राजपथ - जनपथ
संविदा की परंपरा रही है
विधानसभा के नए भवन के उद्घाटन की तैयारी चल रही है। इस सिलसिले में स्पीकर डॉ. रमन सिंह, सीएम विष्णुदेव साय, और डिप्टी सीएम अरुण साव के साथ बैठक कर चुके हैं। अगले कुछ दिनों में नया विधानसभा भवन, छत्तीसगढ़ सचिवालय को हैंडओवर कर दिया जाएगा। इससे परे विधानसभा सचिवालय के कुछ सीनियर अफसरों को संविदा नियुक्ति देने पर विचार चल रहा है।
विधानसभा के डिप्टी सेक्रेटरी आरके अग्रवाल 30 सितंबर को रिटायर हो रहे हैं। उन्हें संविदा नियुक्ति देने पर विचार चल रहा है। स्पीकर ने उनकी फाइल बुलवाई है। सब कुछ ठीक रहा, तो अग्रवाल का एक साल की संविदा नियुक्ति दी जा सकती है। एक नवंबर को नए विधानसभा भवन का उद्घाटन है, और 30 नवंबर को सचिव दिनेश शर्मा रिटायर होने वाले हैं। ऐसे में उन्हें भी संविदा नियुक्ति मिल सकती है।
संविदा नियुक्ति देने के पीछे एक तर्क यह भी है कि विधानसभा में सीनियर अफसरों की कमी है। कई अफसरों का प्रमोशन विलंब से हुआ, और इस वजह से शीर्ष पद तक पहुंचने लायक अनुभव नहीं है। वैसे भी दिनेश शर्मा से पहले देवेन्द्र वर्मा, और चंद्रशेखर गंगराडे को संविदा नियुक्ति मिली थी। ऐसे में संविदा की परम्परा आगे भी जारी रह सकती है।
संविदा विभाग बना निर्माण विभाग
प्रदेश का एक निर्माण विभाग इन दिनों संविदा विभाग बना हुआ है। इस विभाग के सचिवालय से लेकर संचालनालय, प्रमुख अभियंता, मुख्य अभियंता, कार्यालय में संविदा नियुक्ति आसानी से मिल सकती है। इसके पीछे एक कुछ लोग सक्रिय हैं बस उन्हें ही चढ़ावा देने की जरूरत होती है। 2 वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त लोगों को भी बुलाकर संविदा नियुक्ति दी जा रही है।
लेनदेन के बल पर ऐसे सक्षम लोग पहुंच के माध्यम से पदोन्नत के लिए इन दो वर्षों से इंतजार कर रहे। अधिकारों का हनन कर रहे हैं। 5 वर्ष से विभाग में कोई नियुक्ति न होने से वहां कार्यरत संविदा प्लेसमेंट अस्थाई कर्मचारी भी नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं। ऐसी नियुक्तियों की शिकायत पर पूर्व मंत्री ने अपने एक निज सचिव को हटा दिया था। यह सोचकर की संविदा गिरोह टूटेगा। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया । हाल में सेवानिवृत्ति के एक माह के अंदर मुख्य अभियंता कार्यालय में कार्यरत पर्यवेक्षक को नियुक्ति दी गई और एक उप अभियंता की संविदा नियुक्ति एक वर्ष बढ़ा दी गई। वर्तमान में भी अनेक लोग इस चैनल को पकड़ कर संविदा नियुक्ति के लिए प्रयास कर रहे हैं। लगभग 6-7 आवेदन ऊपर अग्रेषित करा लिए गए हैं। इनसे पहले मुख्य अभियंता, ईएनसी संविदा नियुक्ति प्राप्त करने में सफल रहे हैं। बल्कि सेवानिवृत्ति के बाद उसी पद पर पदस्थ भी हो रहे हैं। ऐसे बड़े पद से सेवानिवृत्त होने पर ओपीएस में 50000/- रू से अधिक पेंशन पाने के बाद संविदा वेतन प्राप्त कर रहे है। तो स्थाई अधिकारी कर्मचारियों को रिक्त पद में समायोजन के अधिकार से वंचित होना पड़ रहा है। कुल मिलाकर यह विभाग संविदा विभाग बना हुआ है।
हाजिरी दर्ज करने की क्लोन तकनीक
लाइवलीहुड कॉलेज एक ऐसा कौशल विकास केंद्र है जो युवाओं को नौकरी पाने या अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करता है। यहाँ कृषि, बागवानी, निर्माण, स्वास्थ्य सेवा, और विभिन्न उद्योगों से जुड़े कई तरह के मुफ्त पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। प्रशिक्षण के बाद, प्रतिभागियों को उद्योग-मान्यता प्राप्त प्रमाण पत्र मिलते हैं और कॉलेज द्वारा रोजगार सहायता भी प्रदान की जाती है। छत्तीसगढ़ के एक दो नए जिलों को छोडक़र प्रत्येक जिले में कम से कम एक लाइवलीहुड कॉलेज तो है ही। ताजा आंकड़ों की मानें तो अब तक इनमें 36 हजार से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है। पर यह प्रशिक्षण हमेशा संदेह के घेरे में रहे हैं। जिन लोगों को यह लगता है कि छात्र-छात्राओं की हाजिरी बायोमैट्रिक पद्धति से होने के कारण इसमें घोटाला मुमकिन नहीं है, उन्हें जांजगीर-चांपा की हाल की घटना को देखना चाहिए। यहां कॉलेज के सहायक संचालक और लेखापाल ने छात्र-छात्राओं के फिंगरप्रिंट का ही क्लोन बना डाला। प्रशिक्षणार्थी आएं न आएं, उनकी हाजिरी इन्हीं क्लोन फिंगरप्रिंट के जरिये दर्ज कर ली जाती थी। एक जागरूक नागरिक प्रशांत राठौर ने इसकी शिकायत वीडियोग्राफी के साथ कलेक्टर से की थी। कलेक्टर ने जांच की और पाया कि शिकायत सही है। अब सहायक संचालक और लेखापाल की सेवाएं समाप्त तो कर दी गई है पर क्लोन हाजिरी ने बता दिया कि सरकारी योजनाओं की जितनी चाहे डिजिटल तरीकों से निगरानी रखने की कोशिश की जाए, जिनको सरकारी फंड का फर्जीवाड़ा करना है, वे कहीं से भी रास्ता निकाल लेते हैं।
चुनावी मौसम की ट्रेन
बिहार में चुनाव से पहले रेलवे ने भी हजारों करोड़ की नई परियोजनाओं का ऐलान किया है। कई ट्रेनों की घोषणा हुई हैं, कुछ पटरी पर आ गई हैं। इनमें से एक है- नमो भारत ट्रेन। एक यात्री ने सोशल मीडिया पर यह तस्वीर यह कहते हुए डाली है कि ट्रेन फ्लॉप हो गई, सारी सीटें खाली हैं। सामान्य ट्रेनों के मुकाबले इसका किराया चार गुना है। यात्री इसमें सवार होने के लिए दिलचस्पी दिखा ही नहीं रहे हैं।


