राजपथ - जनपथ
पुलिस कमिश्नरी अब ऐसी...
आखिरकार राजधानी में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम पर मुहर लग गई। बुधवार को विधिवत अधिसूचना जारी कर दी गई। मगर कमिश्नरी का वैसा स्वरूप नहीं आ पाया, जैसा गृहमंत्री विजय शर्मा चाहते थे। कमिश्नर के अधिकारों को लेकर भी एक राय नहीं बन पाई थी।
मसलन, गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा था कि समूचे जिले को कमिश्नरी में शामिल किया जाएगा। मगर ऐसा नहीं हुआ। और तो और नवा रायपुर भी रायपुर कमिश्नरी के दायरे से बाहर रखा गया है। 12 थानों को मिलाकर नया रायपुर ग्रामीण पुलिस जिला बनाया गया है। यह अकेला पुलिस जिला होगा। राज्य बनने के बाद बीजापुर, नारायणपुर, और बलरामपुर पुलिस जिला थे। बाद में मानपुर-मोहला को भी पुलिस जिला बनाया गया था। बाद में ये सभी राजस्व जिला बन गए।
पुलिस कमिश्नर के अधिकारों को लेकर चर्चा हो रही है। कमिश्नर को नौ अधिकार दिए गए हैं। चर्चा है कि आबकारी और नगरीय प्रशासन व जमीन से जुड़े कुछ अधिकार भी देने की अनुशंसा की गई थी। मगर तीनों विभाग के मंत्री प्रस्ताव से सहमत नहीं थे। पुलिस कमिश्नरी सिस्टम को ओडिशा, और महाराष्ट्र की तरह पॉवरफुल बनाने का प्रस्ताव था।
यह भी तर्क दिया गया था कि देश के 75 से अधिक शहरों में पुलिस कमिश्नरी लागू है। इनमें से 20-25 शहरों की आबादी तो रायपुर से कम है। ऐसे में यहां पॉवरफुल सिस्टम लागू करने पर जोर दिया गया था। मगर ऐसा नहीं हो पाया। यह जरूर कहा गया कि जरूरत पड़ी, तो आने वाले समय में पुलिस कमिश्नरों के अधिकारों में बढ़ोतरी की जाएगी। सीमित अधिकारों के बीच पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू तो हो गई है। देखना है कि कमिश्नरी सिस्टम के बाद रायपुर पुलिस की कार्यप्रणाली में क्या बदलाव आता है।
पहली बार मंडल अध्यक्ष
कांग्रेस में पहली बार मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है। संगठन में पहली बार मंडल कांग्रेस कमेटी का गठन किया गया। पहली बार गठित कमेटी के अध्यक्षों की सूची को लेकर भी विवाद शुरू हो गया है। गरियाबंद जिले के इंद्रागांव मंडल अध्यक्ष पद पर रूपेन्द्र सोम की नियुक्ति कर दी गई। रूपेन्द्र की मृत्यु 6 माह पहले हो चुकी है।
मंडल अध्यक्षों की सूची जारी हुई, तो कई विवाद सामने आ रहे हैं। पहले भी महिला कांग्रेस से निष्कासित नेत्री को राष्ट्रीय पदाधिकारी बना दिया गया है। यह विवाद अब तक नहीं सुलझा है। महिला कांग्रेस की नेत्रियों ने इसकी शिकायत पार्टी हाईकमान से की है। हालांकि इस तरह की परम्परा कांग्रेस में पहले से चली आ रही है।
अविभाजित मध्यप्रदेश में पंचायत चुनाव दलीय आधार पर कराने की प्रक्रिया चल रही थी। उस समय कांग्रेस से महासमुंद से एक ऐसे नेता को प्रत्याशी बनाने की अनुशंसा कर दी गई थी। जिसकी मृत्यु काफी पहले हो चुकी थी। मृतक, कांग्रेस के बड़े नेता श्यामाचरण शुक्ल के समर्थकों में गिने जाते थे। ये अलग बात है कि चुनाव स्थगित हो गया, और विवाद समाप्त हो गया।
पुलिस महकमे में चयनात्मक कार्रवाई
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) राजेन्द्र प्रसाद जायसवाल को सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो क्लिप के आधार पर निलंबित किया गया है, जिसमें कथित तौर पर उनको बिलासपुर के एक स्पा सेंटर के संचालक को रेड मारने की धमकी देते पाया गया है। डिप्टी सीएम और गृह मंत्री विजय शर्मा का बयान आया और महकमे में हडक़ंप मच गया, कुछ घंटों के भीतर ही जायसवाल नप गए। जायसवाल को जांच का सामना करना पड़ेगा। वे अपनी सफाई में कुछ बोलेंगे, लिखेंगे- दस्तावेज देंगे। उन पर आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के बाद होगी, मगर फिलहाल निलंबन की सजा तो मिल ही गई है।
छत्तीसगढ़ की एक महिला डीएसपी कल्पना वर्मा पर भी एक कारोबारी दीपक टंडन ने कई आरोप लगाए हैं। कारोबारी का दावा है कि सन् 2021 से लेकर अब तक उसने वर्मा को 2 करोड़ रुपये नकद, 50 लाख की डायमंड रिंग, एक लग्जरी कार और अन्य महंगे उपहार लिए। जब उन्होंने और पैसे देने से इनकार किया, तो वर्मा ने झूठे केस में फंसाने की धमकी दी। टंडन ने व्हाट्सएप चैट्स, सीसीटीवी फुटेज और दस्तावेजों को सबूत के रूप में पेश किया है। आरोप तो कई संवेदनशील सूचनाएं लीक करने का भी है। वर्मा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ये राजनीतिक साजिश हैं और उन्होंने मानहानि का केस दर्ज करने की धमकी भी दी है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।
नवीनतम अपडेट में रायपुर आईजी की लगभग 1400 पेज की जांच रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपी गई है। रिपोर्ट में कथित तौर पर दावा किया गया है कि वर्मा ने न केवल पैसे और उपहार लिए, बल्कि नक्सल ऑपरेशन से जुड़ी गोपनीय जानकारी भी टंडन के साथ शेयर की। व्हाट्सएप चैट्स में तीन आईपीएस अधिकारियों के नाम भी हैं।
दोनों ही मामलों में अभी सिर्फ आरोप हैं। जब तक ये सिद्ध नहीं होते, जांच की रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं होती किसी भी अफसर को कदाचरण का आरोपी नहीं माना जा सकता। पर, शिकायत आते ही निलंबन का एक्शन इसलिए लिया जाता है ताकि अधिकारी अपने पद और दफ्तर में रहते हुए जांच को प्रभावित न करे। याद होगा, टंडन की शिकायत जैसे ही मीडिया में आई, कुछ दिन बाद उसे एक दूसरे मामले में फरार बताते हुए गिरफ्तार कर लिया गया था।
जायसवाल को कोई सही नहीं ठहरा रहा है। आम धारणा बनी हुई है कि पुलिस अपने इलाके में संदिग्ध काम धंधे वालों से ऐसी वसूली करती रहती है। हफ्ते-महीने के हिसाब से हिस्सा पहुंचा दिया जाता है। पर वर्मा के खिलाफ समान या उससे गंभीर आरोप होने के बावजूद दी गई सहूलियत को लेकर सवाल किए जा रहे हैं।
सरगुजा जैसा कचरा कैफे
छत्तीसगढ़ में अंबिकापुर ऐसी जगह है जहां सबसे पहले कचरे को बोझ नहीं बल्कि संसाधन के रूप में देखा गया। अपनी श्रेणी में देश के सबसे स्वच्छ शहरों में गिना जा चुका अंबिकापुर नगर निगम में जब कचरा एकत्र करके लाने के बदले भोजन या नाश्ता देने की पहल की तो लोगों ने इसे विस्मय की नजर से देखा। पर यह अवधारणा अब भोपाल जैसे बड़े शहरों में भी अपनाई जा रही है। भोपाल में 10 नंबर मार्केट और बोट क्लब जैसे प्रमुख स्थानों पर कचरा कैफे की शुरुआत की गई है। यहां लोग प्लास्टिक बोतल, कागज या बेकार इलेक्ट्रॉनिक सामान लाकर बदले में छोले-चावल, राशन सामग्री या डिजिटल कूपन प्राप्त कर सकते हैं। खास बात यह है कि लोगों को कचरा लाने के लिए बाजार से बेहतर दर दी जा रही है। जैसे प्लास्टिक कचरे के लिए सामान्य तौर पर जहां 15 रुपये प्रति किलो मिलते हैं, वहीं कचरा कैफे में 20 रुपये प्रति किलो का मूल्य तय किया गया है।
कचरा कैफे स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और भूखमरी, तीनों समस्याओं पर एक साथ प्रभावी समाधान लगता है। अंबिकापुर के इस प्रयोग को छत्तीसगढ़ के किसी और शहर में तो अपनाया गया नहीं लेकिन मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल ने जरूर इससे प्रेरणा ली है।


