राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : ‘बिहार दिवस’ पर चुप्पी
24-Mar-2026 4:15 PM
राजपथ-जनपथ : ‘बिहार दिवस’ पर चुप्पी

‘बिहार दिवस’ पर चुप्पी

इस साल 22 मार्च को बिहार दिवस प्रदेश में लगभग खामोशी के साथ गुजर गया। न कोई बड़ा आयोजन हुआ, न ही औपचारिक राजनीतिक सक्रियता दिखी। खासकर भाजपा ने इस बार दूरी बनाकर रखी, जबकि पिछले साल इसी मौके पर कार्यक्रम आयोजित किए गए थे, और उसी को लेकर विवाद भी खड़ा हुआ था।

दरअसल, पिछली बार बिहार दिवस मनाने के फैसले पर स्थानीय संगठनों, खासकर छत्तीसगढ़ क्रांति सेना ने कड़ा विरोध जताया था। उनका सीधा सवाल था—क्या बिहार में कभी छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस मनाया जाता है? इस बहस ने छत्तीसगढिय़ा बनाम बाहरी जैसे संवेदनशील मुद्दे को भी हवा दी।

सोशल मीडिया में भी भाजपा को आलोचना झेलनी पड़ी। यहां तक आरोप लगे कि यह आयोजन बिहार प्रभारी नितिन नबीन को खुश करने के लिए किया गया था।

असल वजह राजनीतिक थी। उस समय बिहार में विधानसभा चुनाव का माहौल था और भाजपा वहां सक्रिय प्रचार में जुटी थी। इसलिए छत्तीसगढ़ में भी ‘बिहार कनेक्ट’ दिखाने की कोशिश की गई।

अब हालात बदल चुके हैं—बिहार में चुनाव खत्म हो चुके हैं और भाजपा गठबंधन की सरकार बन चुकी है। ऐसे में इस बार कोई राजनीतिक आवश्यकता नहीं दिखी। साथ ही, पिछली बार जैसे विवाद की पुनरावृत्ति से बचने के लिए भी इस मुद्दे से दूरी बनाना ही बेहतर समझा गया।

‘एआई’ बना नया बचाव कवच..

अब सियासत में एक नया ट्रेंड तेजी से उभर रहा है—विवादित वीडियो और ऑडियो को ‘एआई जनरेटेड’  बताकर खारिज करना। हाल के घटनाक्रम इसे और स्पष्ट करते हैं।

पिछले दिनों रिकेश सेन का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वे कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते नजर आ रहे थे। बताया गया कि यह वीडियो भिलाई के एक मॉल का है और पुराना (क्रिसमस के समय का) है। वीडियो सामने आते ही उन्होंने तुरंत पुलिस अधीक्षक को शिकायत भेजते हुए इसे एआई से बनाया गया फर्जी वीडियो बताया और कार्रवाई की मांग की। फिलहाल पुलिस इसकी जांच में जुटी है।

मामला यहीं नहीं थमा। पिछले दिनों विधानसभा में भी इस पर चुटकी ली गई। जब रिकेश सेन सवाल पूछने खड़े हुए, तो पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वायरल वीडियो का जिक्र कर तंज कस दिया। रिकेश सेन ने जवाब में फिर यही कहा कि वीडियो एआई जनरेटेड है और इस पर एफआईआर दर्ज कराई जा रही है।

भूपेश बघेल ने पुराने एक और वीडियो का जिक्र छेड़ दिया, जो विधानसभा चुनाव से पहले सोशल मीडिया में खूब चर्चा में था। उस वीडियो में कथित तौर पर प्रेम प्रकाश पाण्डेय के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग दिखाया गया था। इस पर भी रिकेश सेन ने फर्जी और एआई से तैयार करार दिया।

यह ट्रेंड सिर्फ एक दल तक सीमित नहीं है। कुछ महीने पहले कांग्रेस की महिला विधायक शेषराज हरबंश का भी एक ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें रेत के अवैध खनन को लेकर कथित बातचीत सामने आई। हालांकि उन्होंने इसे एआई जनरेटेड बताने के बजाय सीधे तौर पर खारिज किया और अपनी संलिप्तता से इनकार किया। साफ है कि अब एआई सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुका है।

एक तरफ यह ‘फेक कंटेंट’ से बचाव का हथियार है तो दूसरी तरफ असली-नकली की पहचान करना बड़ी चुनौती बनती जा रही है।


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