राजनांदगांव

भीषण गर्मी ने बेशकीमती सागौन की पैदावार को झुलसाया
06-May-2026 4:19 PM
भीषण गर्मी ने बेशकीमती सागौन की  पैदावार को झुलसाया

सागौन के जंगल ठूंठ में बदले, जलवायु परिवर्तन से खतरे में जंगल

प्रदीप मेश्राम

राजनांदगांव, 6 मई।  (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता) इस साल पड़ रही भीषण गर्मी से बेशकीमती सागौन की पैदावार को भी झुलसाकर रख दिया है। जिले के वन क्षेत्र में सागौन की भरमार है। राजनांदगांव जिले के अलावा मोहला-मानपुर, खैरागढ़ और कवर्धा में भी बेशकीमती सागौन के विशालकाय वृक्ष हैं। इस साल अप्रैल में पड़ी गर्मी से सीधा असर सागौन की पैदावार (ग्रोथ) पर विपरीत असर डाला है।

बताया जा रहा है कि जलवायु परिवर्तन के अलावा सूर्य की तीखे किरणों ने पेड़ों-पौधों को नुकसान पहुंचाया है। यही कारण है कि कुछ इलाकों के सागौन के जंगल ठूठ में तब्दील हो गए हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि मैदानी जंगलों से ज्यादा पहाड़ों के सागौन के पेड़ों को नुकसान हुआ है। इसके पीछे वन विभाग के अफसर तीखी धूप के चलते पहाड़ों को तपने की एक वजह बता रहे हैं। पेड़ों को पर्याप्त पानी नहीं मिलने से ऐसी स्थिति बन गई है।

इस संबंध में रिटायर्ड वन अधिकारी आरएल गजभिये ने ‘छत्तीसगढ़’ को बताया कि पहाड़ों में नमी की कमी की वजह से सागौन की पैदावार प्रभावित हो सकती है। पानी की कमी से पूर्ण मिनरल्स से पौधे वंचित हो सकते हैं। जिससे ऐसी स्थिति बन रही है। गौरतलब है कि बारिश के सीजन के बाद सागौन में पतझड़ होता है और मार्च-फरवरी के बाद नए पत्ते निकलते हैं। इस साल  पत्ते नहीं आने से सागौन ठूंठ में बदल गया है।

इधर जिले के बड़े जंगलों में सागौन की हरियाली  मौसम की मार के चलते गायब हो गई है। बताया जा रहा है कि ग्लोबल वार्मिंग के अलावा पहाड़ों की गर्मी  ने पैदावार को बुरी तरह से प्रभावित किया है। वन विभाग पेड़ों को बचाने की दिशा में काम करने का दावा कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति कुछ और नजर आ रही है। राजनांदगांव का समूचा इलाका  सागौन के जंगलों के लिए एक विशिष्ट पहचान रखता है। ऐसे में सागौन के जंगलों पर भीषण गर्मी कहर बरपा रही है।


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