राजनांदगांव
बढ़ी हुई सम्पत्तिकर पर महापौर ने किया पुनर्विचार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 21 अप्रैल। कलेक्टर गाईड लाइन के अनुसार संपत्ति करों में हुई वृद्धि के बाद अब इसका विरोध भी देखने को मिला। नई गाईड लाइन से कई जगह पर संपत्ति कर 100 से 200 गुना बढ़ गया था। अब सामान्य सभा में बजट से पहले महापौर मधुसूदन यादव ने शहर की जनता को राहत देने बढ़ी हुई दरों को वापस लेते मेयर इन काउंसलिंग में वर्ष 2025-26 के संपत्ति कर में ही 10 प्रतिशत की वृद्धि घरेलू के लिए और 20 प्रतिशत की वृद्धि व्यावसायिक क्षेत्र की संपत्ति पर की है।
सोमवार को महापौर मधुसूदन यादव ने प्रेस कान्फ्रेंस लेते कहा कि यदि घरेलू संपत्ति करदाता एक हजार रुपए संपत्ति कर दे रहा था, तो अब उसे 1100 रुपए संपत्ति कर देना होगा। इसी तरह व्यावसायिक क्षेत्र में यदि कोई एक हजार रुपए संपत्ति कर दे रहा था तो उसे बढ़ी हुई दर से 1200 रुपए देना होगा। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि मामूली वृद्धि है, जो 9 वर्ष बाद की गई है। उन्होंने कहा कि हम जनता पर ज्यादा कर का बोझ नहीं देंगे।
महापार ने कहा कि 01 अप्रैल से गाईड लाइन दर के अनुसार जिन्होंने बढ़ी हुई संपत्ति कर अदा कर दिया है, उन्हें भी इसमें राहत मिलेगी। उनकी अतिरिक्त जमा राशि के समायोजन हो जाएगा या वह अपनी राशि वापस ले सकेंगे। उन्होंने विपक्ष की कांग्रेस को भी आड़े हाथों लिया।
उन्होंने कहा कि जब संपत्ति कर में गाईड लाइन दर के अनुसार बढ़ोत्तरी हो रही थी, तो कांग्रेस के लोग इसमें खामोश थे और कोई भी आपत्ति नहीं की। इसके खिलाफ वोटिंग नहीं की। वहीं दर बढऩे के बाद उन्होंने जनता को छलने के लिए विरोध का दिखावा किया। इधर बढ़ाए गए संपत्तिकर को लेकर लगातार विरोध दर्ज कराने वाली कांग्रेस ने संपत्तिकर बढ़ोत्तरी के निर्णय को वापस लेने के बाद इसका समर्थन किया है। नेता प्रतिपक्ष संतोष पिल्ले ने कहा कि भाजपा ने पहले शासन के निर्देश बताते गुमराह करने का काम किया था। जनहित में हमने विरोध दर्ज कराया। यही कारण है कि सरकार को यूटर्न लेना पड़ा।
महापौर श्री यादव ने कहा कि व्यापारी संगठन और अन्य लोगों द्वारा भी बढ़ी हुई दर को लेकर इसमें पुनर्विचार की मांग की गई थी। जिसके बाद हमने भी वस्तुस्थिति का बारीकी से अध्ययन किया। जिससे कई क्षेत्रों में दरें काफी बढ़ी हुई लगने पर संशोधन किया गया। नियमों के तहत तथा कलेक्टर गाईड लाइन अनुसार दर निर्धारित करने पर संपत्ति कर में लगभग सभी वार्डों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई।
जिससे जनसामान्य पर संपत्तिकर वृद्धि का आर्थिक बोझ पड़ा। जिसका परिणाम यह हुआ कि कुछ क्षेत्रों में संपत्तिकर दोगुना तथ कहीं दोगुना से ज्यादा वृद्धि हो गई थी। इस दौरान नगर निगम अध्यक्ष पारस वर्मा और एमसआईसी मेम्बर उपस्थित थे।


