राजपथ - जनपथ
संघर्ष साथ ला देता है
नगर पंचायत उपचुनाव के बहाने कांग्रेस में एकजुटता देखने को मिल रही है। ऐसी एकता विधानसभा, लोकसभा और स्थानीय चुनावों के दौरान नजर नहीं आई थी, जिसका खामियाजा पार्टी को हार के रूप में भुगतना पड़ा। अब जबकि विधानसभा चुनाव में करीब ढाई साल का समय बचा है, पार्टी के दिग्गज नेता आपसी मतभेद भुलाकर एक मंच पर आते दिखाई दे रहे हैं।
एकजुटता का यह नजारा उस वक्त देखने को मिला, जब सूरजपुर जिले की शिवनंदनपुर नगर पंचायत चुनाव के दौरान कांग्रेस के एक महामंत्री के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। यहां कांग्रेस चुनाव के प्रभारी डॉ. प्रेमसाय सिंह और अमरजीत भगत हैं। कांग्रेस ने भाजपा नेताओं के दबाव में पुलिस पर झूठा प्रकरण दर्ज करने का आरोप लगाया। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव भी मौके पर पहुंच गए।
दोनों नेता धरने पर बैठ गए। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी उनके साथ रहे। इससे पहले टी.एस. सिंहदेव और भूपेश बघेल एक ही कार में दिखाई दिए, जिसकी स्टेयरिंग टी.एस. सिंहदेव संभाल रहे थे। यही नहीं, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत की रामभद्राचार्य को लेकर की गई टिप्पणी पर भी भूपेश बघेल और टी.एस. सिंहदेव उनके समर्थन में सामने आए।
पहली नजर में दिग्गज नेताओं के बीच दूरियां कम होती दिख रही हैं। इसका असर यह है कि छोटे से नगर पंचायत चुनाव में कांग्रेस बेहतर स्थिति में नजर आ रही है, जबकि भाजपा को यहां कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह दिखाई दे रहा है और आने वाले दिनों में सरकार के खिलाफ अभियान तेज करने की रणनीति पर काम शुरू हो गया है। देखना है कि आगे क्या कुछ होता है।
बाहर रहते हुए ही इंपैनल
केन्द्र सरकार ने देशभर के वर्ष-2001 से लेकर वर्ष-08 बैच तक के 68 अफसरों आईजी पद के लिए इंपैनल किया है। छत्तीसगढ़ कैडर से दो अफसर नीथू कमल और डी श्रवण भी इंपैनल हुए हैं। खास बात ये है कि दोनों अफसर केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं।
नीथू कमल सीबीआई, तो डी श्रवण एनआईए में पदस्थ हैं। तीन अफसर इंपैनल होने से रह गए, इनमें आईजी प्रशांत अग्रवाल, पारूल माथुर, और बालाजी सोमावार हैं। पारूल माथुर के खिलाफ विभागीय जांच चल रही है, तो बालाजी राव को लेकर कहा जा रहा है कि उनका एक साल का सीआर जमा नहीं हो पाया था। ऐसे में तीनों के लिए फिलहाल केंद्रीय एजेंसियों में जाने के इंतजार करना पड़ सकता है।
चमगादड़ों की इंसानों को चेतावनी
इस बार की गर्मी केवल तापमान के आंकड़े नहीं तोड़ रही, बल्कि भविष्य के लिए बड़ी चेतावनी भी बनकर आ रही है। कोरबा के पाली में नौकोनिया तालाब के किनारे हाल ही में जो दृश्य दिखा, उसने सबको चिंतित कर दिया। सैकड़ों चमगादड़ पेड़ों से नीचे गिर पड़े। कई पेड़ों पर उल्टे लटके-लटके ही मर गए। इसी तरह से सैकड़ों चमगादड़ों की कांकेर में जान चली गई। शुरुआती जांच में वन विभाग के अफसरों और जानकारों ने उनकी मौत का कारण भीषण गर्मी और लू को माना है।
चमगादड़ अपनी जान की कीमत चुका कर हमें आगाह कर रहे हैं कि राज्य तेजी से पर्यावरणीय असंतुलन की चपेट में आ रहा है। रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, महासमुंद और राजनांदगांव जैसे शहर इस वर्ष कई बार देश के सबसे गर्म शहरों की सूची में शामिल रहे। मौसम विभाग ने लगातार लू की चेतावनी जारी की है। कई जिलों में दिन का तापमान 45 डिग्री से ऊपर पहुंच गया, जबकि रात में भी राहत नहीं मिल रही है।
चमगादड़ बेहद संवेदनशील जीवों में से हैं। वे वातावरण में बदलाव का असर जल्दी झेलते हैं। उनका शरीर अधिक गर्मी सहन नहीं कर पाता। जब तापमान 42 डिग्री के पार पहुंचता है तो वे हीट स्ट्रोक का शिकार होने लगते हैं। कोरबा के पाली और बस्तर के कांकेर इलाके में भी यही हुआ। वहां लोगों ने लगातार कई दिनों तक चमगादड़ों को पेड़ों से गिरते देखा, पर बेबस थे। बचाने का कोई उपाय उनके पास नहीं था।
गौर करने की बात है कि चमगादड़ पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा होते है। वे खेतों में नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों को खाते हैं, कई पेड़ों और फूलों के परागण में मदद करते हैं और बीज फैलाकर जंगलों के विस्तार में भूमिका निभाते हैं। यदि ऐसे काम के जीव बड़ी संख्या में मरने लगें तो इसका असर खेती, जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन पर पड़ता है।
पृथ्वी के बढ़ते तापमान के चलते संवेदनशील शारीरिक क्षमता वाले जीवों पर शामत दुनियाभर में आने लगी है। इसी साल ऑस्ट्रेलिया में भीषण गर्मी के दौरान हजारों फ्रूट बैट्स की मौत हो चुकी है। यूरोप और अफ्रीका के कई हिस्सों में भी गर्मी का असर वन्यजीवों पर दर्ज किया जा चुका है। वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण हीटवेव पहले से ज्यादा लंबी और घातक होती जा रही हैं।
छत्तीसगढ़ की बात करें तो पिछले वर्षों में बड़े पैमाने पर जंगल कटे हैं। कोरबा में हसदेव अरण्य तबाह होने जा रहा है। रायगढ़ जिले में भी कोयला खदानों, ताप विद्युत संयंत्रों और औद्योगिक परियोजनाओं का विस्तार हुआ है। जंगल कम होने से जमीन की नमी घट रही है। इसका नतीजा गर्म हवाओं का प्रकोप बढ़ जाना होता है। इधर तालाब, नदियां और छोटे जल स्रोत भी तो सिकुड़ते ही जा रहे हैं। शहरों में तेजी से बढ़ती कंक्रीट की इमारतों ने ‘हीट आइलैंड’ प्रभाव को बढ़ाया है। इसके चलते रायपुर जैसे शहरों का तापमान दुनिया के सर्वाधिक गर्म इलाकों में शामिल हो चुका है।
वैसे वन विभाग ने पाली क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई है। चमगादड़ों के बसेरे वाले पेड़ों पर और आसपास पानी का छिडक़ाव किया जा रहा है। पर ये अस्थायी और सीमित उपाय हैं। पर्यावरण विशेषज्ञ मानते हैं कि अस्थायी उपायों से काम नहीं चलेगा। बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण, जल स्रोतों का संरक्षण, बेतरतीब उद्योगों और अव्यावहारिक खनन पर नियंत्रण जरूरी है। शहरों में खाली पड़े जगहों पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण होना चाहिए। चमगादड़ों की सामूहिक आहूति हम इंसानों को संदेश दे रहा है कि प्रकृति से अधिक खिलवाड़ मत करिये। जंगल और पानी बचाकर रखिए, जैव विविधता की जरूरत को नजरअंदाज मत करिये। अभी तो लू से एक दो मौतों की ही खबर आई है, आज चमगादड़ ही गिर रहे हैं। हालात नहीं सुधरे तो इंसानों की बारी आने में देर नहीं लगेगी।


