राजपथ - जनपथ
बदहाल अंबिकापुर
पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने कुछ महीने पहले कांग्रेस के एक कार्यक्रम में माना था कि अंबिकापुर नगर निगम को विकास कार्यों के मद में पर्याप्त राशि नहीं मिली, और इसका विधानसभा चुनाव में नुकसान उठाना पड़ा।
प्रदेश की एकमात्र आदिवासी आरक्षित अंबिकापुर नगर निगम अब कांग्रेस के हाथ से निकल चुकी है। दस साल बाद यहां भाजपा काबिज हो गई। ऐसे में यहां सरकार से विकास कार्यों के मद में मदद की उम्मीद थी। सडक़ों की दुर्दशा है। यहां के स्थानीय नेता यहां की मूलभूत समस्याओं के निराकरण के लिए पार्टी संगठन तक गुहार लगा चुके हैं। मगर स्थिति में परिवर्तन नहीं आया है। सरकार ने नगरोत्थान योजना के मद में निगमों को विकास कार्यों के मद में राशि जारी की है, इसमें अंबिकापुर को 13 करोड़ रुपए आबंटित किए गए हैं। जबकि अंबिकापुर से ज्यादा चिरमिरी, भिलाई-चरौदा, और बीरगांव जैसे निगमों को मिला है।
बाकी निगमों के पास विकास के लिए डीएमएफ, और कई अन्य फंड भी हैं। इस मामले में अंबिकापुर काफी पीछे है। हाल यह है कि पिछले नगर निगम के पार्षदों को दो साल का मानदेय नहीं मिला है। ये सभी पार्षद अब पूर्व हो चुके हैं, और वो अपना बकाया मानदेय के लिए स्थानीय विधायक, और सरकार के मंत्री राजेश अग्रवाल से मुलाकात भी की थी। मगर उन्हें अब तक बकाया मानदेय नहीं मिला है। खास बात यह है कि प्रदेश के बाकी निकायों में ऐसी नौबत नहीं आई। अब कांग्रेस यहां जल्द ही आंदोलन छेडऩे की तैयारी कर रही है।
पीएम अवार्ड और छत्तीसगढ़
पांच माह बाद आगामी 21 अप्रैल, 2026 को सिविल सर्विसेज डे के मौके पर प्राइम मिनिस्टर अवार्ड दिए जाएंगे। ये सालाना दिए जाते हैं। ये अवॉर्ड देश भर के सिविल सेवक द्वारा प्रदेश या जिले में किए गए बेहतरीन काम को पुरस्कृत करने के लिए बनाए गए हैं। रजिस्ट्रेशन और नॉमिनेशन जमा करने एक पोर्टल इस साल 1 अक्टूबर को लॉन्च किया गया था, और एंट्रियां 30 नवंबर तक ली गई। इनमें छत्तीसगढ़ से भी आठ अफसरों ने भी अपनी कामयाबी को जमा किया है। इनमें जिला कलेक्टरों के अलावा दो सचिव स्तर के अफसरों ने भी जमा किया है। अब इनमें से कौन पीएम अवार्ड पाता है यह तो उसी दिन पता चलेगा। पिछले वर्ष छत्तीसगढ़ के दो आईएएस अफसरों को यह अवार्ड मिल चुका है। इनमें से एक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर है।
पर्सनल मिनिस्ट्री की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में एक्सीलेंस के लिए प्राइम मिनिस्टर अवार्ड्स के लिए 2035 नॉमिनेशन मिले हैं। अवार्ड्स में एक ट्रॉफी, एक स्क्रॉल और 20 लाख रुपये का इंसेंटिव होगा, जिसे उस डिस्ट्रिक्ट या ऑर्गनाइजेशन को दिया जाएगा जिसका इस्तेमाल किसी प्रोजेक्ट या प्रोग्राम को लागू करने या पब्लिक वेलफेयर के किसी भी एरिया में रिसोर्स की कमी को पूरा करने के लिए किया जाएगा।
महाराष्ट्र डीजीपी का छत्तीसगढ़ से रिश्ता

एनआईए के डीजी सदानंद दाते को महाराष्ट्र का डीजीपी नियुक्त किया गया है। आईपीएस के 91 बैच के अफसर सदानंद दाते का छत्तीसगढ़ से नाता रहा है। दाते बस्तर में सीआरपीएफ के आईजी रह चुके हैं, और उन्होंने नक्सल फ्रंट पर काफी बेहतर काम किया। वो मुंबई में 26/11 हमले के दौरान आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई में प्रमुख भूमिका निभाई थी।
दाते की यहां पोस्टिंग से पहले छत्तीसगढ़ पुलिस, और सुरक्षाबलों के बीच तालमेल अच्छा नहीं रहा। यह भी शिकायतें रही कि नक्सलियों के खिलाफ अभियान में सीआरपीएफ से अपेक्षित मदद नहीं मिल पाती है। मगर सदानंद दाते के यहां आने के बाद राज्य पुलिस के साथ मिलकर काम किया, और नक्सल फ्रंट पर उनके काम की काफी सराहना भी हुई। अब जब महाराष्ट्र के डीजीपी बने हैं, तो यहां उनके बेहतर कामों को याद किया जा रहा है।
मंत्रियों के बंगले बने रजवाड़े

छत्तीसगढ़ के रजत जयंती वर्ष में राजनीतिक गलियारों में बैठो तो एक न एक पुराने किस्से नेता सुना ही देते हैं। एक कांग्रेस नेता ने एक ऐसा ही वाकया बताया- जब राज्य बना और महेंद्र कर्मा मंत्री बने तब वे वित्त मंत्री सिंहदेव के पास पहुंचे और दो चीजें मांगी पहला गाड़ी और दूसरा प्यून। अजीत जोगी ने पहले ही ऐलान कर रखा था कि स्थापना व्यय 30 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होने दिया जाएगा।
सिंहदेव ने महेंद्र कर्मा की बातें सुनी और उठकर खड़े हुए और पीछे टेबल पर रखी फाइल उठाकर लाने लगे और कहा कि प्यून इतना ही काम करेगा। फाइल टेबल तक लाएगा, ये काम मैं खुद कर लेता हूं। हां गाड़ी की व्यवस्था धीरे धीरे कर लेंगे। अब जब राज्य के 25 साल पूरे हो गए हैं तक मंत्रियों के बंगलों को देखकर लगता है कि वे किसी राजा रजवाड़े ये कम नहीं हैं।
बताते हैं कि एक से पांच एकड़ में बने मंत्रियों के बंगलों में केवल गार्डन को मेन्टेन करने दस से पंद्रह लोग लगते हैं। सरकार में तेरह मंत्री हैं सो उनके विभाग के अधिकारी इतने कर्मचारी लगाने के लिए परेशान हैं। आउटसोर्सिंग से इनकी कमी पूरी की जा रही है फिर भी मंत्रियों को गार्डन की रौनक में कमी दिख रही है।


