुख्यमंत्री पद को लेकर भूपेश बघेल, टी.एस. सिंहदेव और डॉ. चरणदास महंत के बीच रस्साकशी चल रही थी। इसको देखकर हाईकमान ने ताम्रध्वज का नाम फाइनल कर दिया था, लेकिन बाद में परिस्थितियां बदल गईं। इस बार भी प्रदेश अध्यक्ष को लेकर जिस तरह खींचतान चल रही है, उससे ताम्रध्वज के करीबी लोग उम्मीद में हैं। देखना है आगे क्या होता है।
लोकल ट्रेन और वाट्सएप तर्क वितर्क...
नवा रायपुर के महानदी- इंद्रावती भवन में डॉट 10 बजे सभी कुर्सियां भर जाए इसके लिए जीएडी वर्किंग प्लान बना रहा । इसमें अब तक कुछ सफलता मिली है कुछ पर काम किया जा रहा है। इन्हीं में से एक है रायपुर से नवा रायपुर के लिए आफिस टाइम पर लोकल ट्रेन। अभी बसों पर सरकार 30 करोड़ सालाना खर्च कर रही है दोनों भवनों के स्टाफ की आवाजाही पर।

इस नई तैयारी पर एनआरडीए से खबर निकलते ही कर्मचारी अधिकारियों ने अपने अपने तर्क-वितर्क से पूरा वाट्सएप भर दिया। एक कर्मचारी ने पूरा समाचार लिख दिया -
छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक राजधानी नया रायपुर (अटल नगर) को एक बड़ी सौगात मिलने जा रही है। शहर के भीतर परिवहन को रफ्तार देने और रायपुर-धमतरी मार्ग को जोडऩे के लिए एक नई रेलवे लाइन बिछाने की योजना तैयार की गई है। यह नई रेल लाइन रायपुर से शुरू होकर नया रायपुर के तमाम प्रमुख सार्वजनिक और प्रशासनिक केंद्रों को आपस में जोड़ेगी। रूट को इस तरह डिजाइन किया गया है जिससे आम जनता और कर्मचारियों को सीधा लाभ मिले। यह लाइन मुख्य शहर रायपुर से रवाना होगी। खेल प्रेमियों के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम तक पहुंच आसान होगी। प्रशासनिक हब के बीच से गुजरने के कारण सरकारी कर्मचारियों और आगंतुकों को बड़ी राहत मिलेगी। बालको कैंसर अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र आने वाले मरीजों के लिए यात्रा सुगम होगी। ट्रिपल आईटी और अन्य शैक्षणिक संस्थान के जुडऩे से छात्रों और प्रोफेसरों को सीधा फायदा मिलेगा। इन सभी प्रमुख सार्वजनिक स्थानों को कवर करते हुए यह लाइन सीधे (धमतरी) मार्ग की ओर आगे बढ़ जाएगी।
अब इस खबर पर सवाल जबाव का सिलसिला जो लोग पुल वाहन का पर्सनल उपयोग कर रहे हैं, नया रायपुर में रहने वाले पात्रताधारी अधिकारी जो ऑफि़स आने जाने में केवल 100 किलोमीटर की यात्रा करते हैं और 2500 किलोमीटर की यात्रा हेतु फ्यूल डलवाते हैं, जिनके पास 3 से 4 विभाग का प्रभार है और प्रत्येक विभाग से एक एक वाहन लेकर उपयोग करते हुए वास्तविक आवश्यकता से अधिक का फ्यूल भरवाते हैं, उनका क्या।
-ऐसे अधिकारी ,बच्चों के स्कूल, पत्नियों के बाजार आदि के लिए अलग अलग उपयोग करतें है। क्या इससे शासन पर भार नहीं पड़ता है? अधिकारियों के लिए भी पुल कार की व्यवस्था होनी चाहिए।
केवल कर्मचारियों के लिए ही नियम है क्या?
-जानकारी एकत्र करो, ज्ञापन दो, पात्रताधारी अधिकारियों से वाहन उपयोग के संबंध में शपथ पत्र जमा करवाओ।
-ऐसे अधिकारी जिन्हें स्टेट गैरेज से वाहन आवंटित हुआ है, आज भी उनके वेतन से वाहन किराया मात्र रु. 250/- प्रतिमाह की कटौती होती है, (पेट्रोल - डीजल फ्री) उनका वेतन एक लाख रुपए से अधिक ही निर्धारित है। जबकि वर्तमान संकट के समय में शासकीय वाहन का किराया कितना निर्धारित होना चाहिए?
-5000 तो होना ही चाहिए। जो अपने पावर का उपयोग करते उनको यह सुविधा मिलती है हमें दूसरों के सुख से ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए, पॉजिटिव सोच रखें अपने लिए भी व्यवस्था कर सकते हो।
एक ने फ्यूल खर्च को बचाने नया ही फंडा देते हुए कहा-
-2012 में नया रायपुर शिफ्ट हुए । लगभग 14 साल बीत गए। मंत्रालय व संचालनालय व अन्य कार्यालय मिलाकर प्रथम श्रेणी से चतुर्थ श्रेणी अधिकारी/कर्मचारी मिलाकर लगभग 5000 होंगे।
-2013 से भी यदि सरकार शासकीय आवास बनाती तो अब तक बन भी चुका रहता । सबको शासकीय आवास देने के बाद बस बंद करने के बारे में विचार कर सकता था।
-नया रायपुर में बहुत सारे शासकीय आवास बना है, लेकिन उसे बेच रहे हैं।
बहुत से अधिकारी-कर्मचारी जो विगत वर्षों से आवास आबंटन के लिए फार्म भरे हैं, वेटिंग है उनके लिए शासकीय आवास नहीं है।
-नया रायपुर में सबको शासकीय आवास मिलने के बाद जो पुराना रायपुर से अप-डाउन करना चाहता है, वह उसके ऊपर छोड़ देना था ।
-रायपुर से 50 प्रतिशत या उससे ऊपर अधिकारी-कर्मचारी पुराने शहर के स्वयं के घर से आते जाते हैं, वो क्यों लेंगे लेकिन उन्हें सुविधा देनी ही होगा।
बाबाधाम के लिए काउंटर पर रतजगा

छत्तीसगढ़ से बाबाधाम देवधर जाने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ हर साल बढ़ती जा रही है, पर उसके अनुपात में ट्रेनों की संख्या नहीं बढ़ रही है। इस बार यह यात्रा 30 जुलाई से शुरू हो रही है। मगर, कंफर्म टिकटों के लिए मारामारी अभी से शुरू हो गई है। यह बिलासपुर रेलवे स्टेशन के रिजर्वेशन काउंटर का दृश्य है, जहां सुबह खिडक़ी खुलने के इंतजार में रात से ही डेरा डालकर बैठ गए हैं। मच्छरों का प्रकोप बिलासपुर के दूसरे इलाकों की तरह यहां पर भी है, इसलिये उन्होंने मच्छरदानी और गद्दे-तकियों का भी इंतजाम कर रखा है। वैसे जानकारी के लिए बता दें कि बिलासपुर या छत्तीसगढ़ जाने वाले अधिकांश यात्री जसीडीह में उतरते हैं। उनके लिए साउथ बिहार एक्सप्रेस रोजाना चलती है।
यह बिलासपुर से सुबह-सुबह छूटती है और अगले दिन सुबह जसीडीह पहुंचा देती है। सप्ताह में एक दिन शुक्रवार को बिलासपुर पटना सुपर फास्ट एक्सप्रेस चलती है। यह रात में 8.30 बजे निकलती है और 12-13 घंटे में जसीडीह पहुंचा देती है। शनिवार को एक ट्रेन शालीमार-उदयपुर सिटी एक्सप्रेस चलती है। शुक्रवार-शनिवार की रात 1.10 बजे यह बिलासपुर स्टेशन से गुजरती है। एक गोंदिया बरौनी एक्सप्रेस भी है, जो उसलापुर स्टेशन से रात 9.30 बजे छूटती है। गोंदिया के रास्ते में राजनांदगांव, दुर्ग और रायपुर के यात्री भी इसमें सफर करते हैं। पिछले कुछ सालों से रेलवे श्रावणी स्पेशल ट्रेनों का संचालन करती आ रही है। उसकी घोषणा अभी नहीं हुई है। जुलाई में इसका टाइम टेबल आने की संभावना है।


