राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : निर्गुण भक्ति के सच्चे पुजारी
18-Dec-2025 5:50 PM
राजपथ-जनपथ : निर्गुण भक्ति के सच्चे पुजारी

निर्गुण भक्ति के सच्चे पुजारी

बाबा गुरु घासीदास सत्य की खोज में थे। एक बार वे अपने भाई के साथ ओडिशा के जगन्नाथ पुरी, तीर्थ यात्रा पर जा रहे थे। रास्ते में सारंगढ़ के घने जंगलों में उन्हें कुछ अलग ही अनुभव हुआ। उन्हें एहसास हुआ कि सच्चा ईश्वर मंदिरों या तीर्थों में नहीं, बल्कि मनुष्य के हृदय में बसता है। वे यात्रा छोडक़र वापस लौट आए और जंगलों में कठोर तपस्या शुरू कर दी। इसी तप से उन्हें सतनाम का बोध हुआ। बाबा ने सिद्धांत अपनाया मूर्ति या मंदिर नहीं, सिर्फ सत्य का नाम ही उनका देवता है।

गिरौदपुरी धाम से लेकर, आज छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में संत शिरोमणि कहे जाने वाले गुरु घासीदास की 269वीं जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है। मनखे-मनखे एक समान का नारा उनका ही दिया हुआ है। हर राजनीतिक दल इसे अपनाने की बात करता है, पर जमीन पर गुरु घासीदास के सिद्धांतों को अपनाते हुए कोई नहीं दिखता। बाबा जातिवाद, मूर्तिपूजा और कुरीतियों के सख्त खिलाफ थे। मगर आज राजनीतिक विकृति के तौर पर यह मौजूद है।  

बाबा की कई कहानियां हैं ,जो चलन में कैसे आई- कह नहीं सकते। इनकी सच्चाई को भी आज नहीं परखा जा सकता। जैसे, एक प्रसिद्ध कहानी है कि बाबा बिना किसी सहारे के हवा में ही गीले कपड़े सुखा देते थे। लोग हैरान होकर देखते कि कपड़े हवा में तने रहते और सूख जाते। कई कथाएं किताबों में हैं कि उन्होंने मृतकों को जीवित किया। अपनी पत्नी सफुरा माता और पुत्र को भी पुनर्जन्म दिया।

ये कहानियां लोक मान्यताओं से अधिक नहीं हो सकती लेकिन उनके सात सिद्धांत आज के वक्त में अधिक प्रासंगिक हैं। उनका कहना था कि निर्गुण ईश्वर ही एकमात्र सत्य है। ईश्वर निराकार है, मूर्तियों या प्रतिमाओं की पूजा न करें। सभी मनुष्य जन्म से समान हैं। मनखे-मनखे एक समान का सिद्धांत अपनाओ, जातिवाद और छुआछूत का त्याग करो। मांसाहार और किसी भी जीव की हत्या से दूर रहो। पशुओं पर दया करो। गुरु घासीदास पशुओं की पीड़ा को बहुत गहराई से समझते थे। वे कहते थे कि दोपहर में खेत की जुताई मत करो, वरना बैलों को बहुत तकलीफ होगी। उन्होंने कहा कि शराब, तंबाकू या किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहो। व्यभिचार या परस्त्रीगमन से दूर रहो। महिलाओं का सम्मान करो और नैतिकता बनाए रखो। ईमानदारी से जीवन यापन करो। चोरी, जुआ या किसी भी अनैतिक कार्य से बचो।

छत्तीसगढ़ में सतनाम अनुयायियों की संख्या 14 प्रतिशत से अधिक है। राजनीतिक रूप से यह बेहद प्रभावशाली है। जो सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नहीं हैं, वहां भी प्रभाव है। कैबिनेट में  गुरु घासीदास की पीढ़ी के एक सदस्य धर्मगुरु बाल दास के बेटे गुरु खुशवंत सिंह को भी लिया गया है। मगर आप कभी नहीं पाएंगे कि गुरु घासीदास के सिद्धांतों को अपनाने के लिए वे प्रदेश में कोई आंदोलन चला रहे हों। छत्तीसगढ़ में एक आंदोलन लखन पाटले चला रहे हैं जो कहते हैं कि केवल वंशज होने के कारण किसी को धर्मगुरु का दर्जा नहीं मिलना चाहिए। उसे मिले जो जीव हत्या और नशा न करे, मांसाहार त्यागे और इसी तरह के गुरु घासीदास के बाकी सिद्धांतों का पालन करे।

दोनों में आएँगे नए प्रभारी?

नए साल में भाजपा और कांग्रेस, दोनों में ही नए प्रभारी की नियुक्ति हो सकती है। प्रदेश भाजपा के प्रभारी नितिन नबीन, पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बन गए हैं। स्वाभाविक है कि उन्हें प्रदेश भाजपा का प्रभार छोडऩा पड़ेगा।

अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस महीने के आखिरी अथवा जनवरी के पहले पखवाड़े में नए प्रभारी की नियुक्ति हो सकती है। कुछ ऐसा ही कांग्रेस में भी है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रभारी सचिन पायलट ने प्रभारी के दायित्व से मुक्त होने की मंशा जता दी है।

चर्चा है कि पायलट ने कुछ दिन पहले दोबारा हाईकमान को अपनी भावनाओं से अवगत कराया है। वो पूरा समय राजस्थान में देना चाहते हैं। पायलट पहले भी छत्तीसगढ़ में काम करने के अनिच्छुक रहे हैं। चर्चा है कि पायलट की जगह जल्द ही नए प्रभारी की नियुक्ति हो सकती है।

इनको बनाया किसने था?

राजनीतिक दलों में कई नियुक्तियां ऐसी हो जाती है जिससे पार्टी संगठन पशोपेश में पड़ जाता है, और सफाई देते नहीं बनता है। कुछ ऐसी ही नियुक्ति भाजपा में हो गई। भाजपा पदाधिकारियों की सूची जारी हुई, तो रायपुर एससी महिला मोर्चा की अध्यक्ष पद पर सावित्री जगत की नियुक्ति कर दी गई। थोड़ी देर बाद पार्टी ने प्रेसनोट जारी किया, और स्पष्ट किया कि सावित्री जगत की नियुक्ति आदेश त्रुटिपूर्ण है। नई नियुक्ति जल्द की जाएगी।

दरअसल, सावित्री की नियुक्ति आदेश जारी होने के बाद से पार्टी के अंदरखाने में काफी तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। सावित्री पार्टी से बगावत कर विधानसभा चुनाव में रायपुर उत्तर सीट से निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गई थी। वो बमुश्किल डेढ़ हजार वोट ही हासिल कर पाई। उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया। मगर नगरीय निकाय चुनाव के ठीक पहले पार्टी में वापिसी हो गई। पार्षद टिकट नहीं मिली तो वो फिर बगावत कर निर्दलीय खड़ी हो गई। सावित्री को बुरी हार का सामना करना पड़ा। बावजूद इसके कुछ समय बाद उन्हें फिर पार्टी में ले लिया गया। और जब जिलाध्यक्ष बनाया गया, तो पार्टी के अंदरखाने में काफी बवाल मचा। आनन-फानन में नियुक्ति त्रुटिपूर्ण बताकर निरस्त किया गया।

अब पार्टी के भीतर इस बात की जांच हो रही है कि सावित्री जगत को अध्यक्ष बनाने की सिफारिश किसने की थी।

कुछ ऐसा ही वाक्या कांग्रेस में भी हुआ। ड्रग्स-पिस्तौल के साथ पकड़ाए युवक कांग्रेस के प्रदेश सचिव राहुल ठाकुर को लेकर पार्टी ने सफाई दी कि उनका कांग्रेस से कोई नाता नहीं है। उन्हें 12 अक्टूबर को ही पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। बैक डेट से जारी निष्कासन लेटर में यह बताया गया कि निष्क्रियता की वजह से राहुल ठाकुर को निष्कासित किया गया है।

हड़बड़ी में जारी निष्कासन लेटर पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि युवक कांग्रेस के इतिहास का ये पहला उदाहरण है, जब निष्क्रियता के आधार पर किसी का निष्कासन किया गया है। न सिर्फ युवक कांग्रेस बल्कि अन्य संगठन में निष्कासन सिर्फ इसलिए नहीं होता कि वो पार्टी में ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। दरअसल, पार्टी ने बदनामी से बचने के लिए राहुल ठाकुर को निष्कासित किया है। ये अलग बात है कि निष्कासन के कारण किसी के गले नहीं उतर रही है।

जरूरत से ज़्यादा सहूलियत

नवा रायपुर के नए विधानसभा भवन में तीन दिन का शीतकालीन सत्र बुधवार को निपट गया। नए विधानसभा भवन में पहला सत्र था। करीब 51 एकड़ में फैले भव्य विधानसभा भवन को लेकर विधायकों, और आम लोगों में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सुनने को मिली। चर्चा है कि अधिकतर विधायक भी नए भवन से संतुष्ट नहीं हैं। ऐसा नहीं है कि विधानसभा भवन में सुविधाओं की कोई कमी है, बल्कि यह अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है।

विधायकों का तर्क था कि यह इतना बड़ा है कि एक जगह से दूसरे जगह जाना काफी थकाऊ है। सदन को दो सौ सदस्यों के लायक तैयार किया गया है, मगर वर्तमान में 90 सदस्य हैं। कुल मिलाकर आपस में चर्चा के दौरान सत्ता और विपक्ष के कई विधायक यह कहते सुने गए कि पुराना विधानसभा बेहतर था।

विधानसभा सचिवालय के अफसर-कर्मियों के लिए भव्य कमरा है। विधानसभा के जनसंपर्क अधिकारी का कक्ष, चीफ सेक्रेटरी के कक्ष से बड़ा है। एक ब्लॉक से दूसरे ब्लॉक में जाने में काफी मुश्किल होती है। यहां रखरखाव के लिए भी पुराने विधानसभा के मुकाबले दोगुने से अधिक खर्च होने का अनुमान है। हालांकि यह सौ साल की आगामी जरूरतों को देखकर बनाया गया है, लेकिन फिर भी पुराने विधानसभा का मोह नहीं छूट पा रहा है।


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