राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : जिला अध्यक्ष, और पोलखोल
08-Oct-2025 6:43 PM
राजपथ-जनपथ : जिला अध्यक्ष, और पोलखोल

जिला अध्यक्ष, और पोलखोल

कांग्रेस में जिला अध्यक्षों के चयन के लिए जिलों में रायशुमारी चल रही है। एक-दो जगहों पर दावेदारों ने एक- दूसरे की पोल खोलना शुरू कर दिया है।

एक जिले में तो मजबूत दावेदार की दावेदारी को कमजोर करने के लिए उनके विरोधियों ने केन्द्रीय पर्यवेक्षक को ऑडियो सीडी भी सौंप दी। दरअसल, दावेदार को कांग्रेस सरकार में अहम पद मिला था,उस वक्त कुछ उल्टे-सीधे काम भी हुए। उस समय के ऑडियो भी बना था, जो अब जाकर निकला है। पर्यवेक्षक भी दावेदारों के बीच चल रहे शीत युद्ध से परेशान नजर आ रहे हैं।

केन्द्रीय और प्रदेश के पर्यवेक्षकों को जिलों में स्थानीय नेताओं की मेहमान नवाजी से परहेज़ करने की सलाह दी थी। मगर प्रदेश के एक पर्यवेक्षक प्रवास के दौरान रात्रि विश्राम के लिए एक विधायक के फार्म हाउस में चले गए। विधायक के फार्म हाउस की इलाके में खूबसूरती की काफी चर्चा है। वहां चायनीज फर्नीचर और जिम आदि अत्याधुनिक सुविधा है। युवा पर्यवेक्षक को विधायक ने अपने फार्म हाऊस में आमंत्रित किया, तो वो इंकार नहीं कर सके। ये अलग बात है कि इसकी शिकायत पार्टी हाईकमान को भी भेजी गई है।

हालांकि शिकायतों पर कोई कार्रवाई होगी, इसकी संभावना कम दिख रही है। इसकी वजह यह है कि पीसीसी के पर्यवेक्षकों को वैसे भी रायशुमारी के दौरान बाहर भेज दिया जाता है। इससे परे जमीनी स्तर पर सक्रिय रहे कार्यकर्ताओं को जिला अध्यक्ष के चयन की नई प्रक्रिया से काफी उम्मीदें हैं। जिलाध्यक्ष का चयन मेरिट के आधार पर होता है, या फिर बड़े नेताओं की सिफारिशों को महत्व मिलता है। यह तो सूची जारी होने के बाद ही पता चलेगा।

भाजपा में किसकी चली?

आखिरकार काफी खींचतान के बाद भाजपा शहर जिला पदाधिकारियों की घोषणा कर दी गई। खास बात ये है कि सूची में सांसद बृजमोहन अग्रवाल के अलावा पूर्व मंत्री राजेश मूणत की राय को काफी महत्व दिया गया है।

जिलाध्यक्ष रमेश ठाकुर को सांसद बृजमोहन अग्रवाल का करीबी माना जाता है। बाकी दोनों महामंत्री अमित मैशरी और गुंजन प्रजापति, पूर्व मंत्री  राजेश मूणत के करीबी माने जाते हैं। हालांकि गुंजन के लिए सीएसआईडीसी चेयरमैन राजीव अग्रवाल, और छगनलाल मूंदड़ा ने भी सिफारिश की थी।आधा दर्जन में सत्यम दुआ, और नवीन शर्मा भी मूणत के करीबी हैं। जबकि ललित जैसिंघ, और सुभाष अग्रवाल बृजमोहन अग्रवाल खेमे के माने जाते हैं।

खास बात ये है कि दो विधायक पुरंदर मिश्रा, मोतीलाल साहू, और मेयर मीनल चौबे ने भी अपनी तरफ से कई नाम दिए थे। मगर उन्हें  महत्व नहीं मिला। हालांकि बृजमोहन अग्रवाल भी अपने एक करीबी युवा नेता को महामंत्री बनवाने के लिए काफी जोर लगाते रहे, लेकिन उन्हें मंत्री पद पर संतोष करना पड़ा।


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