राजनांदगांव
राजनांदगांव में 5 हजार इलेक्ट्रिक कार, ऑटो व दोपहिया वाहन का रजिस्ट्रेशन
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 14 जून। वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल के बढ़ते संकट और महंगाई का सामना कर रहे लोगों के लिए एक मजबूत परिवहन संसाधन के रूप में इलेक्ट्रिक व्हीकल बना है। इलेक्ट्रिक व्हीकल का चलन लोगों के बीच बढ़ा है। केंद्र और राज्य सरकार भी बैटरी से चलने वाली वाहनों का इस्तेमाल करने पर जोर दे रही है।
राजनांदगांव जिले में इलेक्ट्रिक वाहन चलाने के लिए लोगों की रूचि साफतौर पर दिख रही है। सडक़ों में पेट्रोल-डीजल से दौडऩे वाली वाहनों के बीच इलेक्ट्रिक गाडिय़ां भी नजर आ रही है। हालांकि इलेक्ट्रिक व्हीकल की कीमतें अधिक होने के कारण अब भी इसकी पहुंच से आम आदमी दूर है। लिथियम बैटरी के महंगे होने के कारण इलेक्ट्रिक व्हीकल के दाम सुनकर लोग खरीदी करने की स्थिति में नहीं है।
मिली जानकारी के मुताबिक राजनांदगांव, मोहला-मानपुर और खैरागढ़ जिले में इलेक्ट्रिक वाहन चलाने के लिए लोगों का उत्साह बढ़ा है। राजनांदगांव आरटीओ कार्यालय में अब तक 4 हजार 735 इलेक्ट्रिक व्हीकल का पंजीयन हुआ है। जिसमें मोटर साइकिल, कार, ऑटो शामिल है। इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी का भुगतान भी किया गया है। जिसमें 2940 गाडिय़ों को सब्सिडी का लाभ दिया गया है। एक जानकारी के मुताबिक मोटर साइकिल 362, कार 1430 और आटो 3043 का पंजीयन किया गया है।
इस संबंध में क्षेत्रीय आरटीओ अधिकारी अनिल भगत ने ‘छत्तीसगढ़’ को बताया कि परिवहन के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल एक मजबूत विकल्प है। लोगों में इलेक्ट्रिक गाडिय़ों के प्रति झुकाव बढ़ा है। राज्य सरकार भी इस विषय को लेकर गंभीर है। बताया जा रहा है कि मोटर साइकिल के अलावा कारों का भी शौक लोगों में बढ़ा है। महंगी कार से लेकर इलेक्ट्रिक ऑटो की खरीदी हो रही है।
राजनांदगांव शहर में हर चौथे घर में एक इलेक्ट्रिक व्हीकल खड़ी नजर आ रही है। आवाजाही के लिहाज से उक्त वाहनों को सुविधाजनक माना जा रहा है। साथ ही मेन्टेनेंस को लेकर भी कोई अतिरिक्त खर्च नहीं है। शहर में लगातार इलेक्ट्रिक व्हीकल के नए शो-रूम खुल रहे हैं। लोगों में इलेक्ट्रिक व्हीकल को एक तरह से वन-टाईम निवेश के रूप में भी देखा जा रहा है। यानी एक बार इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदने के बाद पेट्रोल-डीजल के लिए पंपों में कतार में खड़े होने का झंझट भी नहीं है। वहीं पर्यावरण को भी इलेक्ट्रिक व्हीकल के बढ़ते चलन से कोई नुकसान नहीं है।


