राजनांदगांव
दो दिनी हड़ताल के आखिरी दिन केंद्र के खिलाफ नारेबाजी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 16 मार्च। बैंकों के निजीकरण को लेकर राष्ट्रव्यापी दो दिनी हड़ताल के आखिरी दिन हड़ताली बैंक कर्मियों को महापौर हेमा देशमुख का समर्थन मिला। उन्होंने हड़ताल का समर्थन करते हुए कहा कि कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए बैंकों को निजी हाथों में सौंपना लोकतंत्र के लिए घातक है। बैंकों के जरिये जनता के हित सुरक्षित है।
तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी ने गरीब तबके को आर्थिक समृद्धि देने के लिए बैंकों का राष्ट्रीकरण किया। उन्होंने कहा कि तानाशाही रूख अख्तियार करते हुए बैंकों का निजीकरण करने पर आमादा हैं। महापौर ने कहा कि देश के सरकारी संस्थाओं को बेचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि लगातार निजीकरण के चलते गरीब जनता की संपत्ति सुरक्षित नहीं है। महापौर ने कहा कि हड़ताली बैंककर्मियों की मांग पूरी तरह से जायज है। इसका लगातार विरोध किया जाएगा। इससे पहले बैंक कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर काफी नारेबाजी की। कल जहां बैंकों के बंद होने से परेशान रहे व्यापारियों को आज भी लेनदेन के लिए अलग-अलग स्तर पर दिक्कतें हुई। कल हुए हड़ताल से जिले में करीब 3 अरब का कारोबार प्रभावित हुआ। कुल मिलाकर पिछले दो दिन के भीतर 500 करोड़ रुपए का व्यापार पर विपरीत असर पड़ा है।
बताया जा रहा है कि बैंक कर्मचारी केंद्र सरकार द्वारा लगातार बैंकों का निजीकरण और विलय किए जाने की नीति को लेकर आंदोलन करने के लिए सडक़ पर लड़ाई लड़ रहे हैं। आज दूसरे दिन भी स्थानीय भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य शाखा के सामने एकत्रित होकर बैंक कर्मचारियों ने केंद्र सरकार के विरूद्ध नारेबाजी की।
राजनंादगांव जिले में करीब 600 कर्मचारी अलग-अलग राष्ट्रीयकृत बैंकों में कार्यरत हैं। युनाईटेड बैंक फोरम ऑफ इंडिया के बैनर तले हुए इस हड़ताल से व्यवसायियों को दिक्कतें हुई। इस संबंध में बैंक यूनियन के जिला सचिव सतीश चौधरी ने बताया कि एक सूत्रीय मांग के तहत यह हड़ताल हुआ है।


