राजनांदगांव
शेरपार स्कूली प्राचार्य को किया ताकीद
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 15 मार्च। मानपुर-मोहला मार्ग के अंदरूनी इलाकों के स्कूलों में अध्यापन व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचे राजनांदगांव कलेक्टर टीके वर्मा उस समय खफा हो गए, जब उन्होंने एक महिला व्याख्याता द्वारा वाट्सअप में अवकाश अर्जी देने की बात सुनकर कड़ी नाराजगी जाहिर की।
मोहला ब्लॉक के शेरपार हाईस्कूल का एकाएक निरीक्षण करने पहुंचे कलेक्टर ने प्राचार्य केआर लारिया की जुबानी व्याख्याता बरखा वासनिक द्वारा वाट्सअप में छुट्टी का आवेदन दिए जाने पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने स्पष्ट तौर पर प्राचार्य को ताकीद करते कहा कि वाट्सअप में अवकाश का आवेदन कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा। दरअसल कलेक्टर 10वीं के विद्यार्थियों की परीक्षा की तैयारी को लेकर कक्षा में दाखिल हुए। उनकी नजर सीधे शिक्षकों की उपस्थिति पंजीयन पर पड़ी। जिसमें उन्होंने पाया कि एक शिक्षिका गैरमौजूद है। कलेक्टर ने प्राचार्य को आवेदन की अर्जी दिखाने को कहा। इसके जवाब में प्राचार्य ने वाट्सअप में अर्जी देने की जानकारी दी।
बताया जा रहा है कि व्याख्याता वासनिक दल्लीराजहरा से आना-जाना करती है। वह कलेक्टर के आकस्मिक दौरे के दौरान गैरमौजूद थी। कलेक्टर वर्मा ने स्कूल के अन्य शिक्षकों से भी शिक्षण व्यवस्था को लेकर जानकारी ली। शिक्षकों से भी कलेक्टर ने कुछ सवाल पूछे, लेकिन वह निरूत्तर रहे। शेरपार स्कूल में 183 विद्यार्थी अलग-अलग कक्षाओं में अध्ययनरत हैं। बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिहाज से स्कूलों में इन दिनों 10वीं-12वीं के विद्यार्थियों की कक्षाएं संचालित की जा रही है। ऐसे में व्याख्याता की अनुपस्थिति से कलेक्टर काफी सख्त हो गए। उन्होंने स्कूल का निरीक्षण की वापसी के बीच सीधे वेतन काटकर विभागीय अधिकारियों को सूचित करने का निर्देश दिया। बताया जा रहा है कि शेरपार हाईस्कूल में ज्यादातर शिक्षक पड़ोसी जिले बालोद और दल्ली से आना-जाना करते हैं। कलेक्टर ने शैक्षणिक व्यवस्था को पुख्ता बनाने के लिए प्राचार्य को कड़े निर्देश दिए। कलेक्टर का मत है कि कोरोनाकाल में शिक्षण व्यवस्था काफी कमजोर है। ऐसे में शिक्षकों को पूरी जवाबदारी के साथ अपने कर्तव्य का निर्वहन करना चाहिए।
बताया जा रहा है कि वाट्सअप में आवेदन पत्र दिए जाने के बढ़ते चलन पर रोक लगाने के लिए कलेक्टर ने व्याख्याता को दंडित किया है। कलेक्टर की इस कार्रवाई से शिक्षकों में हडक़ंप की स्थिति निर्मित है।


