राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : कुत्ता पकड़वाएंगे प्रिंसिपल साहब....!
21-Nov-2025 6:46 PM
	 राजपथ-जनपथ : कुत्ता पकड़वाएंगे प्रिंसिपल साहब....!

कुत्ता पकड़वाएंगे प्रिंसिपल साहब....!

देशभर में आवारा कुत्तों को लेकर एक बहस छिड़ी हुई है। सडक़ पर आवारा कुत्तों  के प्रति कुत्ताप्रेमियों की हमदर्दी एकतरफ और आवारा कुत्तों के जुल्म के सताए बच्चे-नौजवान दूसरी तरफ। इस बहस से परे सरकारों के सामने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करवाने की जिम्मेदारी तो है ही। बता दें कि बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल, कॉलेज और सार्वजनिक जगहों के आसपास से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया है।

हमने राजपथ में कुछ दिन पहले आपको छत्तीसगढ़ की बैकुण्ठपुर नगर पालिका के एक आदेश के बारे में बताया था, जिसके मुताबिक सडक़ पर आवारा कुत्तों को कुछ भी खिलाने पर जुर्माने का प्रावधान रखा गया। इसके पीछे मकसद ये कि कम से कम खाने के लालच में तो सडक़ों पर कुत्तों का जमावड़ा नहीं लगेगा।

अब एक और नया आदेश आया है, जो पूरे प्रदेश के लिए है। लोक शिक्षक संचालनालय ने स्कूल के आसपास आवारा कुत्तों को हटाने के लिए सभी स्कूल प्रिंसिपलों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। इनकी जिम्मेदारी तय की गई है कि ये अपने स्कूल के पास जहां भी कुत्ते देखेंगे तुरंत संबंधित नगर निगम, पालिका, जनपद, या पंचायत के डॉग कैचर को सूचना देंगे। हालांकि शालेय शिक्षक संघ ने इस फैसले को अव्यवहारिक और अनुचित बताया है, उनका कहना है कि ये काम स्थानीय प्रशासन को करना चाहिए, शिक्षकों पर पहले ही काम का इतना बोझ है, स्ढ्ढक्र का काम भी सर पर है और अब कुत्तों की निगरानी का काम ज्यादती न हो जाए...!

एक दिन का सत्र, कई तरह की चर्चा

विधानसभा के रजत जयंती पर एक दिन का विशेष सत्र हुआ। पुराने भवन में यह आखिरी सत्र था। शीतकालीन सत्र अब विधानसभा के नए भवन में होगा। सत्र के दौरान कई सीनियर सदस्य अध्यक्षीय दीर्घा में मौजूद थे। खुद स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने उन्हें आमंत्रित किया था। इनमें सांसद बृजमोहन अग्रवाल, पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव, पूर्व मंत्री रविन्द्र चौबे, और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल थे।

सदन में पक्ष-विपक्ष के सदस्यों ने अपनी पुरानी यादें साझा की। हल्ला है कि एक पूर्व विधानसभा सदस्य, जो कि लंबे समय तक सदन की सदस्य रहे हैं, वो सदन को संबोधित करना चाह रहे थे। स्पीकर तक उन्होंने अपनी बात पहुंचाई भी। मगर पूर्व में कभी इस तरह की अनुमति नहीं दी गई थी, लिहाजा, उन्हें मना कर दिया गया। इससे परे पूर्व मंत्री कवासी लखमा की गैरमौजूदगी विशेषकर विपक्षी सदस्यों को खल गई।

लखमा, आबकारी घोटाला केस में जेल में हैं। कांग्रेस विधायक दल के सचेतक लखेश्वर बघेल ने कहा कि लखमा राज्य बनने के पहले से लगातार विधानसभा के सदस्य हैं। इसलिए उन्हें सदन की कार्रवाई मेें हिस्सा लेने की अनुमति दी जानी चाहिए थी। लोकसभा और राज्यसभा में भी जेल में बंद सदस्यों को सदन की कार्रवाई में हिस्सा लेने की अनुमति दी जाती है। चर्चा है कि खुद कवासी सदन की कार्रवाई में हिस्सा लेने के बजाए आंखों के इलाज के लिए अंबेडकर अस्पताल में भर्ती होना चाह रहे थे जो कि उन्हें मिल गई थी। और इलाज कराकर वापस जेल चले गए। कुल मिलाकर एक दिन यह सत्र कई मामलों में चर्चा का विषय रहा है।

बिहार से लौटा लश्कर, बंगाल कूच

बिहार के बाद भाजपा पश्चिम बंगाल चुनाव तैयारियों में जुट गई है। छत्तीसगढ़ भाजपा के महामंत्री (संगठन) पवन साय को बंगाल की 45 विधानसभा सीटों का प्रभारी बनाया गया है। साय पिछले दिनों कोलकाता में जाकर स्थानीय प्रमुख नेताओं के साथ बैठक कर चुके हैं।

बताते हैं कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पदाधिकारियों की ड्यूटी लगाई जा रही है। सौ से अधिक नेताओं को प्रचार के लिए वहां भेजा जा सकता है। भाजपा के क्षेत्रीय महामंत्री (संगठन) अजय जम्वाल बंगाल में पहले भी काम कर चुके हैं। लिहाजा, वो यहां प्रदेश के नेताओं को टिप्स भी दे रहे हैं। सरकार के एक मंत्री भी पिछले दिनों बंगाल का दौरा कर आ चुके हैं। इन सबको देखते हुए प्रदेश कार्यकारिणी, और निगम मंडलों में नियुक्तियां जल्द होने के संकेत हैं। देखना है आगे क्या होता है।

यूनेस्को सूची के लिए सिरपुर में नई कोशिशें

हजारों साल पुराने पुरातात्विक अवशेष, अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य और प्राचीन लोक संस्कृति का प्रतिनिधित्व होने के बावजूद राज्य का एक भी स्थल यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल नहीं है। विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के लिए किसी भी स्थल को पहले अस्थायी सूची में आना जरूरी है। कांगेर घाटी ने इस पहली बाधा को पार कर लिया है, लेकिन बीते कई वर्षों से चल रही कोशिशों के बाद भी सिरपुर अस्थायी तौर पर भी सूची में शामिल नहीं हो सका है।

महासमुंद जिले में महानदी के किनारे स्थित सिरपुर 6वीं से 8वीं शताब्दी में एक बड़ा बौद्ध-हिंदू केंद्र था। चीनी यात्री ह्वेन त्सांग ने सिरपुर को 100 विहार और 150 मंदिरों वाले समृद्ध स्थल के रूप में दर्ज किया था। यहां का भ्रमण करने पर इनमें से कुछ का ही दर्शन किया जा सकता है। जाहिर है कि इसकी मिट्टी के नीचे अनगिनत कहानियां छिपी हो सकती हैं।

इसे विश्व धरोहर में नामांकित करने की कोशिश इसी महीने फिर शुरू हुई। एएसआई और साडा की टीम ने यहां का निरीक्षण कर 34 खास जगहों का चिन्हांकित किया और उन्हें 4 कलस्टरों में बांटने की योजना बनाई है। यूनेस्को के मानक में फिट बैठ सके, इसके लिए कुछ आधुनिक सुविधाएं पर्यटकों के लिए उपलब्ध कराने की योजना है। जैसे अधिक सुगम पैदल मार्ग, बैटरी गाडिय़ां, ब्रेल साइनेट और नए गाइड सेंटर। 

यूनेस्को में नामांकन केंद्र सरकार की ओर से ही जाता है। केंद्र हर वर्ष केवल 2-3 नामांकन ही भेजता है, जिनमें अन्य राज्यों के आवेदन भी शामिल होते हैं। प्रतिस्पर्धा राष्ट्रीय स्तर पर होनी है। देश की ओर से प्रस्ताव जाएगा, तब यूनेस्को में विचार होगा। वैसे कांगेर घाटी को अस्थायी सूची में शामिल हो जाने से यह तो समझा जा सकता है कि वैश्विक स्तर के दस्तावेज कैसे तैयार करे और कौन सी प्रक्रिया अपनाई जाए- इसकी मोटी जानकारी अपने राज्य के अफसरों को है। मगर, अभी तक सिरपुर का वैज्ञानिक दस्तावेज, तुलनात्मक अध्ययन और संरक्षण की योजना पूरी तरह तैयार नहीं है। इसे राज्य सरकार को एएसआई की मदद से तैयार करना है। कई हिस्सों में यहां खनन अधूरा पड़ा है, जिसे आगे बढ़ाने के लिए शायद फंड नहीं मिल रहा है। अगर सिरपुर का डोजियर अगले एक-दो साल में तैयार हो गया, तो 3–5 साल में इसे अस्थायी सूची में जगह मिल सकती है। सिरपुर में विश्व धरोहर बनने की क्षमता तो है, मगर- वर्षों से प्रयास के बावजूद अब तक सफलता नहीं मिली है।

हे राम...!

छत्तीसगढ़ में लंबे वक्त तक संस्कृति और धर्मस्व मंत्री रहे, बीजेपी के सीनियर मोस्ट नेता बृजमोहन अग्रवाल ने राज्य सरकार को चि_ी लिखकर बताया है कि इस वक्त एक बात को लेकर सनातनियों में असंतोष और निराशा व्यापत है। बात प्रभु राम की मूर्ति से जुड़ी है। भूपेश सरकार में पूरे प्रदेश में अलग-अलग जगहों श्रीराम की आदमकद प्रतिमा लगाने का सिलसिला शुरू हुआ। सबसे पहली प्रतिमा चंदखुरी में लगी। उस प्रतिमा के रंग-ढंग पर आम जनता समेत उस वक्त विपक्ष में बैठी बीजेपी ने खूब टिप्पणी की, और कहा कि कांग्रेस सरकार ने प्रभु राम का अपमान किया। राज्य में हाल की बीजेपी सरकार बनने के पहले तक समय-समय पर मांग होती रही कि रामजी की इस प्रतिमा को बदलकर नई मूर्ति लगाई जाए।

2023 में बीजेपी सरकार बनी, और मूर्ति बनने का ऑर्डर हो गया। मध्यप्रदेश के एक मूर्तिकार ने बड़ी मेहनत से रामजी की बड़ी सुंदर प्रतिमा तैयार की। प्रतिमा का निर्माण ग्वालियर सेंड स्टोन आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर में किया गया, पांच महीने पहले प्रतिमा पूरी तरह तैयार हो चुकी थी, और चंद्रखुरी में स्थापना का इंतजार था। कई अखबारों और मीडिया में मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा का ये बयान है कि छत्तीसगढ़ के ठेकेदार ने केवल 10 लाख रुपए का अग्रिम भुगतान दिया था, जबकि करीब 70 लाख रुपए का बकाया अब तक नहीं मिला है। लगातार बढ़ते दबाव और भुगतान न मिलने के कारण प्रतिमा को बेचने व दूसरी जगह स्थापित करने का निर्णय लेना पड़ा। भगवान श्रीराम के वनवासी स्वरूप की 51 फीट ऊंची प्रतिमा अब मुरैना जिले के एंती पर्वत स्थित शनिधाम में स्थापित की जाएगी।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को चि_ी लिखकर ये याद दिलाया है कि दो साल बीतने के बाद भी भगवान राम की नई मूर्ति के स्थापना की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। उन्होंने लिखा है कि विभागीय उदासीनता के चलते नवनिर्मित मूर्ति को दूसरे राज्य में स्थापित करने की स्थिति बन गई है, जिससे सनातन धर्मावलंबियों और प्रदेशवासियों में असंतोष और निराशा व्याप्त है। उन्होंने 3 महीने में मूर्ति स्थापित करने की मांग की है।


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