राजनांदगांव

राजगामी संपदा उपाध्यक्ष निर्वाणी को वैष्णव समाज ने भेजा नोटिस
03-May-2026 4:15 PM
राजगामी संपदा उपाध्यक्ष निर्वाणी को वैष्णव समाज ने भेजा नोटिस

समाज अध्यक्ष ने कहा- समाज को विश्वास में लिए बगैर सरकार का आभार जताना अनुचित
‘छत्तीसगढ़’  संवाददाता
राजनांदगांव, 3 मई।
राजगामी संपदा के नवनियुक्त उपाध्यक्ष मनोज निर्वाणी के लिए एक सामाजिक मुश्किल खड़ी हो गई है। वैष्णव समाज ने निर्वाणी के विरूद्ध कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे किस अधिकार से अपनी नियुक्ति को लेकर सरकार का आभार व्यक्त किया है। समाज की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस से खलबली मच गई है। समाज निर्वाणी के विरूद्ध एक बड़ी कार्रवाई कर सकता है।
 मिली जानकारी के मुताबिक वैष्णव समाज ने एक नोटिस जारी कर निर्वाणी को 6 मई को समाज के सामने उपस्थित होने का आदेश जारी किया है। वैष्णव समाज इस बात से खफा है कि निर्वाणी ने बीते दिनों समाज की बिना अनुमति के सरकार का आभार जताया। इस मामले को लेकर समाज के भीतर निर्वाणी एवं अन्य लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की गई है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से मुलाकात कर निर्वाणी व कुछ सामाजिक लोगों ने सरकार का आभार व्यक्त किया। समाज ने इस तरह के हरकतों को सामाजिक विरोधी करार दिया है।

बताया जा रहा है कि 27 अप्रैल को समाज का प्रतिनिधित्व करते हुए निर्वाणी ने विस अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से अपनी नियुक्ति को लेकर आभार जताया। जैसे ही इस बात की जानकारी समाज को लगी तो निर्वाणी और अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठी। विस अध्यक्ष से मुलाकात के दौरान मौजूद कुछ लोगों ने समाज से माफी भी मांगी है। सार्वजनिक रूप से भविष्य में इस तरह की कृत्य नहीं करने समाज को आश्वस्त भी किया। इस बीच समाज के मंडलेश्वर अनुपदास वैष्णव ने मनोज निर्वाणी को 6 मई को उपस्थित होने का निर्देश दिया है। 30 अप्रैल को निर्वाणी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

इस संबंध में ‘छत्तीसगढ़’  से श्री निर्वाणी ने स्पष्ट जवाब देने से बचते हुए कहा कि कुछ पत्र जारी हुआ है, लेकिन मैं पढ़ा नहीं हूं। पत्र देखने के बाद ही कुछ कह पाउंगा। इधर राजगामी संपोदा के अध्यक्ष पद के लिए समाज ने जोरदार मांग की थी। राज्य सरकार ने तुष्टिकरण की नीति अपनाते हुए उपाध्यक्ष पद पर समाज को जिम्मा दिया, लेकिन अध्यक्ष पद साहू समाज के खाते में चला गया। इसी बात को लेकर समाज में काफी रोष है। समाज का कहना है कि वैष्णव समाज का राजगामी संपदा में सर्वप्रथम नैतिक अधिकार है, क्योंकि यहां के राजा वैष्णव समाज से वास्ता रखते थे। लंबे समय से वैष्णव समाज राजगामी संपदा अध्यक्ष पद पर अपना दावा करता रहा है, लेकिन राजनीतिक वजहों से समाज इस पद पर आज पर्यन्त काबिज नहीं हो पाया।


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