राजनांदगांव
भाजपा में कोहराम मचा, माफी मांगने के बाद संभली स्थिति
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 2 अप्रैल। जिला भाजपा में वर्चस्व को लेकर दो दिग्गज नेताओं में छिड़ा विवाद राजनीतिक गलियारों में सुर्खियां बटोर रहा है। अनुशासन के मामले में निचले कार्यकर्ताओं को सीख देने वाले वरिष्ठ नेताओं ने ही पार्टी की साख से परे विवाद की स्थिति पैदा कर दी है। भाजपा के एक प्रभावशाली युवा नेता की दखल के बाद मामला फिलहाल शांत हुआ है।
मिली जानकारी के अनुसार जिला भाजपा के दो नेताओं की पिछले दिनों एक कार्यकर्ता पर अत्याधिक कार्य का बोझ होने की वजह से बहस हुई। दरअसल भाजपा में पिछले कुछ महीनों में गुटबाजी को तेजी से बढ़ावा मिला है। संगठन और दिग्गज नेताओं के बीच कुई मुद्धों को लेकर टकराव की खबरे बाहर आने लगी है। इसी बीच दो प्रमुख नेताओं में विवाद इस कदर बढ़ा कि एक युवा चेहरे को मामले में दखल देने के लिए आगे आना पड़ा।
बताया जा रहा है कि आईटी सेल से जुड़े एक कार्यकर्ता पर संगठन के एक प्रमुख नेता ने कुछ जरूरी काम करने का निर्देश दिया। यही से मामला विवाद में बदल गया। आईटी सेल के कार्यकर्ता ने कार्य बोझ का हवाला देकर नए कार्य करने से इंकार कर दिया। यह बात सुनते ही तैश में आकर सांगठनिक नेता ने कार्यकर्ता को झिडक़ी लगा दी। इसके बाद मामला दूसरे शीर्ष नेता तक पहुंचा। दोनों नेताओं में जमकर कहासुनी हुई। सूत्रों का कहना है कि दोनों नेता के आपसी झगड़े की खबर राजधानी तक पहुंच गई। बढ़ते विवाद के बाद राजधानी के युवा नेता को मामले में हस्तक्षेप करने के लिए राजनांदगांव आना पड़ा।
चर्चा है कि सांगठनिक नेता से दूसरे प्रमुख नेता से विवाद करने पर माफी मांगने को कहा गया। सांगठनिक नेता को यह बात जल्द समझ में आ गई कि दूसरे नेता का पलड़ा भारी है। इसके बाद स्टेडियम रोड स्थित एक मकान में दोनों नेताओं की बैठक हुई। बैठक में सांगठनिक नेता को खरी-खोटी सुननी पड़ी। इधर पार्टी के भीतर दोनों नेताओं के आपस में भिडऩे की खबर को कार्यकर्ता सार्वजनिक रूप से चटकारे लेकर लोगों को बतौर किस्सा सुना रहे है। बताया जाता है कि संगठन के अन्य नेताओं ने भी ऐसी स्थिति को पार्टी के लिए नुकसानदायक बताकर प्रदेश के शीर्ष नेताओं से दखल देने की मांग की है। भाजपा में बढ़ती गुटबाजी के कारण संगठन में बिखराव की स्थिति भी बन गई है। राजनांदगांव जिलें में भाजपा में कई धड़े सक्रिय है। राजनीतिक रूप से पार्टी के लिए यह स्थिति कतई ठीक नही है। भाजपा मेें बढ़ रही गुटीय राजनीति से कार्यकर्ता भी उलझन में पड़ गए है।


